
- 31 मार्च को कुल आय की जानकारी भी देना किया गया अनिवार्य
- विधि और न्याय मंत्रालय की तरफ से जारी किया गया गजट
Ranchi: लोकसभा चुनाव लड़नेवाले उम्मीदवारों को अब पांच वर्ष के आय कर रिटर्न का ब्योरा देना जरूरी कर दिया गया है. निर्वाचन आयोग ने केंद्रीय सरकार, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 (1951 का 43) की धारा 33 के तहत संशोधन को राजकीय गजट में प्रकाशित किया है. यह गजट विधि और न्याय मंत्रालय की तरफ से 26 फरवरी 2019 को जारी किया गया है. अब चुनाव लड़नेवाले उम्मीदवारों को शपथ पत्र में अपने हस्ताक्षर के पूर्व 10 सवालों का जवाब देना होगा और स्वघोषणा भी करनी होगी.
आयोग ने नया फॉर्म-26 जारी किया
आयोग ने इस संबंध में नया फार्म-26 भी जारी किया है. इसकी जानकारी सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, राजनीतिक दलों के अध्यक्षों को दी गयी है. संशोधित फार्म में उम्मीदवारों को यह बताना होगा कि वे भारत सरकार, राज्य सरकार के अधीन लाभ के कोई पद पर हैं अथवा नहीं. इसके अलावा किसी न्यायालय द्वारा उम्मीदवार को दिवालिया तो घोषित किया गया है अथवा नहीं, इसका ब्योरा भी देना होगा. लोक प्रतिनिधित्व कानून की धारा 10 क के तहत निर्वाचन आयोग द्वारा उम्मीदवार को डिस्क्वालिफाई किया गया है अथवा नहीं, इसकी जानकारी भी देनी होगी. उम्मीदवारों को स्वंय के अलावा, पत्नी, तीन आश्रितों के आय कर का पूरा ब्योरा भी देना होगा.
पुराने शपथ पत्र में क्या-क्या जानकारी अपेक्षित थी
दिसंबर 2018 तक किसी भी चुनाव को लेकर अभ्यर्थियों को एक वर्ष का आयकर रिटर्न, अपनी संपत्ति (मूवेबल और अन मूवेबल) की जानकारी देनी होती थी. इसके अलावा बैंकों में जमा धन राशि, किसी भी न्यायालय में चल रहे मुकदमे का ब्योरा देना होता था. इसके अलावा कर्ज तथा अन्य की जानकारियां भी देना जरूरी किया गया था. यह सब कुछ नये फार्म में भी देना जरूरी है, पर इसका दायरा और बढ़ा दिया गया है. 31 मार्च को उम्मीदवार, उसकी पत्नी और तीन आश्रितों की संपत्ति क्या थी. इसकी जानकारी अब अनिवार्य कर दी गयी है. इसमें कहा गया है कि 31 मार्च तक उम्मीदवार का आयकर बकाये, जीएसटी बकाये, नगर निगम की संपत्ति का बकाया और प्रोपर्टी टैक्स के बकाये की जानकारी भी देनी होगी.
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