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दिशोम गुरु की हार से मर्माहत नेता, कार्यकर्ता व समर्थक हेमंत को सोशल मीडिया में दे रहे सलाह, नजदीकियों पर साध रहे निशाना

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Pravin kumar

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Ranchi: शिबू सोरेन की हार के बाद पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन को लेकर जो प्रतिक्रिया सोशल मीडिया से लेकर कार्यकर्ताओं-नेताओं की आ रही है, शिबू सोरेन के नेतृत्व के दौर में इस तरह की प्रतिक्रिया कभी देखने को नहीं मिली है. शिबू सोरेन के नेतृत्व में भी झामुमो को कई बार हार का सामना करना पड़ा है.

हेमंत सोरेन के पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद से पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं से नेतृत्व के दूर होने का मामला हाल के दिनों में कई बार सामने आया है. जब पार्टी का नेतृत्व पूरी तरह दिशोम गुरु शिबू सोरेन के हाथ में था, तो उनके पीपुल्स कनेक्शन की शैली बेहद आत्मीयतावाली रही. वे लोगों को उनके दर्द और खुशी दोनों में हिस्सेदार बना लिया करते थे. हेमंत सोरेन के नेतृत्व की सबसे बड़ी कमी आज यही दिखती है.

वे मेहनत करते तो दिखते हैं लेकिन एक स्वाभाविक संवाद और संबंध बनाने की इनकी शैली प्रभावी नहीं लगती है. आम कार्यकर्ताओं के साथ उनका कनेक्ट लेवल भी सवालों के घेरे में है. शिबू सोरेन हार की हताशा को आंदोलनों में बदल देने की ताकत रखते थे और कई बार उन्होंने पार्टी को राख से उठा कर खड़ा भी किया. राजनीतिक जीवन में शिबू सोरेन को अनेक विपरीत चुनौतियों का सामना करना पड़ा है.

कई बार पार्टी में टूट भी हुई लेकिन हर बार वो विजेता के रूप में उभरे. बिनोद बिहारी महतो के विरोध के समय भी उन्होंने नये महतो नेताओं को आंदोलन का अगुवा बना दिया. हेमंत की चुनौती इनसे कहीं ज्यादा कठिन दिखती है क्योंकि उन्हें केवल पार्टी के आंदोलनों की विरासत को बचाये रखना है, बल्कि नये मतदाताओं के बीच से नया नेतृत्व बनाना है.

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दिशोम गुरु शिबू सोरेन की दुमका लोकसभा सीट पर हार के बाद जहां झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं और समर्थकों का मनोबल कमजोर दिख रहा है. वहीं सोशल मीडिया पर कई कमेंट सामने आये हैं.

इन कमेंट में पार्टी को फिर से मजबूत करने के कई सुझाव हेमंत सोरेन को दिये गये हैं, तो दूसरी ओर गुरु जी की हार पर मर्माहत सर्मथक पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष को कई तरह नसीहत भी देते दिख रहे हैं. और हेमंत सोरेन के ईद-गिर्द रहनेवाले लोगों के खिलाफ पार्टी को बर्बाद करने का आरोप भी लगा रहे हैं.

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दिशोम गुरु की हार पर किस तरह की प्रतिक्रिया चल रही है सोशल मीडिया में

बीआइटी से पढ़े जमशेदपुर के युवा राहुल मुर्मू ने अपनी वाल पर लिखा है- तीनों लोगों को झारखंडी जनमानस की कद्र करते हुए अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए #बिनोद पांडे, #सुप्रीयो भट्टाचार्य और #पिंटू सिंह. ये जात-पात का बात बिल्कुल नहीं है. पहले से जब ये लोग पार्टी के थिंक टैंक के रूप में काम कर रहे हैं तो आज तक क्यों पार्टी 17 – 18 विधानसभा सीट से आगे नहीं बढ़ रही है और लोकसभा चुनाव में पार्टी का करारी हार हुई है.

बात ये है कि इन लोगों को झारखंडी जनमानस को सही रूप से समझ पाने में दिक्कत हो रही है. इसका मुख्य कारण है झारखंडी विविधता को नहीं समझना. जिसके चलते पार्टी खत्म होती जा रही है. आज पार्टी को केवल आदिवासियों के रूप में प्रस्तुत किया गया है, आखिरकार इसकी जिम्मेदारी सिर्फ इसके सलाहकारों है, जो हेमंत सोरेन का नून तो खाते हैं परंतु गुण आरएसएस का गाते हैं.

आज तक झारखंडी सवर्ण समाज में पार्टी क्यों कमजोर पड़ रही है जबकि इसके तीनों सलाहकार सवर्ण समाज से आते हैं. इसका मतलब इन्हें अपने समाज की विभिन्न संरचना को समझने में दिक्कत है और इसके अनुरूप पार्टी कार्य योजनाओं को संचालित नहीं कर पा रही है. तो फिर इन लोगों का पार्टी में मौजूद रहना कहीं से सार्थक नहीं है.

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दुमका के चन्द्र मोहन हांसदा लिखते हैं यह कथन बिल्कुल सत्य है ….झारखंड मुक्ति मोर्चा आज राष्ट्रीय फलक पर अपनी पहचान अपने संघर्ष की बदौलत इतिहास में दर्ज है और आज उसी का परिणाम है कि हम झारखंडवासियों को गुरु जी के संघर्ष और समर्पण से झारखंड राज्य की प्राप्ति हुई.

पर केंद्र कमेटी में जो लोग बैठे हुए हैं, सही रूप से ये आरएसएस के मूल एजेंट हैं. जिसे हम और आप समझ नहीं पा रहे हैं और आज जो राजनीतिक हालात हैं इसमें इन तीन महानुभाव के अलावा दुमका के जिला अध्यक्ष सुभाष सिंह भी कम कसूरवार नहीं हैं.

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हम सभी अपने अस्तित्व की लड़ाई के लिए पूरे तन-मन से काम करते हैं, पर नेतृत्व सही हाथों को नहीं मिलता है तो हम संगठित रूप से संगठन को सही दिशा में नहीं ले जा सकते …. हेमंत भैया को बहुत ही गहनता पूर्वक पार्टी की इन 3 महान हस्तियों को तत्काल पार्टी में विराम देना चाहिए और जिला अध्यक्ष सुभाष सिंह की भी छुट्टी कर देनी चाहिए.

पर हम सभी जितना कुछ कह लेंगे यह लोग हमेशा-हमेशा हेमंत भैया को दिग्भ्रमित कर हम लोग को ही किक आउट करवा देंगे. इसलिए हमें पूर्ण विश्वास है आगामी विधान सभा को मद्देनजर रखते हुए पार्टी सही समय पर सकारात्मक निर्णय लेगी.

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मनदीप मिंज हेमंत के वाल पर लिखते हैं विधानसभा चुनाव बैलेट पेपर पर कराने को लेकर अभियान छेड़िए और रणनीति बना कर आंदोलन कीजिए. हवा हवाई नेतागिरी चमकाने से बेहतर होगा फील्ड पर आइए.

Rajesh Mahto- हर एक व्यक्ति से जुड़ना होगा, हर घर के एक-एक दरवाजे तक दस्तक देना होगा. हर कार्य कार्यकर्ता का सम्मान होना चाहिए. चापलूसी करनेवालो से बचना होगा. मूलभूत समस्या पर फोकस करना होगा तब ही हम विधानसभा चुनाव में जीत हासिल कर सकते हैं.

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Ashok Mahto- पार्टी में झारखंड आंदोलकारी जो नेता पार्टी में नहीं हैं, उन्हें सम्मान के साथ जोड़ना होगा. मूलवासी मुद्दे औऱ नेता को सम्मान देना होगा. झारखण्ड राज के विरोधी राजद, कांग्रेस से अलग होना होगा. झामुमो के पूर्व सांसद, विधायक जो किसी भी कारण से पार्टी से दूरी बनाये हैं उन्हें जोड़ना होगा.

वैसे इस चुनाव में लोग दिल्ली को देख कर वोट दिये. विधानसभा के तस्वीर कुछ अलग होगी. प्रमुख पदों पर मूलवासी को आगे लाना होगा, साथ ही सभी जाति का ख्याल रखना होगा.

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Arun Kumar- हेमंत सोरेन झारखंड के लाल हैं, जो आपके साथ एक-एक जनता होगी. बस स्टैंड लेने की जरूरत है. हर बूथ में लीड कीजियेगा तभी जीत हासिल कर सकते हैं. आपके कार्यकर्ता हवा हवाई हैं, जो घर बैठे फलना गांव हमही को वोट देगा, एडवांस बकवास में लगा रहता है.

जो भी चूक हुई है विधानसभा में एक पंचायत में एक जोन प्रभारी बनायें और हर बूथ में कम से कम चार एक्टिव कार्यकर्ता चुनिये जो ईमानदारी से पार्टी के लिए काम करे. हवा हवाई से सतर्क रहें.

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Manohar Kumar Mahto- नए चेहरे जोड़िए हेमंत भैया जी !!! हम युवाओं पर भी भरोसा जताइए और हमें भी पार्टी पर भरोसा करने का मौका दीजिए. अपनी पार्टी के अंदर एक रिफॉर्मेशन कि जरूरत है, इसे समझिए. हमें लगता है JMM अपने दम पर 42 का आंकड़ा पार कर सकता है

लेकिन शर्त है पार्टी रिफॉर्मेशन, सही दिशा और सही कंधों के बल पर कड़ी मेहनत !!! अपनी माटी, जल जंगल जमीन और झारखंडियत को मत छोड़िए, केंद्रीय पार्टियों का मोह त्यागिये! आज JMM में एक ही चेहरा है, हमारे मिस्टर कुणाल षाड़ंगी जी !! बाद बाकी तो पुराने हैं जिनके चर्चे तो होते हैं लेकिन शिकायतें भी खूब होती हैं!

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