
Palamu : जिले के लेस्लीगंज थाना क्षेत्र के कमलपुर गांव में डायरिया से सात वर्षीया बच्चे की मौत हो गयी है जबकि उसके पिता, मां और छोटा भाई गंभीर हैं. गांव में अभी भी एक दर्जन से अधिक लोग डायरिया से पीड़ित हैं.
खबर फैलने और मीडियाकर्मियों के पहुंचने पर स्वास्थ्य विभाग की नींद खुली. आनन-फानन में एम्बुलेंस को कमलपुर गांव भेजा गया. कुछ पीड़ितों को इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती कराया गया है. गांव में लेस्लीगंज से एएनएम, एनपीडब्लू, सहिया, बीटीटी कमलपुर गांव पहुंचे हैं. हालांकि खबर लिखे जाने तक कोई डाक्टर गांव नहीं पहुंचा था.
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झोलाछाप डॉक्टर से इलाज कराना मजबूरी
कई दिनों से डायरिया से जूझ रहे पीयूष कुमार की रविवार को मौत हो गयी. उसके पिता अनिल प्रजापति, माता पूनम देवी (30) और भाई आयुष कुमार (3) की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है.
चलितर भुइयां (65 ) के अलावा उनके यहां की चार महिलाएं, गोपाल प्रजापति, चंदू प्रजापति भी डायरिया से प्रभावित हैं. सभी किसी तरह अपना इलाज करा रहे हैं. अनिता देवी (30), ललिता देवी (28 ) और उसकी पोती नन्हकी कुमारी (1 वर्ष) सहित एक दर्जन से अधिक लोग अक्रांत हैं. सभी गांव में ही झोलाछाप डाक्टरों से अपना इलाज कराने पर विवश हैं.
इंजेक्शन लगने के बाद पीयूष ने तोड़ा दम
अनिल प्रजापति ने बताया कि परिवार के सारे सदस्यों के बीमार होने पर उन्होंने नवगढ़ निवासी झोलाछाप डाक्टर प्यारे प्रजापति से इलाज कराया. दोनों बच्चों को दो-दो इंजेक्शन लगाये गये, जिसके 10 मिनट बाद पीयूष की मौत हो गयी.
खबर फैलने पर मीडिया कर्मी मौके पर आने लगे. किसी तरह सूचना मिलने पर लेस्लीगंज स्वास्थ्य विभाग ने एक एम्बुलेंस गांव में भेजा. कुछ लोगों को एम्बुलेंस से भेजा गया है. लेकिन गांव में अभी भी कई लोग पीड़ित है.
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लेस्लीगंज सीएचसी से 4 किलोमीटर है कमलपुर गांव
लेस्लीगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र से महज 4 किलोमीटर दूर पर कमलपुर गांव है. यहां डायरिया लगभग 15 दिनों से फैला है. बावजूद स्वास्थ्य विभाग को इसकी कोई खबर नहीं है.
यहां बताना जरूरी है कि बरसात से पूर्व स्वास्थ्य विभाग द्वारा कई स्तरों पर डायरिया से निपटने के लिए कार्यशाला और जागरूकता कार्यक्रम किया गया. लेकिन जब समय आया तो इसकी जमीनी हकीकत कुछ और निकली. सरकारी डाक्टरों का कोई ध्यान नहीं रहने पर स्थानीय ग्रामीण गांव के झोलाछाप डाक्टरों से अपना इलाज कराने पर विवश हैं.
सरकारी दावों की खुली पोल
सीएचसी से महज कुछ दूर पर डायरिया फैलने और स्वास्थ्य विभाग को इसकी थोड़ी भी जानकारी नहीं होना, स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता की पोल खोल कर रख देता है. स्वास्थ्य विभाग को पटरी पर लाने की दम भरने वाले जनप्रतिनिधि भी मौके पर पहुंच नहीं पाये हैं. हालांकि जब झोलाछाप डाक्टरों के संबंध में जानकारी लेने की कोशिश की गयी तो आधा दर्जन ग्रामीण उनके बचाव में उतर आये.
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