
Ranchi: आखिरकार बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने बाबूलाल मरांडी को विधायक दल के नेता की जिम्मेदारी सौंप दी. सोमवार को पार्टी की विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से उन्हें चुन लिया गया.
बैठक में केंद्रीय पर्यवेक्षक पी. मुरलीधर, केंद्रीय राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और झारखंड प्रभारी ओम प्रकाश माथुर तथा राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह के अलावा पार्टी के निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा, महामंत्री सुनील सिंह और दीपक प्रकाश भी उपस्थित थे.
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इस बात की पहले से उम्मीद जतायी जा रही थी कि बाबूलाल मरांडी को ही विधायक दल का नेता बनाया जायेगा. उन्हें यह पद देने के लिए काफी लंबी राजनीतिक पारी खेली गयी. बाबूलाल मरांडी ने पहले झाविमो का विलय बीजेपी में कराया. बीजेपी में विलय का विरोध करनेवाले झाविमो को दोनों विधायक प्रदीप यादव और बंधु तिर्की को पार्टी से बाहर किया.
पार्टी की समितियों को भंग किया और नियमानुसार झाविमो का विलय बीजेपी में करा दिया. जिस तरीके से झाविमो के विलय के कार्यक्रम में बीजेपी के दूसरे नंबर के सबसे ताकतवर नेता ने शिरकत की थी. उसी वक्त कयास लगा लिया गया था कि बाबूलाल मरांडी को ही विधायक दल का नेता चुना जायेगा.
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दिल्ली में हुई थी रणनीति तैयार
विधानसभा चुनाव के बाद यूं तो बाबूलाल ने झामुमो गठबंधन की बैठक में शामिल हुए थे. उन्होंने सरकार को बिना शर्त समर्थन भी दिया था. लेकिन अचानक वो विदेश दौरे पर चले गये. उसी वक्त उन्होंने दिल्ली में पार्टी के आला नेताओं के साथ मिल कर सारी रणनीति बनायी. दिल्ली से लौटने के बाद सबसे पहले पार्टी की समितियां भंग की और एक धुरंधर राजनीतिक अंदाज में पार्टी का विलय बीजेपी में करा लिया गया.
बाबूलाल अब सदन में सरकार के खिलाफ नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में रहेंगे. इससे पहले बीजेपी सदन में बिना नेता प्रतिपक्ष के थी. लेकिन अब सदन में बाबूलाल को सरकार के खिलाफ आग ऊगलते देखा जायेगा.
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