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कागजों पर किसानों के बीच बंटे 500 करोड़ के कृषि उपकरण, धरातल पर 5 करोड़ रुपये का हिसाब भी मुश्किल!

Principal Correspondent

Ranchi: कृषि उपकरण बैंक कागजों पर शानदार काम कर रहा है. पिछले पांच सालों में इसके जरिये कृषि यंत्रों के अनुदान पर वितरण में करीब 500 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गये हैं. पर हकीकत में यह आंकड़ा 5 करोड़ का भी दिखना मुश्किल है. झारखंड राज्य किसान महासभा ने यह आरोप लगाया है. उसके मुताबिक कृषि विभाग, झारखंड के स्तर से किसानों, एसएचजी समूहों के बीच 2017-18 से 2022-23 की अवधि में कृषि उपकरण बैंक की ओर से बांटे गये हैं. पम्पसेट, मिनी ट्रैक्टर, पावर टिलर और अन्य उपकरणों की खरीद के बाद इसे लाभुकों में बांटे जाने का दावा विभाग करता है. महासभा ने यह भी दावा किया है कि 2022-23 में 72 करोड़ (7200.00 लाख) रुपये संबंधित जिलों के जिला भूमि संरक्षण पदाधिकारी और भूमि संरक्षण निदेशालय, कांके के स्तर से व्यय किये गये हैं. इस आधार पर 2017 से अब तक (2022-23) 400 करोड़ से अधिक के उपकरण बांटे गये होंगे. इसकी जमीन पड़ताल में आंकड़ा 5 करोड़ तक नहीं पहुंचेगा. महासभा ने अब 27 अप्रैल को कृषि निदेशालय के घेराव के जरिये सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की योजना तय की है.

इन जिलों में इतने बंटे कृषि उपकरण

किसान महासभा के मुताबिक 2022-23 में कृषि यांत्रिकीकरण के प्रोत्साहन हेतु अनुदान पर मिनी ट्रैक्टर, पावर टीलर, रीपर, राईस ट्रांसप्लांटर और दूसरे कृषि उपकरणों के वितरण के लिए जिलावार लक्ष्य तय किया गया.

ऐसे सामने आयेगा सच

झारखंड किसान महासभा के अध्यक्ष राजू महतो के मुताबिक मिनी ट्रैक्टर एवं पावर टिलर के वितरण में बड़ी गड़बड़ी हो रही है. ऐसा पिछले करीब 5 सालों से जारी है. इसका सच जानने का तरीका विभाग को भी मालूम है पर वह इसे नजरअंदाज करता है. आमतौर पर एक ही मिनी ट्रैक्टर एवं पावर टिलर को अफसरों और सप्लायरों की मिलीभगत से 10 लाभुकों के बीच वितरित दिखाकर अनुदान की राशि निकाल ली जाती है. पिछले पांच सालों में इन उपकरणों की खरीद और बिल की जांच से कई सच सामने आएंगे. इसके एवज में लाभुकों में वितरित किए गये प्रत्येक पंपसेट, मिनी ट्रैक्टर, पावर टिलर इत्यादि का यूनिक आईडेंटिफिकेशन नंबर, इंजन नंबर का भौतिक सत्यापन कराने से भी 500 करोड़ के घोटाले की असलियत बाहर आयेगी.

राजू महतो कहते हैं कि झारखण्ड में कृषि और कृषि से जुड़े तमाम विभागों में भ्रष्टाचार चरम पर है. महासभा को किसानों से लगातार शिकायत प्राप्त हो रहे हैं जिसमें प्रथम दृष्टया घोर अनियमितता दिख रही है. हाल के दिनों में जिस प्रकार महासभा ने बागवानी मिशन के तहत संचालित प्रिजर्वेशन यूनिट घोटाले का खुलासा किया है, वो सिर्फ एक बानगी मात्र है. प्रदेश के तमाम किसानों ने भूमि संरक्षण विभाग द्वारा क्रियान्वित किये जा रहे योजनाओं को लेकर चिंतित है. उसके पास जो आंकड़े हैं, हालांकि वो सत्यापित नहीं हैं परंतु सैंकड़ो की संख्या में प्राप्त शिकायत ही बहुत कुछ कह रहे हैं. किसान महासभा अब कृषि निदेशालय का ईंट से ईंट बजा देगी. इन घोटालेबाजों का पर्दाफाश करेगी.

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