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Jharkhand : भारी मोटरवाहनों के इस्तेमाल में 75 फीसदी की कमी, नयी व्यवस्था से परेशान है व्यापारी, परिवहन विभाग ने इन वाहनों को गुड्स कैरियर की श्रेणी में डाला

Ranchi : राज्य के भारी मोटरवाहन संचालकों की समस्या बढ़ गयी है. संचालकों की मानें तो गुड्स कैरियर की श्रेणी में इन वाहनों का डाल कर परमिट के लिये बाध्य किया जा रहा है. वहीं, विभागीय उदासीनता के कारण राज्य सरकार को करोड़ों राजस्व की भी हानि हो रही है. चैंबर ऑफ कॉर्मस की हेवी माइनिंग मशीनरी उप समिति की मानें तो राज्य में साल 2019 में ये व्यवस्था लागू की गयी. तब से लेकर अब तक राज्य में लोडर मशीनों के इस्तेमाल में कमी आयी है. मोटर एक्ट के तहत जेसीबी लोडर मशीनें अलग-अलग राज्यों में नन ट्रांसपोर्ट श्रेणी में निबंधित की जाती हैं. लेकिन झाखंड समेत कुछ अन्य राज्यों में इसे ट्रांसपोर्ट और गुडस व्हिकल की श्रेणी में निबंधित किया जा रहा है. जबकि ये मशीनें खदानों में चलती हैं. व्यापारियों की मानें तो परिवहन विभाग के अव्यवहारिक निर्णय के अनुसार इन मशीनों का निबंधन कराया जाना अनिवार्य है. जिससे समस्या काफी बढ़ गयी है. जानकारी हो कि इन वाहनों में जेसीबी, पोकलेन, क्रेन जैसे वाहन शामिल है.

पेनाल्टी और जुर्माना के नाम पर परेशानी

व्यापारियों की मानें तो जनवरी 2019 तक रोड टैक्स इन मशीनों से लिया जाता था. जो नियत थी. लेकिन इसके बाद रोड टैक्स वसूली में भी वृद्धि कर दी गयी. यहां तक पेनाल्टी और जुर्माना भी टैक्स के साथ जोड़ा जाता है. व्यापारियों की मानें तो भारी मोटरवाहनों का निबंधन गुडस कैरियर और ट्रांसपोर्ट कैटगरी में किया जा रहा है जबकि इसे सिर्फ कंस्ट्रक्शन इक्यूपमेंट व्हिकल में किया जाना चाहिए. व्यापारियों ने बताया कि राज्य सरकार ने नई स्कीम के तहत कुछ दिनों के लिए टैक्स के उपर लगे पेनाल्टी को माफ करने की नीति बनाई थी. जिसमें परमिट के कारण हेवी माइनिंग मशीनरी मालिक उस माफी का लाभ नहीं उठा पाये. जिससे सरकार को करोडों के राजस्व से वंचित होना पडा.

वाहनों के इस्तेमाल में 75 फीसदी कमी

पड़ोसी राज्यों बिहार, बंगाल और उड़ीसा में अब भी त्रैमासिक रोड टैक्स ही लिया जाता है. प्रदेश में फरवरी 2019 से जब से यह व्यवस्था चालू हुई है, लोडर मशीनों की बिक्री में 75 प्रतिशत की गिरावट आयी है. जबकि पड़ोसी राज्यों में इसकी बिक्री तेजी से बढ़ती जा रही है, जिस कारण झारखण्ड सरकार को जीएसटी के रूप में राजस्व का बड़ा नुकसान हो रहा है. इन व्यापारियों की सरकार से मांग है कि सरकार इन मुद्दों पर सकारात्मक पहल करें. जिससे समस्या का निदान हो सकें.

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