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एक्शन में सीपी सिंह ! अपनी ही सरकार पर गरजे, कहा- पुलिस सहायता केंद्र का नाम बदलकर पुलिस वसूली केंद्र कर दीजिये

'दिशा' की बैठक में लगातार 20 मिनट तक सीपी सिंह बोलते रह गये, ‘ कोई इन्वेस्टर आएगा, तो गंदगी देखकर उसका दिमाग भिनभिना जाएगा’

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Ranchi: सोमवार को नगर विकास मंत्री सीपी सिंह पूरी तरह से एक्शन में रहे. कलेक्टेरियट जिला विकास समन्वय एवं अनुश्रवण समिति (दिशा) की बैठक में नगर विकास मंत्री को आमंत्रित किया गया था. यह बैठक पूरी तरह से सीपी सिंह के नाम रही. यूं कहें कि सीपी सिंह ने बैठक को पूरी तरह से हाईजैक ही कर लिया. लगातार 20 मिनट तक अपने ही सरकार की जमकर खिंचाई की. सरकारी व्यवस्था को निशाने पर रखा.

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मुद्दे से हटकर अलग मुद्दे पर गरजे

दिशा की बैठक में केंद्रीय योजनाओं के अनुपाल और पिछली बैठक के प्रतिवेदन पर चर्चा की जानी थी. लेकिन सीपी सिंह ने एक्शन के साथ राजधानी की पुलिस, विधि व्यवस्था और ट्रैफिक में हो रही धांधली पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि, यहां हमलोगों को इतनी मोटी-मोटी फाइल दे दी गई है, इससे क्या होगा?  ऐसी बैठक आपलोग करते रहिए, क्या हो जाएगा इससे.

मुख्यमंत्री आवास के सामने हत्या मामले में की गई कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि किसी सड़क से जाते लोगों की चेकिंग के नाम पर लोगों से वसूली की जाती है. आसपास के जिलों से बाइक या कार में आने वालों से चेकिंग के नाम पर पैसा वसूला जाता है.पुलिस सहायता केंद्र का नाम बदलकर पुलिस वसूली केंद्र कर दीजिये.

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एफआईआर भी नहीं होती दर्ज

सीपी सिंह ने कहा कि किसी थाना में आम आदमी की एफआइआर दर्ज नहीं होती. एक आदमी की स्कूटी चोरी हो गई, तो उसने थाना में रिपोर्ट दर्ज कराने की हिम्मत नहीं की. सुखदेव नगर में एक लड़का का किडनैप हुआ. नौ दिन तक परिजन चक्कर लगाते रहे. पुलिस को कहीं जाने के लिए पब्लिक से गाड़ी चाहिए.

नगर आयुक्त पर भी कसा तंज

सीपी सिंह ने रांची के नगर आयुक्त पर भी तंज कसा.  उन्होंने कहा कि, “मैंने छह बार नगर निगम के टोल फ्री में फोन किया. कोई नहीं उठाया. तीसरे दिन भी नहीं उठाया गया. ऐसे टोल फ्री से जनता की आंखों में धूल झोंक रहे हैं. फिर बोले, “प्रधानमंत्री आवास योजना का तो और बुरा हाल है. चाहे जितना भी ढिंढोरा पीट लें. आवास बनने के बाद तीन महीने तक भी पेमेंट क्यों नहीं होता. नगर निगम के अधिकारी पैसा के चक्कर में ऐसा करते हैं.

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सरकारी पदाधिकारी जरा भी जवाबदेह नहीं

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इतने में भी सीपी सिंह का गुस्सा शांत नहीं हुआ. कहा कि सरकारी पदाधिकारी जरा भी जवाबदेह नहीं हैं. पिछले दिनों डीसी के साथ हमलोगों की बैठक हुई, लेकिन कोई निर्णय नहीं हुआ. राजभवन के चाहरदीवारी के पास नगा बाबा खटाल के पास टेंपू रहता है. पुलिस किसी को जाने नहीं देती. वहां ट्रैफिक वाले वसूली करते रहते हैं. ऐसी बैठक से कोई लाभ नहीं. मेरा ही विभाग है. इतनी गंदगी है. राजभवन की दीवार पर पेशाब करता है. ढिंढोरा पीट रहे हैं कि स्वच्छ कर दिया. हमारा विभाग है तो क्या हम भी झूठ बोल दें कि पूरे देश में रांची आगे हो गयी.

कई उदाहरण भी मंत्री ने दिये

मंत्री सीपी सिंह ने कई उदाहरण दिए. उन्होंने कहा कि एक लड़की किडनैप हो गई. रांची क्षेत्र से ले गया. बीआईटी ले गया. नौ दिन में कुछ नहीं किया गया. मेरा सिस्टम पर चोट है. मुझे किसी का डर नहीं. मुख्यमंत्री आवास के सामने हत्या हो गई,  तो कार्रवाई हो गई. ट्रैफिक का काम पैसा वसूलना नहीं है. पुलिस वाले खुद हेलमेट नहीं लगाते. किस नियम से पुलिस वालों को बिना हेलमेट ट्रिपल राइड का अधिकार है? गुमला के बाइक वाले को ऐसा दौड़ाकर पकड़ लेते हैं जैसे कोई अपराधी हो. यहां उद्देश्य हेलमेट नहीं, पैसा वसूलना है.

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रामटहल चौधरी ने शांत कराने की कोशिश की, फिर भी नहीं माने

रामटहल चौधरी ने यह कहकर सीपी सिंह को शांत कराने की कोशिश की कि बैठक से ही इन समस्याओं का हल निकलेगा. इस दौरान सीपी सिंह के विषयांतर और अपनी ही सरकार तथा अपने ही विभाग की खिंचाई को देखकर बैठक में मौजूद कई अधिकारी मंद-मंद मुस्कुराते रहे. एक अधिकारी ने बताया कि हमलोग तो केंद्रीय योजनाओं पर चर्चा करने गए थे. लेकिन अगर सरकार के मंत्री ही बिना विषय के इस तरह बात करें, तो हम क्या कर सकते हैं.

दोबारा माइक लेकर फिर बोलने लगे सीपी सिंह

कुछ देर शांत होने के बाद सीपी सिंह ने दोबारा माइक पर कब्ज़ा किया. रांची नगर निगम और अपर बाजार की सफाई जैसे स्थानीय मुद्दों फिर बोलने लगे. कहा- “रांची में तो सफाई का बुरा हाल है. रांची नगर निगम में सफाई पर कंपीटिशन चल रहा था. कंपीटिशन खत्म, सफाई खत्म. रांची शहर में सफाई की बहुत खराब हालत है. कोई इन्वेस्टर आएगा, तो गंदगी देखकर उसका दिमाग भिनभिना जाएगा.

बैठक में सांसद रामटहल चौधरी, महेश पोद्दार, मंत्री सीपी सिंह, उपायुक्त, नगर आयुक्त, एसपी के अलावा कई जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी मौजूद थे.

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