
Dhanbad: प्रधानमंत्री जन आरोग्य (आयुष्मान भारत) योजना का लाभ पाने के लिए लोग किस तरह परेशान हो रहे हैं, इसकी बानगी कोयलांचल धनबाद के झरिया में देखने को मिली.
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झरिया प्रखंड के जामाडोबा के आलम नगर में रहनेवाले 30 वर्षीय सेराज अंसारी पिछले चार वर्षों से कैंसर से पीड़ित हैं, अपने इलाज को लेकर वह पिछले तीन वर्षों से सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी अस्पतालों का भी चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन सेराज को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है.
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पेशे से ठेका मजदूर सेराज की उम्मीद उस वक्त जगी जब देश के प्रधानमंत्री ने गरीबों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के लिए आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत की.
इसका लाभ पाने के लिए सेराज ने आयुष्मान कार्ड बनवाया, आयुष्मान कार्ड बनने के बाद सेराज काफी खुश थे.
टाल मटोल करते रहे अस्पताल
पीड़ित सेराज आयुष्मान कार्ड लेकर इलाज के लिए धनबाद के कई निजी अस्पतालों के साथ-साथ राजधानी रांची के कई नामी अस्पतालों में गये, लेकिन सभी अस्पताल टाल मटोल करते रहे. सेराज को इलाज के बदले अस्पताल प्रबंधन के द्वारा एक ही जवाब मिला, इस आयुष्मान कार्ड का कोई फायदा नहीं है. इस कार्ड से छोटे-मोटे इलाज होते हैं.
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सेराज सभी अस्पताल प्रबंधन का एक ही जवाब सुन कर काफी मायूस हो गये और अब पीड़ित सेराज अपने इलाज के लिए मीडिया के माध्यम से सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि किसी तरह उनका इलाज हो जाये. ताकि वह अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकें.
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सरकारी दावे खोखले साबित
प्रधानमंत्री मोदी की महत्वाकांक्षी योजना आयुष्मान भारत का उद्देश्य गरीबों को मुफ्त इलाज मुहैया कराना था. इस योजना में हजारों अस्पतालों को जोड़ा गया था, लेकिन इस योजना के तहत अधिकतर अस्पताल गरीबों का इलाज करने में टाल मटोल करते हैं.
फिलहाल सेराज अपने इलाज के लिए जिला प्रसाशन से गुहार लगा रहा है कि किसी तरह उसका इलाज हो सके.
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