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मैनहर्ट मामला: विजिलेंस ने मांगी 5 बार अनुमति, हाईकोर्ट का भी था निर्देश, FIR पर चुप रहीं राजबाला

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Ranchi: जिस तरह से मोमेंटम झारखंड को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) में एफआईआर करने का निर्देश याचिकाकर्ता को दिया है, उसी तरह के निर्देश मैनहर्ट कंपनी के लिए भी हाईकोर्ट की तरफ से दिए गए थे. बताते चलें कि उस वक्त अर्जुन मुंडा की सरकार थी, रघुवर दास नगर विकास विभाग के मंत्री थे, निगरानी आयुक्त राजबाला वर्मा थी और विजिलेंस के आईजी एमवी राव थे.

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क्या कहा था हाईकोर्ट ने

झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस भगवती प्रसाद और नरेंद्र नाथ तिवारी ने 18 सितंबर 2010 को मेनहर्ट मामले पर सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया था. दो जजों वाले इस बेंच ने साफ कहा था कि याचिकाकर्ता डीजी विजिलेंस के पास मामले को लेकर जा सकते हैं. याचिकाकर्ता की शिकायत में किसी तरह कोई सच्चाई रहती है तो आगे की कानूनी कार्रवाई हो. लेकिन, विजिलेंस की तरफ से पांच बार मार्गदर्शन मांगे जाने के बावजूद विजिलेंस आयुक्त कार्यालय से कोई मार्गदर्शन नहीं आया. इसी तरह का फैसला झारखंड हाईकोर्ट ने अब मोमेंटम झारखंड के लिए किए गए पीआईएल की सुनवाई करने के दौरान दिया है.

पांच बार मांगा गया निर्देश, नहीं मिला जवाब

पहली बार 16 अगस्त 2009 को निगरानी विभाग के आईजी ने निगरानी आयुक्त राजबाला से हाईकोर्ट के आदेश के बाद मार्गदर्शन मांगा था. लेकिन, राजबाला की ओर से कोई जवाब नहीं आने के बाद दोबारा से आईजी ने 22 सितंबर 2010, चार दिसंबर 2010, 20 जनवरी 2011 और फिर 28 मार्च 2011 बार-बार निर्देश मांगा. लेकिन, एक बार भी निगरानी आयुक्त की तरफ से किसी तरह का कोई जवाब नहीं आया.

एमवी राव की चिट्ठी

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सीएस राजबाला वर्मा ने नहीं की थी रघुवर दास पर कार्रवाई

रांची के सिवरेज और ड्रेनेज के कंसल्टेंसी का काम करने वाले मैनहर्ट कंपनी पर करीब 19 करोड़ के घोटाले का आरोप लगा था. मामले ने खूब तूल पकड़ा. विधानसभा की विशेष समिति ने जांच भी की थी, लेकिन, इसमें सबसे अहम कड़ी थी तत्कालीन गृह सचिव राजबाला वर्मा. राजबाला वर्मा ने कुछ ऐसा किया, जिससे रघुवर दास पर एफआईआर नहीं हो सका. अगर एफआईआर होता तो शायद सीएम की कुर्सी तक का सफर रघुवर दास के लिए इतना आसान नहीं होता.

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पीआईएल में भी मामले को जोड़ा गया है

सीएस पर कार्रवाई को लेकर हाईकोर्ट में एक पीआईएल भी दर्ज हुआ है. पीआईएल पंकज कुमार यादव ने किया है. जिसके वकील राजीव कुमार हैं. याचिका में इस बात का उल्लेख है कि कैसे राजबाला वर्मा बतौर विजिलेंस कमिश्नर रहते हुए मैनहर्ट घोटाले मामले में खामोश हो गयी थीं. पीआईएल में कहा गया है कि विजिलेंस के तत्कालीन आईजी एमवी राव ने एफआईआर के लिए विजिलेंस कमिश्नर से निर्देश मांगा था. लेकिन उन्होंने निर्देश नहीं दिया. फाइल उनकी ही टेबल पर रह गयी.

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