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कार्बन-न्यूट्रल भविष्य के निर्माण की प्रतिबद्धता- पानी के जहाज पर टाटा स्टील का प्लांट

Jamshedpur : टाटा स्टील अपने कलिंगानगर प्लांट के विस्तारीकरण को लेकर भारी मशीनों को मंगाने के लिए अंतर्देशीय जलमार्ग का इस्तेमाल कर रही है. इस तरह टाटा स्टील अंतरदेशीय जलमार्ग का उपयोग करने वाली ओडिशा की पहली स्टील कंपनी बन गयी, जिसने कार्बन-न्यूट्रल भविष्य के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है. टाटा स्टील की कन्साइनमेंट पिछले दिनों शंघाई से ओडिशा के पारादीप बंदरगाह के लिए एक चार्टर्ड जहाज से रवाना हुआ. फिर इसे एक बार्ज पर लादा गया, जिसे लूना नदी को पार करते हुए 15 मार्च को केंद्रपाड़ा जिले के मारसाघई में उतारा गया. इसके बाद, माल को सड़क मार्ग के माध्यम से ले जाया गया और 2 अप्रैल को यह परियोजना स्थल पर पहुंचा.

टाटा स्टील के इंजीनियरिंग एंड प्रोजेक्ट (ईएंडपी) डिवीजन ने चार सुपर ओवर डायमेंशनल असेंबल कार्गो (एसओडीसी) के लगभग 1000 क्यूबिक मीटर की (सीबीएम) शिपिंग के लिए अंतर्देशीय जलमार्ग सहित मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स का इस्तेमाल किया. इनमें से प्रत्येक का वजन 100 मीट्रिक टन तक था और जिसका व्यास 8 मीटर तक था. ये प्रोजेक्ट कार्गो स्लैग ग्रैन्युलेशन प्लांट का हिस्सा हैं जिसे टाटा स्टील के कलिंगानगर प्लांट में स्थापित किया जा रहा है.
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए टाटा स्टील ने डीयूग्रो प्रोजेक्ट्स इंडिया प्रा. लिमिटेड का सहयोग लिया था, जो माल की ढुलाई और प्रोजेक्ट लॉजिस्टिक्स समाधानों में एक अग्रणी लॉजिस्टिक समाधान प्रदाता है.

इस साल की शुरुआत में टाटा स्टील ने भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल रूट के माध्यम से पश्चिम बंगाल से असम के लिए टीएमटी बार का पहला मल्टी-मोडल शिपमेंट शुरू किया था और ऐसा करने वाली यह भारत की पहली स्टील कंपनी बन गई. यह इस्पात क्षेत्र और देश को कार्बन मुक्त करने का एक ऐतिहासिक प्रयास था. अवनीश गुप्ता, वाइस प्रेसीडेंट (टीक्यूएम और इंजीनियरिंग एंड प्रोजेक्ट्स) टाटा स्टील ने कहा कि यह एक संभावित लागत लाभ के साथ एक सस्टेनेबल लॉजिस्टिक्स मॉडल का मार्ग प्रशस्त करेगा, जिससे प्लांट तथा मशीनरी को सम्पूर्ण रूप में असेंबल्ड स्थिति में आयात किया जा सकेगा. इसके माध्यम से स्टील सेक्टर तथा राष्ट्र को कार्बन मुक्त बनाने में भी मदद मिलेगी. साथ ही कम से कम सड़क मार्ग का प्रयोग होने के कारण सड़क सुरक्षा भी बेहतर होगी.

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