
Ranchi: झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास द्वारा शहीदों के आश्रितों को आवास देने का वादा सात महीने बीत जाने के बाद भी अधूरा है.
बता दें कि मुख्यमंत्री ने 30 अक्टूबर 2018 को इप्सोवा दीपावली मेला के उद्घाटन पर घोषणा की थी कि झारखंड में शहीद हुए 349 जवानों के आश्रितों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास दिया जाएगा. लेकिन घोषणा के सात महीने बाद भी ये महज घोषणा ही है.
मुख्यमंत्री ने किया था वादा
30 अक्टूबर 2018 की शाम जैप वन ग्राउंड में इप्सोवा की ओर से आयोजित दीपावली मेला के उद्घाटन के अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए मुख्यमंत्री रघुवर दास ने आवास देने की बात कही थी.
इसे भी पढ़ेंःझामुमो का दर्दः हेमंत की सीनियर लीडरों व कैडर से दूरी, किचन कैबिनेट से हो रही दुर्गति
इस मौके पर श्री दास ने कहा था कि 2014 के बाद झारखंड में बदलाव आया है. पुलिस के कारण झारखंड प्रदेश उग्रवाद के सफाये के करीब पहुंच चुका है. पुलिस की हमेशा समाज में आलोचना ही होती है.
लेकिन सच यह है कि पुलिस के जवान और अधिकारी पर्व – त्योहार के मौके पर भी अपने परिवार से दूर रहकर सुरक्षा में डटे रहते हैं. हमें इस पहलू को भी देखना चाहिए.
उन्होंने कहा कि अब दीपावली अंतर्राष्ट्रीय त्योहार बन चुका है. दीपावली के अवसर पर मां लक्ष्मी पुलिस और झारखंड की सभी जनता को समृद्धि प्रदान करें.
पुलवामा शहीदों के परिजनों को नहीं मिली राशि
अभी तक पुलवामा शहीदों के परिजनों को कैबिनेट के सदस्यों की एक दिन के वेतन की राशि नहीं पहुंची है. इस दौरान मुख्यमंत्री रघुवर दास समेत सभी मंत्रियों को सैलेरी मिल चुकी है. घोषणा के करीब तीन महीने हो गए हैं.
सीएम रघुवर दास की घोषणा के बाद कैबिनेट में सहमति बनी थी कि अधिकारियों और कर्मियों के वेतन से एक दिन का वेतन दिया जाये. लेकिन कर्मियों और अधिकारियों के वेतन से भी एक दिन के वेतन की राशि नहीं कटी है.
सरकार को एक सिस्टम तैयार करना था कि कैसे कैबिनेट के सदस्यों और सरकार के अधिकारी और कर्मियों के वेतन से राशि कट कर प्रधानमंत्री राहत कोष में जाये.
लेकिन इस दिशा में मीडिया में खबर छपने के अलावा कोई काम नहीं हुआ. ऐसे में पुलवामा के शहीदों के परिजन झारखंड सरकार से अपने आप को ठगा हुए महसूस कर रहे हैं.




