
Neeraj Priyadarshi
Patna: मुजफ्फपुर के चतुर्भुज स्थान के समीप ही साहु रोड, मुसहरी में एक होटल है. होटल आरएम पैलेस. यानी राधामोहन ठाकुर का होटल. राधामोहन ठाकुर मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के पिता हैं.
बालिका गॄह कांड में टीआईएसएस की रिपोर्ट के आधार पर पटना हाईकोर्ट में पीआईएल दायर करने वाले संतोष कुमार कहते हैं कि, “मेरे रिसर्च में यह मालूम हुआ है कि आरएम होटल वही होटल है जिसमें मुजफ्फरपुर में होने समाज कल्याण विभाग के प्राय: सारे कार्यक्रम संपन्न होते थे. बालिका गृह समेत सेवा संकल्प एवम् विकास समिति के अन्य दूसरे शेल्टर होम का निरीक्षण करने आने वाले अधिकारियों और नेताओं के ठहरने की व्यवस्था वहीं होती थी. मैं कोर्ट से मांग करूंगा कि सीबीआई की जांच में आरएम होटल के रिकार्ड्स को भी खंगाला जाए.”
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दरअसल, संतोष कुमार आरएम होटल के जरिए मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड के उजागर होने के कारण को सामने लाना चाहते हैं. कहते हैं कि, “ये सबकुछ एक सिंडिकेट के तहत चल रहा था. यह सिंडिकेट बिहार भर में चलने वाले शेल्टर होम का टेंडर न सिर्फ लेने का काम करता था, बल्कि दिलाने का भी काम करता था. क्योंकि सीबीआई की जांच में समाज कल्याण विभाग की मंत्री मंजू वर्मा के पति चंद्रशेखर वर्मा के ब्रजेश ठाकुर के साथ संबंधों के खुलासे के बाद अब स्पष्ट हो गया है कि इस नेक्सस की पैठ विभाग में गहरे तक थी.”
104 शेल्टर होम की हालत दयनीय- TISS
जब बात सिंडिकेट की करते हैं तो हमें वापस टीआईएसएस की उसी रिपोर्ट पर नजर डालनी होगी, जिसके आधार पर मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड का पहली बार खुलासा हुआ था. और आपको मालूम हो कि उस रिपोर्ट में एक नहीं बल्कि बिहार भर में चलने वाले कुल 110 शेल्टर होम में से केवल छह को ही अच्छी हालत में पाया गया है. इसका मतलब यह हुआ कि बाकी के 104 शेल्टर होमों की हालत खराब है.
तो क्या इन 104 शेल्टर होम को चलाने वाले लोग ही इस सिंडिकेट का हिस्सा है? इस सवाल का जवाब मुजफ्फरपुर कांड में पकड़े गए मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के राजनीतिक, सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन से जुड़े उन लोगों में ढूंढा जा सकता है जिनका कोई न कोई तार किसी न किसी शेल्टर होम से जुड़ा है.
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इन लोगों में सबसे पहला नाम आता है, सूबे के सभी शेल्टर होम के ऑपरेशन और मेंटेनेंस की सबसे जवाबदेह अथॉरिटी यानी समाज कल्याण विभाग की मंत्री मंजू वर्मा और उनके पति चंद्रशेखर वर्मा का. बतौर समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा अपने पति चंद्रशेखर वर्मा के साथ ब्रजेश ठाकुर के घर यानी बालिका गृह जा चुकी हैं. ऐसा उन्होंने खुद ही स्वीकार किया है. ब्रजेश ठाकुर के सीडीआर से इस बात का भी खुलासा हो चुका है कि मामला प्रकाश में आने के तीन महीने पहले तक चंद्रशेखर वर्मा के नंबर पर 16 बार बात हुई थी.
इसी खुलासे के बाद दबाव में आकर मंत्री मंजू वर्मा ने पिछले आठ अगस्त को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था.
यहां बात गौर करने वाली है. मंजू वर्मा अपने पति के साथ ब्रजेश ठाकुर के घर जा चुकी हैं. हालांकि, कहती हैं कि पति बालिका गृह में नहीं गए थे, वह अकेली गई थीं.
वहां जाने और ये देखने के बाद भी कि ब्रजेश ठाकुर का बालिका गृह लोकेशन से लेकर तमाम अन्य मानकों पर खरा नहीं उतरता है, उन्होंने किसी तरह की कोई आपत्ति कभी भी दर्ज नहीं कराई. वो इसलिए क्योंकि पति के साथ ब्रजेश ठाकुर के घर जाना स्पष्ट करता है कि उसके साथ उनकी काफी घनिष्टता थी.
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ब्रजेश ठाकुर इसलिए भी कथित सिंडिकेट का मोहरा है, क्योंकि वह मंत्री और उनके पति के साथ घनिष्टता बनाकर विभाग में अंदर तक पैठ बना चुका था. अपने एनजीओ सेवा संकल्प एवम् विकास समिति को तो पांच शेल्टर होम चलाने का टेंडर लिया ही, बल्कि उसने अपने दूसरे करीबी लोगों को भी शेल्टर होम चलाने के लिए टेंडर दिलवाए.
इस लिस्ट में सबसे पहला नाम आता है प्रमोद कुमार शर्मा का. प्रमोद कुमार शर्मा वो शख्स हैं जिनके एनजीओ सेंटर डायरेक्ट से संचालित हो रहे सीतामढ़ी के बालगृह में भी गडबड़ियां पाई गई हैं.
सीतामढ़ी का बालगृह जो कि एक मार्च 2017 से शुरु हुआ था, वहां 40 दिन बाद ही जिला बाल संरक्षण इकाई के एक वरीय अधिकारी ने अनियमितताएं पाते हुए बालगृह को बंद कराने के लिए विभाग को पत्र लिखा. सीतामढ़ी जिला बाल संरक्षण इकाई के तत्कालीन एडिशनल डायरेक्टर गोपाल शरण ने बाल संरक्षण निदेशालय के निदेशक सुनील कुमार को बालगृह की जांच रिपोर्ट पिछले साल 13 अप्रैल 2017 को सौंपी थी. जिसमें बालगृह में रहने वाले बच्चों की फाइलें सही से नहीं मेंटेन करने और बालगृह में कर्मियों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने संबंधी आरोप लगाए गए थे.
बाद में बाल संरक्षण निदेशालय के तत्कालीन निदेशक सुनील कुमार ने पिछले साल चार अक्टूबर को सीतामढ़ी के जिला पदाधिकारी को पत्र लिखकर गोपाल शरण की निरीक्षण रिपोर्ट का हवाला देते हुए नए सिरे से जांच कराने का आग्रह किया था. उक्त बाल गृह से एक बच्चे की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, जबकि एक और बच्चे के लापता होने की एफआईआर रिपोर्ट दर्ज है.
प्रमोद कुमार शर्मा का ब्रजेश ठाकुर के साथ क्या कनेक्शन था? इसको जानने के लिए हमें थोड़ा पीछे जाना होगा. जब आनंद मोहन की नई बिहार पीपुल्स पार्टी का गठन होने वाला था. संतोष कुमार कहते हैं कि ब्रजेश ठाकुर को राजनीति में लाने वाला प्रमोद कुमार शर्मा ही थे.
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क्योंकि ब्रजेश ठाकुर ने कुढ़नी विधानसभा क्षेत्र से जब पहली बार 1995 में चुनाव लड़ा था, तब बिहार पीपुल्स पार्टी की संसदीय समिति का सदस्य प्रमोद कुमार शर्मा थे. प्रमोद कुमार शर्मा एनजीओ सेंटर डायरेक्ट के संस्थापक और सेक्रेटरी हैं. बालगृह के आरोपों के जवाब में कुछ भी बोलने के लिए उन्होंने सुरेश कुमार को अधिकृत किया है. कहते हैं कि उसके संबंध में जो भी बात करनी है हमारे एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर सुरेश कुमार से बात कीजिए.
सुरेश कुमार आरोपों को खारिज करते हुए कहते हैं कि जिन दोनों बच्चों (एक की मौत, दूसरा लापता) को आधार बनाकर यह सब कहा जा रहा है, उनके मामले में हमनें सारी प्रक्रियाओं का पालन किया. जिस बच्चे की मौत हुई है, उसके मेडिकल रिपोर्ट में लिखा हुआ कि थैलेसेमिया नामक बीमारी मरने का कारण थी. दूसरे बच्चे की गुमशुदगी की रिपोर्ट भी थाने में दर्ज है.
सीतामढ़ी बालगृह के आरोपों के आधार पर शेल्टर होम की तत्कालीन सुपरिटेंडेंट ने पटना हाई कोर्ट में रिट पिटीशन भी दायर किया हुआ है. ताज्जुब की बात ये है कि इतने गंभीर आरोप लगने के बावजूद भी और निदेशालय द्वारा डीएम को पत्र लिखकर कार्रवाई करने के लिए कहने के करीब 10 महीने बाद भी उक्त बाल-गृह चल रहा है.
जानकारी के लिए ये भी बता दें कि सेंटर डायरेक्ट एनजीओ के शेल्टर होम न सिर्फ सीतामढ़ी में बल्कि बिहार के कुल छह जिलों में चल रहे हैं. टीआईएसएस की रिपोर्ट में मोतिहारी के जिस बाल गृह के बच्चों के यौन शोषण और उनके खिलाफ हिंसा का जिक्र हुआ है, वह शेल्टर होम एनजीओ निर्देश चलाता है. जिसके जेनेरल सेक्रेटरी हैं सत्येंद्र सिंह. सत्येन्द्र सिंह और प्रमोद कुमार शर्मा दोनों रिश्तेदार हैं.
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मोतिहारी स्थित निर्देश के इस ब्वायज चिल्ड्रेन होम में बच्चों के साथ मारपीट और उनका यौन शोषण किया जाता है. टीआईएसएस की रिपोर्ट में इस बात का जिक्र है. साथ ही यह भी लिखा हुआ है कि बच्चों की हालत को देखते हुए विभाग को तत्काल एक्शन लेना चाहिए. हालांकि, अभी तक विभाग की ओर से कोई एक्शन नहीं लिया गया है. प्रमोद कुमार शर्मा और सत्येन्द्र सिंह के एनजीओ क्रमश: सेंटर डायरेक्ट और निर्देश को ना सिर्फ सामाजिक कल्याण विभाग से बल्कि दूसरे विदेशी संस्थानों से भी भारी भरकम राशि मिलती है.
फ्रीडम फंड नाम की एक संस्था की वेबसाइट पर इन दोनों संस्थाओं को मिलने वाला जो फंड दिखाया गया है वो क्रमश: 23,000 अमेरिकी डॉलर और 3,21,014 अमेरिकी डॉलर है. इसके अलावा एड्स कंट्रोल सोसाइटी से भी ब्रजेश ठाकुर, प्रमोद कुमार शर्मा और सत्येंद्र सिंह के एनजीओ को करोड़ो रुपए मिलते हैं.
सवाल ये नहीं है कि किसने कितने एनजीओ खोल लिए, किसके एनजीओ पर सवाल उठा और किनके पास कहां से कितना पैसा आता है? सवाल ये है कि इतने आरोपों के बावजूद भी विभाग इन्हें शेल्टर होम चलाने का लाइसेंस (टेंडर) लगातार कैसे देता रहा?
मुजफ्फरपुर मामले में ब्रजेश ठाकुर के खिलाफ PIL दायर कर केस लड़ रहे संतोष कुमार कहते हैं कि,
“शेल्टर होम का सिंडिकेट एक त्रिकोणीय समीकरण से चलता है. मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड का खुलासा इस समीकरण के कोलैप्स होने के कारण हुआ है. जांच में अब तक जो सामने निकल कर आया है वह यही कहता है.”
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जिस विभाग (समाज कल्याण विभाग) को टेंडर देना था उसकी मंत्री संलिप्तता के आरोप में इस्तीफा दे चुकी हैं. शुरु में जिस अधिकारी ( गोपाल शरण) ने एक्शन लेने की कोशिश की उसका तबादला कर दिया गया. केस के पहले वादी और जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी रवि रौशन जेल में हैं. दूसरे वादी और बाल संरक्षण निदेशालय के अपर निदेशक दिवेश चंद्र शर्मा को विभाग निलंबित कर चुका है.
हमें लौटकर होटल आरएम पैलेस पर आना होगा. क्योंकि यह ब्रजेश ठाकुर का अपना होटल है. जहां सामाजिक कल्याण विभाग के कार्यक्रम आयोजित होते थे और विभाग के अधिकारियों के ठहरने की व्यवस्था होती थी.
जाहिर है ब्रजेश ठाकुर के करीबी भी इसी होटल में ठहरते होंगे. और यहीं से शेल्टर होम का सिंडिकेट भी चल रहा होगा, जिसका एक मोहरा ब्रजेश ठाकुर अब सलाखों के पीछे है.
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