
Dhanbad: झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह अपने चचेरे भाई कांग्रेस नेता नीरज सिंह समेत चार लोगों की हत्या के मामले में अप्रैल 2017 से जेल में बंद हैं. उन्होंने जमानत याचिका दायर कर कोर्ट से मेडिकल ग्राउंड पर जमानत देने का आग्रह किया था. उन्हें जमानत नहीं मिल रही है. बार बार उनकी तबीयत बिगड़ जाती है. मेडिकल ग्राउंड पर कोर्ट से जमानत चाहते हैं लेकिन उन्हें फिट करार के आधार पर बेल रद्द किया जाता है. अब, आज संजीव सिंह ने कोर्ट में पिटीशन दायर कर इच्छा मृत्यु मांगी है. अदालत में दायर याचिका में संजीव सिंह ने लिखा कि इलाज के लिए नहीं भेज सकते तो मुझे इच्छा मृत्यु की इजाजत दे दें. संजीव सिंह की ओर से अदालत में दिए गए याचिका की पुष्टि उनके अधिवक्ता मोहम्मद जावेद ने की है. अधिवक्ता ने बताया कि संजीव सिंह की ओर से यह याचिका धनबाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश 16 की कोर्ट में आज, मंगलवार को दायर की गई है.
यहां बता दें कि संजीव सिंह की ओर से उनके अधिवक्ता मोहम्मद जावेद ने सोमवार को जिला व सत्र न्यायाधीश 16 अखिलेश कुमार की अदालत में बहस करते हुए कहा कि विचाराधीन बंदी एसएनएमएमसीएच के क्रिटिकल वार्ड में जीवन और मौत के बीच जूझ रहा है. उसका इलाज व जांच पत्राचार के बीच में फंसा हुआ है. उन्होंने अदालत में खुलासा किया कि रविवार को सुरक्षा बल संजीव को रांची स्थित रिम्स ले जाने के लिए अस्पताल पहुंची थी, परंतु संजीव सिंह ने जाने से इंकार कर दिया. रांची स्थित रिम्स में संजीव को जान का खतरा है. यह बात गवाही के दौरान भी आ चुकी है. अधिवक्ता ने फिर हायर मेडिकल इंस्टिट्यूट में संजीव का इलाज कराने का आदेश पारित करने की प्रार्थना अदालत से की.
उपायुक्त से मिलने पहुंची पत्नी रागिनी सिंह
उपायुक्त से मिलने पहुंची भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रागिनी सिंह मीडिया से मुखातिब होते हुए बताया कि झरिया के पूर्व भाजपा विधायक संजीव सिंह ने मंगलवार को न्यायालय में आवेदन देकर इच्छा मृत्यु मांगी है. संजीव सिंह ने यह आवेदन जिला एवं सत्र न्यायाधीश 16 की कोर्ट में दायर किया है. उन्होंने बताया कि संजीव सिंह के बेहतर इलाज के लिए बाहर ले जाने में हर स्तर से राज्य सरकार और जिला प्रशासन बाधा डाल रही है उन्हें अस्पताल में ही पड़े रहने देकर कर मारने की ही साजिश है .ऐसे में मजबूर होकर उन्होंने इच्छा मृत्यु की पिटीशन डाली है.

मालूम हो कि पूर्व विधायक संजीव सिंह 11 जुलाई को धनबाद मंडल कारा से एसएनएमएमसीएच में भर्ती कराये गये थे और उसी दिन झारखंड हाइकोर्ट ने मेडिकल ग्राउंड पर उन्हें जमानत देने से मना कर दिया था. जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय की अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद प्रार्थी संजीव सिंह की याचिका खारिज कर दी थी. अस्पताल में दाखिला कराते वक्त बताया गया था कि संजीव जेल में कुर्सी से गिर कर घायल हो गये हैं. अदालत ने जेल प्रशासन की रिपोर्ट को देखते हुए प्रार्थी को राहत देने से इंकार कर दिया था. जेल प्रशासन ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट का हवाला देते हुए प्रार्थी को मेडिकली फिट बताया था. 11 जुलाई से पूर्व मेडिकल बोर्ड ने जांच में संजीव सिंह की स्थिति सामान्य पायी थी. रिपोर्ट में उन्हें किसी प्रकार की गंभीर बीमारी नहीं होने की बात बतायी गयी थी.
एसएनएमएमसीएच के सीसीयू में भर्ती संजीव सिंह की हालत स्थिर बनी हुई थी. अदालत ने उनके इलाज के लिए गठित मेडिकल बोर्ड ने जांच के बाद उन्हें रिम्स भेजने की सलाह दी है. मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आलोक में कोर्ट ने उन्हें रिम्स भेजने का निर्देश दिया है. धनबाद कोर्ट के आदेश पर पुलिस संजीव को लेने अस्पताल पहुंची, परंतु संजीव ने रांची रिम्स जाने से इनकार कर दिया. संजीव सिंह की पत्नी रागिनी सिंह और उनके समर्थक नहीं चाहते कि उन्हें रिम्स लाया जाए. वे लगातार इसका विरोध कर रहे हैं. संजीव सिंह की पत्नी रागिनी सिंह पहले भी कह चुकी हैं कि उनके पति का उपचार धनबाद के किसी बड़े निजी अस्पताल में कराया जाये. सारा खर्च उनका परिवार वहन करेगा. उन्होंने आशंका जतायी कि रिम्स में उनके पति का सही इलाज नहीं होगा. सरकार के दबाव में उनके पति का समुचित इलाज नहीं हो रहा है. रिम्स में उन्हें गलत और हानिकारक दवा देकर क्षति भी पहुंचा सकते हैं. कांड के सूचक पक्ष सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के लोग हैं. उनका समस्त परिवार विपक्षी दल भाजपा से जुड़ा है.




