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झमाडा कर्मियों ने फिर शुरू की हड़ताल, कहा- सहमति पत्र में कुछ भी स्पष्ट नहीं

Dhanbad : गुरुवार की शाम डीसी से हुई बातचीत के बाद झमाडा कर्मियों ने हड़ताल स्थगित करने की घोषणा की थी. उन्होंने कहा था कि जनहित को देखते हुए यह कदम उठाया गया है.

लेकिन सुबह होते ही इन्होंने फिर से आंदोलन शुरू कर दिया. उन्होंने कहा कि सहमति पत्र में कुछ भी स्पष्ट नहीं है. प्रशासन झमाडा कर्मियों को छलने का काम कर रहा है.

उन्होंने कहा कि सरकार उन्हें दोयम दर्जे का नागरिक समझ रही है. इसे कभी भी बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. प्रशासन ने जो सहमति पत्र दिया है उसमें इस बात का उल्लेख नहीं है कि उनकी मांगें मानी जायेगी या नहीं.

उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जायेगी, वे हड़ताल पर डटे रहेंगे. हालांकि समाचार माध्यमों में हड़ताल स्थगित करने की खबर पढ़कर लगभग 22 कर्मी काम पर सुबह ही लौट आये थे. लेकिन बाकी कर्मी अभी भी हड़ताल पर डटे हुए हैं.

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दो बार हो चुकी है वार्ता

झमाडा कर्मियों की प्रतिनिधि मंडल से दो बार बातचीत हो चुकी है. हर वार्ता के बाद हड़ताल टूटने की घोषणा कर दी जाती है लेकिन सुबह होते ही कर्मचारी फिर से हड़ताल शुरू कर देते हैं.

इससे पहले हुई वार्ता के बाद झमाडा कर्मियों ने कहा था कि उन्हें प्रशासन की ओर सहमति पत्र नहीं दिया गया है. सहमति पत्र मिलने तक उनकी हड़ताल जारी रहेगी.

गुरुवार को हुई वार्ता के बाद उन्हें सहमति पत्र दिया गया लेकिन शुक्रवार की सुबह झमाडा कर्मियों ने कहा कि पत्र में कुछ भी स्पष्ट नहीं है. इसलिए वे अपनी हड़ताल जारी रखेंगे.

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पानी के लिए परेशान है 12 लाख की आबादी

झमाडा कर्मियों की हड़ताल के कारण 12 लाख लोगों के समक्ष भीषण जलसंकट उत्पन्न हो गया है. उन्हें एक-एक बूंद पानी के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है.

गुरुवार को जलसंकट से तंग आकर केंदुआ के लोगों ने एनएच 32 को जाम कर दिया था. इससे पहले झरिया में लोगों मशाल जुलूस निकालकर जलसंकट के खिलाफ जोरदार आंदोलन करने की चेतावनी दी थी.

बावजूद इसके जलसंकट के समाधान की दिशा में कोई पहल नहीं की गयी. झमाडा के आठ सौ कर्मचारी आठ दिनों से हड़ताल पर हैं जिस कारण इनके समक्ष भीषण जलसंकट उत्पन्न हो गया है.

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