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रांची लोकसभा क्षेत्र का एक टोला, जहां सड़क नहीं, पेयजल नहीं, चुआं और झरने से प्यास बुझाते हैं ग्रामीण

सरकार के विकास के दावे को खोखला बता रहा ओरमांझी का पुरनपनिया टोला

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Ranchi : विकास ढूंढने पर घोषणाओं और अखबारों में छपनेवाले विज्ञापनों में तो जरूर दिखाई देता है, लेकिन जमीन पर हालात जारबेजार हैं. झारखंड के गांवों की हालत कमोबेश ऐसी ही है. सरकार के विकास के दावों में गिनायी जानेवाली ओडीएफ, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, मनरेगा योजना, पीडीएस के साथ-साथ टोला तक पहुंच पथ जैसी बुनियादी सुविधाओं से आजादी के बाद भी आज तक ग्रामीण वंचित हैं. ऐसा ही एक टोला है रांची लोकसभा क्षेत्र के खिजरी विधानसभ क्षेत्र में. नाम है पुरनपनिया. विकास के दावे पुरनपनिया में दम तोड़ते हुए नजर आते हैं. टोला के लोग अपनी प्यास बुझाने के लिए झरने और चुआं पर निर्भर हैं. टोला की समस्याओं से प्रखंड विकास पदाधिकारी से लेकर विधायक राम कुमार पहान भी अनभिज्ञ है. टोला में रहनेवाले 15 परिवार के कुल 60 लोगों के जीवन पर विकास की किरणें पहुंच नहीं पा रही हैं. यहां आज तक न सांसद गये, न विधायक और न ही कोई सरकारी अधिकारी. गौरतलब है कि रांची लोकसभा सीट से भाजपा के रामटहल चौधरी 1991, 1996, 1998, 1999, 2014 में जीत दर्ज कर चुके हैं. अब लोकसभा चुनाव के साथ-साथ राज्य में विधानसभा चुनाव भी नजदीक आ रहा है. नेता विकास के दावे के बल पर चुनाव जीतते हैं, लेकिन विकास की जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है. सरकार के विकास के दावे की हकीकत रांची लोकसभा एवं खिजरी विधानसभा क्षेत्र स्थित पुरनपनिया टोला के ग्रामीणों ने न्यूज विंग को बतायी.

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साइकिल भी नहीं पहुंच पाती टोले तक

रांची के ओरमांझी प्रखंड से महज 11 किलोमीटर दूर चांडू पंचायत के हिंदविली राजस्व गांव में स्थित है पुरनपनिया. यहां करीब 60 उरांव आदिवासियों का निवास है. टोला चारों ओर पहड़ियों से घिरा हुआ है, जिसमें सरजोम के पेड़ों का जंगल है. टोले तक पहुंचने के लिए कोई पहुंच पथ नहीं है. पहाड़ी से होते हुए दुर्गम रास्ते से ग्रामीण हिंदविली पहुंचते हैं. कुछ लोगों के पास साइकिल है, लेकिन गांव नहीं लाते हैं. साइकिल को पहाड़ी के रास्ते गांव लाने के लिए दो लोगों की दरकर होती है. टोला में रहनेवाले जिस व्यक्ति के पास साइकिल है, वह दो किलोमीटर पहले ही दूसरे के घर में अपनी साइकिल रख देता है. ग्रामीण कहते हैं कि बीमार लोगों का उपचार कराने में काफी परेशानी होती है. सड़क और पेयजल का गांव में घोर अभाव है. सरकारी योजना गांव तक नही पहुंच पाती है. एक साल पहले गांव में बिजली आयी. इसके लिए गांव के लोगों को 12 हजार रुपये खर्च करने पड़े. बिजली का पोल गांव तक लाने से लेकर पोल गाड़ने के लिए गड्ढे भी ग्रामीण को ही खोदने पड़े, तब गांव में बिजली पहुंच पायी है.

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ओडीएफ का सच

रांची जिला को भले ही ओडीएफ घोषित कर दिया गया, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और कहानी बयां करती है. प्रखंड के पुरनपनिया टोला में 12 परिवारों के नाम से शौचालय स्वीकृत किया गया. इनमें दो शौचालय का ही निर्माण पूरा किया गया. 10 शौचालयों के नाम पर गड्ढे खोदकर और दीवार खड़ी करके काम छोड़ दिया गया. टोला के लोगों ने इसकी शिकायत भी की, लेकिन सुननेवाला कोई नहीं. ओडीएफ और टोला की समस्याओं को लेकर जब मुखिया से संपर्क करने की कोशिश की गयी, तो उनका फोन नंबर तीन दिन से बंद मिल रहा है. ग्रामीणों के अनुसार मुखिया का सभी कार्य पूर्व मुखिया और वर्तमान मुखिया के पति नीलमोहन पहान ही देखते हैं.

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ग्रामीणों की आजीविका

ग्रामीणों की आजीविका पूरी तरह पशुपालन एवं कृषि पर निर्भर है. कुछ ग्रामीण मजदूरी के लिए रांची शहर भी आते हैं, लेकिन वे उन हालात में आते हैं, जब गांव में अजीब संकट का सामना करने लगते हैं. मनरेगा योजना का क्रियान्वयन गांव में नजर नहीं आता है. ग्रामीणों की आजीविका की रीढ़ पशुपालन है, लेकिन मनरेगा योजना के तहत गांव में एक भी बकरी शेड, मुर्गी शेड का निर्माण नहीं किया गया है. ग्रामीणों के पास जॉब कार्ड हैं, लेकिन मनरेगा में काम नहीं मिलता है.

पेयजल की किल्लत

पेयजल के लिए ग्रामीण आज भी डाड़ी, चुआं और झरने का ही इस्तेमाल करते हैं. ग्रामीण अपनी समझ से पानी को उबालकर पीते हैं. टोला में शुद्ध पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है. यहां तक कि विद्यालय में भी पानी की टंकी तो लगा दी गयी, लेकिन बिना बोरिंग के ही. टोला में एक भी चापाकल नहीं है. पीडीएस का राशन लाने के लिए ग्रामीणों को चार किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है, वहां भी पूरा अनाज नहीं मिल पाता. गांव में बिचौलिया सक्रिय हैं. ग्रामीणों के पालतू पशु कम दामों में खरीदकर ले जाते हैं. गांव की महिला निशा देवी बताती है कि टोला सरकार की विकास योजनाओं से दूर है. बीमार लोगों को खटिया में ढोकर दो किलोमीटर ले जाना पड़ता है. बरसात के साथ-साथ गर्मियों में भी बच्चों की पढ़ाई में रुकावट आती है. गांव में प्राथमिक विद्यालय है, लेकिन एक ही शिक्षक गांव पहुंचते हैं. विद्यालय में मिड डे मील भी बच्चों को सही रूप में नहीं मिल पाता, क्योंकि कभी भी कोई अधिकारी आज तक गांव नहीं पहुंच सके हैं.

मैं प्रखंड में नया आया हूं, पुरनपनिया टोले के बारे में मुझे जानकारी नहीं है : बीडीओ

इस पूरे मामले पर ओरमांझी के प्रखंड विकास पदाधिकारी अविनाश कुमार ने कहा, “मैं प्रखंड में नया आया हूं. पुरनपनिया टोले के बारे में जानकारी मुझे नहीं है. टोला की समस्याओं की जानकारी आपसे मिल रही है. इसे दूर करने का प्रयास करूंगा सबसे पहले टोला तक पहुंच पथ बने, इसका प्रयास होगा. यहां 14वें वित्त अयोग की राशि से सड़क का निर्माण कराया जायेगा. फिर धीरे-धीरे अन्य समस्याओं को भी हल करने का प्रयास होगा.”

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क्षेत्र के सभी गांवों को सड़क से जोड़ दिया गया है या जोड़ा जा रहा है : विधायक रामकुमार पहान

विधायक रामकुमार पहान से जब विधानसभा क्षेत्र में सड़क के बारे में पूछा गया, तो विधायक ने दावा किया कि खिजरी विधानसभा क्षेत्र के सभी गांवों को सड़क से जोड़ दिया गया है या जोड़ा जा रहा है. क्षेत्र के कुछ एक टोला को ही सड़क से जोड़ा नहीं जा सका है. पुरनपनिया के बारे में पूछने पर उन्होंने अपनी अनभिज्ञता जाहिर की और टोले की समस्याओं को दूर करने की बात कही.

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