JharkhandMain SliderRanchi

डीजीपी डीके पांडेय ने पत्नी के नाम पर खरीदी 51 डिसमिल जीएम लैंड!

Ranchi: जिला रांची, अंचल का नाम कांके. हल्का-03 और मौजा चामा. खाता संख्या 87 और प्लॉट संख्या 1232. कुल जमीन 50.90 डिममिल. इस भूखंड की खरीद पूनम पांडेय यानी झारखंड के डीजीपी डीके पांडे की पत्नी के नाम पर की गयी है. सरकारी कागजात में यह जमीन गैरमजरुवा नेचर की है. आरोप है कि इस गैरमजरुवा जमीन का म्यूटेशन करा कर रैयती प्लॉट में तब्दील कर दिया गया. जमीन की रजिस्ट्री और म्यूटेशन तब हुई है, जब झारखंड के डीजीपी के पद पर डीके पांडेय पदस्थापित रहे हैं. म्यूटेशन 2018-19 के वित्त वर्ष में हुआ है. संदेह व्यक्त किया जा रहा है कि इस जमीन को गैरमजरुवा से रैयती बनाने में प्रशासनिक तौर पर मदद की गयी है. आम तौर पर अगर किसी आम आदमी की जमीन जीएम लैंड हो जाये,  तो उसका म्यूटेशन कराने में सर्किल ऑफिस नाकों चने चबवा देता है. लेकिन ओहदेदार लोगों के लिए यह एक साधारण सा काम है. जिसे करने के लिए प्रशासन के अधिकारी नियम और कानून को ताक पर रख देते हैं. इसके कई उदाहरण मौजूद हैं.

इसे भी पढ़ें – वादा कर भूल गयी सरकारः सात महीने बाद भी 349 शहीदों के आश्रितों को नहीं मिला आवास 

सरकार का है आदेश

26 अगस्त 2015 को राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग की तरफ से सचिव कमल किशोर सोन ने सभी जिलों के डीसी को एक आदेश जारी किया था. जिसमें कहा गया था कि केशर हिंद भूमि, गैरमजरुवा आम भूमि, गैरमजरुवा खास भूमि, वन भूमि, जंगल आदि विभिन्न विभागों के लिए अर्जित, हस्तांतरित और अन्य श्रेणी की सरकारी भूमि का हस्तांतरण विलेख के निबंधन को निबंधन अधिनियम 1908 की धारा 22 ‘क’ के अधीन लोकनीति के विरुद्ध घोषित किया जाता है. इस आदेश के जारी होने के करीब एक साल के बाद 15 जून 2016 को भी एक पत्र लिखा गया था. जिसमें ऊपर के आदेश को लागू करने की बात कही गयी थी.

advt

इसे भी पढ़ें – झामुमो का दर्दः हेमंत की सीनियर लीडरों व कैडर से दूरी, किचन कैबिनेट से हो रही दुर्गति

अगर कुछ गलत हुआ है तो जांच होगीः उपायुक्त

इस मामले पर पूछे जाने पर रांची के उपायुक्त राय महिमापत रे ने कहा कि वैसे तो इस जमीन के बारे में मुझे किसी तरह की कोई जानकारी नहीं है. फिर भी अगर जमीन में किसी भी तरह की कानूनी अड़चन पायी गयी तो निश्चित तौर पर जांच होगी.

इसे भी पढ़ें – झारखंड सरकार : सालभर में लगाया 25 रोजगार मेला, उसपर सालाना खर्च 3.45 करोड़, मिला सिर्फ 3242 को रोजगार

adv
advt
Advertisement

Related Articles

Back to top button