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3 अक्टूबर को हाईकोर्ट में मेंशन हो सकती है ईडी समन के खिलाफ दायर सीएम हेमंत सोरेन की याचिका

Rana Pratap singh

Ranchi: ईडी ने सीएम हेमंत सोरेन को पांचवा समन जारी कर 4 अक्टूबर को पूछताछ के लिए बुलाया है. हालांकि सीएम इससे पूर्व ही ईडी के समन के खिलाफ 23 सितंबर को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर चुके हैं लेकिन अब तक सुनवाई के लिए इसे कोर्ट के समक्ष मेंशन नहीं किया गया है. ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि 3 अक्टूबर को सीएम की याचिका को सुनवाई के लिए कोर्ट के समक्ष मेंशन किया जा सकता है, जिससे सुनवाई की तिथि निर्धारित हो सके.सूत्र यह भी बताते हैं कि चूंकि सीएम ईडी के समक्ष अभी पेश नहीं होना चाहते हैं, इसलिए हाईकोर्ट में इस केस के लंबित रहने की बात कहकर एक बार फिर से ईडी से समय की मांग सीएम हेमंत सोरेन कर सकते हैं. इसलिए 4 अक्टूबर के पूर्व सीएम की याचिका की सुनवाई के लिए कोर्ट में इसे 3 या 4 को मेंशन किया जा सकता है ताकि कोर्ट इस याचिका पर सुनवाई की तिथि तय करें.

बता दें कि डीएसपी प्रमोद मिश्रा एवं सरफुद्दीन खान के ईडी के समन मामले में हाईकोर्ट ने पूछताछ के लिए ईडी के समक्ष उपस्थित होने पर गिरफ्तार नहीं करने का निर्देश दिया था. ऐसे में सीएम हाईकोर्ट से राहत मिलने की उम्मीद कर रहे हैं. दरअसल सीएम ने ईडी समन मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाईकोर्ट जाने की छूट दिए गए को आधार बनाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है. सीएम ने सुप्रीम कोर्ट में इस के समन के खिलाफ दायर याचिका को वापस ले ली थी.

सीएम ने ईडी समन के आधार पर कार्रवाई रोकने का किया है आग्रह

सीएम हेमंत सोरेन ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा है कि ईडी एवं इसके अधिकारी या कर्मी को समन के आधार पर उन पर कार्रवाई से रोका जाय. याचिका में सीएम ने ईडी द्वारा जारी समन को गलत, अवैध एवं कानून के विरुद्ध बताया है साथ ही ईडी को आगे भी समन जारी करने से रोक लगाने का अभी आग्रह किया है. सीएम ने ईडी पर चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने की साजिश करने सहित पीएमएलए 2002 की धारा 50 और 63 की वैधता को चुनौती दी है. कहा है कि यह दोनों धाराएं प्रार्थी हेमंत सोरेन के संवैधानिक अधिकार का हनन करती है. यह भी कहा है कि पीएमएलए की इन धाराओं के तहत उन पर समन जारी करना गलत है. पीएमएलए की धारा 50 के तहत ईडी को पुलिस अधिकारी जैसा पावर होता है जो गलत है ,ईडी पुलिस अधिकारी नहीं होते हैं. याचिका में सीएम का कहना है कि पीएमएलए में किया गया प्रावधान संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकार का हनन करता है.

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