
Ranchi: राज्य में विस्थापन का मुद्दा बढ़ता जा रहा है लेकिन राज्य सरकार इस मुद्दे के प्रति उदासीन है. ये बातें सीपीआई के पूर्व सांसद भुवनेश्वर मेहता ने प्रेस वार्ता में कहीं उन्होंने कहा कि झारखंड में विस्थापन का तीसरा दौर शुरू हो गया है. जब से स्थानीय प्रशासन, आउट सोर्सिंग कंपनी सारे नियम कानून को ताक पर रख कर और ग्रामसभा को दर किनार कर जबर्दस्ती भूमि अधिग्रहण का काम कर रहे हैं. ताजा मामला हजारीबाग जिले में अडानी इंटरप्राइजेज को आवंटित गोंदलपुरा कोयला खदान का है जहां जिला प्रशासन द्वारा बुलाई गई जन सुनवाई में ग्रामीणों के प्रचंड बहुमत ने कोयला खदान के लिए जमीन दिए जाने से इंकार कर दिया. जिसके बाद अडानी इंटरप्राइजेज के लोगों ने पुलिस प्रशासन को मैनेज कर किसानों और रैयतों पर झुठा मुकदमा दर्ज कर उन्हें परेशान करना शुरू किया.
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वही, माकपा के राज्य सचिव प्रकाश विप्लव ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने घोषणा की थी की राज्य में जल्द विस्थापित आयोग का गठन किया जायेगा और एक समय सीमा के अंदर विस्थापितों की समस्याओं का निदान किया जायेगा लेकिन यह काम अभी तक लंबित है. उन्होंने कहा कि वार्ता के पूर्व वामदलों की बैठक बुलायी गयी थी. जहां निर्णय लिया गया कि 7 मई को हजारीबाग के बड़कागांव प्रखंड में अवस्थित गोंदलपुरा कोयला खदान जो अडानी इंटरप्राइजेज को आवंटित किया गया है. आंवटन रद्द किये जाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों से मिलने जायेगा. वही, झारखंड के जिन इलाकों मे विस्थापितों के संगठन आंदोलन कर रहे हैं उनको चिन्हित कर मई महीने में उनकी संयुक्त बैठक आयोजित किया जायेगा. जुन के अंतिम सप्ताह में एक राज्य स्तरीय कंवेंशन किए जाने और इस वर्ष के अंत मे राजधानी मे एक बड़ी रैली किए जाने का निर्णय लिया गया.




