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धनबाद नगर निगम का खेल! तेल की खाली पर्ची पर साइन करने के सवाल पर भड़के नगर आयुक्त

Roshan Sinha

Sanjeevani

Dhanbad: धनबाद नगर निगम में हर महीने 5 लाख रुपये से अधिक की राशि तेल खरीदने में खर्च होती है. गाड़ियों में तेल डलवाने को लेकर पर्ची जारी की जाती है. लेकिन निगम के सिटी मैनेजर तेल की पर्ची पर बगैर तेल की मात्रा और तारीख के ही हस्ताक्षर कर देते हैं. क्या यह सही है ?. ये सवाल आपके भी जहन में आया होगा. यही सवाल जब हमने नगर आयुक्त चंद्र प्रकाश कश्यप से किया, तो वो भड़क गये. उन्होंने कहा, आप हमेशा ऐसे ही मामले में क्यों पूछते है?

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बता दें कि नगर निगम के सिटी मैनेजर विजय कुमार को गाड़ियों में खपत होनेवाले डीजल की स्लिप काटने के लिए अधिकृत किया गया है. इनका सिग्नेचर किया स्लिप बिना डीजल की मात्रा और दिनांक अंकित किए जारी किया जा रहा है. इस स्लिप पर ड्राइवर आसानी से एक ही दिन में डीजल जितना चाहें ले सकते हैं.

नगर निगम के अधीन 36 गाड़ियां

धनबाद नगर निगम के अधीन तीन दर्जन से अधिक गाड़ियां हैं. इनमें 18 ट्रैक्टर, 12 टिपर, 3 हाइवा, एक जेसीबी, सेफ्टी टैंकर और पानी टैंकर है. सभी गाड़ियां को जरूरत के हिसाब से डीजल दिया जाता है. सबसे अधिक डीजल तीनों हाइवा को मिलता है. प्रत्येक दिन 50 से 60 लीटर, ट्रैक्टर को 6 से 7, टिपर 5 से 6 लीटर, जेसीबी को 25 लीटर, पानी और सेफ्टी टैंकर को जरूरत के हिसाब से मिलता है.

डीजल किस गाड़ी में कितना देना है यह जिम्मेवारी कार्यपालक पदाधिकारी मोहम्मद अनीस के अधीन है. लेकिन जिस दिन वह धनबाद से बाहर जाते हैं तो अतिरिक्त प्रभार सिटी मैनेजर विजय कुमार को दिया जाता है.

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सवाल पर भड़के नगर आयुक्त

नगर आयुक्त चंद्र प्रकाश कश्यप से फोन पर बात हुई तो उन्होंने कहा कि आप यही सब सवाल क्यों पूछते हैं? इन सब सवाल के लिए हमारे पास कोई जवाब नहीं है, कौन क्या करता है नहीं करता है. आप हमारे पास आइए हम विजय को बुलाकर खुद पूछते हैं. अब नगर आयुक्त की प्रतिक्रिया से सवाल यह भी उठता है कि निगम के कर्मचारी कुछ भी करें उनसे क्या नगर आयुक्त को कोई मतलब नहीं है?

क्या कहते हैं सिटी मैनेजर

सिटी मैनेजर विजय कुमार का कहना है कि डीजल में कोई घोटाला नहीं है, बल्कि वह इमरजेंसी के लिए ब्लैंक रसीद पर सिग्नेचर करते हैं. ड्राइवर ने कितना डीजल लिया है इसका भी रिकॉर्ड हम लोग पेट्रोल पंप से लेते हैं. लेकिन सोचने की बात यह है कि सिटी मैनेजर जब खुद अतिरिक्त प्रभार में रहते हैं तो ब्लैंक स्लिप पर उनके सिग्नेचर करने की कैसी इमरजेंसी होगी?

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क्या कहते हैं कार्यपालक पदाधिकारी

कार्यपालक पदाधिकारी मोहम्मद अनीश का कहना है कि किस गाड़ी में कितना डीजल देना है, यह सब हमारे जिम्मे है लेकिन किसी दिन नगर निगम के काम से हमें नगर बाहर जाना पड़ता है, तो इसका अतिरिक्त प्रभार सिटी मैनेजर विजय कुमार को दिया जाता है. कभी-कभी ब्लैंक पर्ची पर साइन किया जाता है लेकिन दिनांक जरूर भरा जाता है, इससे रिकॉर्ड मेंटेन होता है.

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