
Akshay Kumar Jha
Ranchi: बिहार और झारखंड के तीन पूर्व मुख्यमंत्री के जेल जाने के बाद इस मिथक पर से पर्दा उठ चुका है कि नेताओं को सजा नहीं होती. संयुक्त बिहार में हुए चारा घोटाला में लालू यादव और जगन्नाथ मिश्र जेल गये.
तो झारखंड से पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा माइनिंग घोटाला को लेकर जेल की हवा खा चुके हैं. चारा घोटाला को उजागर करने वाले पूर्व मंत्री सरयू राय ने मीडिया में कुछ दिनों पहले कहा है कि वे नहीं चाहते हैं कि एक और मुख्यमंत्री जेल जाये.
उनका इशारा सीधे तौर पर झारखंड में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास की ओर था. आखिर वो कौन सी वजहें हैं, जिससे इस आशंका को बल मिलता है कि रघुवर दास मुश्किल में पड़ सकते हैं.
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जानते हैं उन वजहों को
शाह ब्रदर्स- पश्चिमी सिंहभूम जिलांतर्गत लौह अयस्क के अवैध उत्खनन एवं खनन पट्टा के प्रावधानों के उल्लंघन के फलस्वरूप शाह ब्रदर्स के विरुद्ध 1110 करोड़ का मांग पत्र निर्गत किया गया था. सरकार के स्तर से 2015 में उक्त मांग में संशोधन करते हुए 1365 करोड़ रूपये की मांग पत्र निर्गत किया गया.
इस मामले में शाह ब्रदर्स को अनुचित लाभ पहुंचाने एवं राजकोषीय क्षति में महाधिवक्ता अजीत कुमार, प. सिंहभूम, चाईबासा, खान एवं भूतत्व विभाग के वरीय अधिकारी की आपराधिक संलिप्तता एवं सहभागिता मानी जा रही है.

महाअधिवक्ता पर आरोप है कि उन्होंने कोर्ट को गुमराह किया. वहीं जब रघुवर दास मुख्यमंत्री थे, तो खान विभाग उनके पास था. ऐसे में अगर शाह ब्रदर्स की जांच मौजूदा सरकार कराती है और जांच में मामला सही सही पाया जाता है तो निश्चित तौर पर रघुवर दास की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.
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कंबल घोटाला- 2016 में राज्य के गरीबों को ठंड में कंबल बांटने के लिए झारक्राफ्ट को झारखंड के बुनकरों से कंबल बनाने का काम दिया गया. कंबल तो बंटे, लेकिन ऑडिट के दौरान एजी ने पाया कि कंबल बनाकर नहीं बल्कि बाजार से खरीद कर बांटे गए हैं.

उद्योग विभाग ने पूरे मामले की जांच की. जांच रिपोर्ट भी आ चुकी है. विभाग ने पाया है कि एजी की आपत्तियां सही हैं. ऐसे में साफ होता है कि उद्योग विभाग के झारक्राफ्ट में करीब 18 करोड़ का कंबल घोटाला हुआ. अब मौजूदा सरकार जांच रिपोर्ट आने के बाद मामले में एफआईआर दर्ज कराती है, तो रघुवर दास आरोपी होंगे.
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मैनहर्ट- हालांकि ये मामला तब का है, जब रघुवर दास अर्जुन मुंडा की सरकार में नगर विकास मंत्री थे. लेकिन रघुवर दास के मुख्यमंत्री काल में भी ये मामला आता रहा. मैनहर्ट को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में तीन बार पीआइएल हुए. तीनों बार कोर्ट ने एसीबी में शिकायत करने का निर्देश दिया.
लेकिन एसीबी ने मामला दर्ज नहीं किया. क्योंकि सरकार की तरफ से इसकी अनुमति नहीं दी गयी. 2006 में रघुवर दास, अर्जुन मुंडा सरकार में उप मुख्यमंत्री औऱ नगर विकास मंत्री थे. रांची शहर में सिवरेज और ड्रेनेज को लेकर काम होना था. विभाग ने इस काम के लिए ORG/SPAM Private Limited का चयन किया. कंपनी ने काम शुरु कर दिया.

करीब 75 फीसदी डीपीआर बनने के बाद कंपनी से काम वापस ले लिया गया और काम मैनहर्ट कंपनी को दे दिया गया. आरोप है कि मैनहर्ट को काम देने के लिए विभाग ने शर्तों का उल्लंघन किया. शर्त थी कि उसी कंपनी को काम मिलेगा, जिसका टर्नओवर 300 करोड़ है और जिसे सिवरेज-ड्रेनेज दोनों काम में तीन साल काम करने का अनुभव हो. मैनहर्ट शर्तों को पूरा नहीं करता था.
बावजूद इसके विभाग ने इस कंपनी को काम दे दिया. मामला विधानसभा में उठा. विधानसभा ने जांच के लिए एक कमेटी बनायी. जिसमें सरयू राय, प्रदीप यादव और सुखदेव भगत सदस्य थे. समिति ने रिपोर्ट सौंपी की, मैनहर्ट को काम देने में गड़बड़ी हुई है. ऐसे में अगर मौजूदा सरकार एसीबी को जांच करने की अनुमति देती है तो निश्चित तौर पर रघुवर दास पर कानूनी शिकंजा कसा जाएगा.
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मोमेंटम झारखंड- लाखों करोड़ का निवेश और राज्य में रोजगार लाने की मकसद से रघुवर सरकार ने 2016 में मोमेंटम झारखंड का आयोजन किया. लेकिन आयोजन की मंशा के ठीक उल्ट मोमेंटम झारखंड पर आरोप लगने शुरू हो गए. आरोप लगने लगे कि आयोजन के नाम पर पब्लिक मनी का बंदरबांट हुआ है.

करीब 100 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है. मामले को लेकर हाईकोर्ट में पीआइएल दाखिल हुआ. कोर्ट ने इस मामले में भी एसीबी जाने का निर्देश दिया. सरकार के बदलते ही पंकज यादव नाम के एक शख्स ने एसीबी में जांच के लिए आवेदन दिया है.
देखना होगा कि इस मामले पर मौजूदा सरकार किस तरह के निर्णय लेती है. अगर सरकार जांच का आदेश देती है, तो रघुवर दास की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.
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