
Palamu : जिले में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी के खिलाफ एआईएसएफ ने मोर्चा खोल दिया है. शनिवार को इस सिलसिले में छात्र संगठन एआईएसएफ के पलामू जिला अध्यक्ष सुजीत पांडे (विदेशी) ने उपायुक्त शशि रंजन से ज्ञापन सौंपा. इसमें कहा गया है कि प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर रोक नहीं लगाई गयी तो संगठन आंदोलन करेगा.
मांग पत्र में उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के चलते सभी छात्रों एवं बच्चों की पढ़ाई वर्ष 2020 से ही ठप पड़ी है. एक साल से बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं, लेकिन फिर भी स्कूल प्रबंधक के द्वारा बार-बार अभिभावकों एवं बच्चों पर दबाव देकर फीस भरने को कहा जा रहा है.
लगभग 70 परसेंट अभिभावकों ने इन प्राइवेट विद्यालयों को अपने बच्चों का फीस भर दिया. प्राइवेट स्कूल जैसे डीएवी, सेंट जेवियर और सैक्रेड हार्ट ऑनलाइन क्लासेज के माध्यम से ही बच्चों का एडमिशन कर उन्हें अगली कक्षा में दाखिला दे दिया, परंतु जिन 30 परसेंट अभिभावकों अपनी आर्थिक स्थिति कमजोर रहने एवं लॉकडाउन के कारण अपने बच्चों की फीस नहीं भर पायें हैं. ऐसे में उनको इस वर्ष ऑनलाइन क्लासेज से वंचित कर दिया गया. यहां तक कि जब बच्चे ऑनलाइन क्लासेज में भाग ले रहे हैं तो शिक्षकों के द्वारा उनको डिफॉल्टर कहा जा रहा है, जो सही नहीं है.
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सरकार के आदेश की हो रही अनदेखी
25 जून 2020 को झारखंड सरकार ने आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया था कि विद्यालय में सामान्य स्थिति होने तक केवल शिक्षण शुल्क मासिक दर पर लेना होगा. अगर किसी कारण से अभिभावक मासिक शुल्क देने में भी सक्षम नहीं होते हैं तो ऐसी परिस्थिति में भी बच्चों की शिक्षा बाधित नहीं होनी चाहिए.
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कई बच्चे ऑनलाइन क्लासेज से वंचित
इसके बावजूद मेदिनीनगर निगम क्षेत्र के डीएवी स्कूल के कई बच्चे जैसे प्रियंका कुमारी, मौसम कुमार, अरिन कुजूर, सास्वत कुमार, पुष्टि, सूर्यांशु, प्रसून, सुधांशु एवं संत जेवियर स्कूल के आदित्य पांडे जैसे कई विद्यार्थियों को ऑनलाइन क्लासेज से वंचित रखा गया है.
ऐसी परिस्थिति में उपायुक्त पहल कर ऑनलाइन क्लासेज से उन वंचित सभी छात्रों को जोड़वाने की कार्रवाई करें. शिक्षा माफिया एवं जिला शिक्षा विभाग की मिलीभगत से शिक्षा का व्यापार हो रहा है और छात्र प्रताड़ित हो रहे हैं. ऐसी परिस्थिति में अगर उन पर लगाम नहीं लगाया गया तो एआईएसएफ इसके लिए उग्र आंदोलन करेगा.
एआईएसएफ जिला अध्यक्ष ने यह भी कहा कि पलामू जिला के अभिभावक संघ के नेता सिर्फ प्राइवेट स्कूलों की वाहवाही करते नजर आते हैं, इनको छात्रों और अभिभावकों की स्थिति के बारे में कुछ दिखाई नहीं देता है.
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