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14वें वित्त आयोग से मिले 4214.33 करोड़ का ऑडिट नहीं कराना चाहती सरकार! आठ माह में एजेंसी तक तय नहीं

2015-16 से झारखंड को 14वें वित्त आयोग का मिल रहा है पैसा, कुल 6046.73 करोड़ रुपये का अनुदान मिलेगा केंद्र से

राज्य सरकार को वित्त आयोग से मिल रहा कुल अनुदान की 3.139 प्रतिशत राशि

Deepak

Ranchi: झारखंड सरकार को गांवों की सत्ता को मजबूत करने के लिए 14वें वित्त आयोग से लगातार 2015-16 से अनुदान मिल रहा है. केंद्र से मिलनेवाले कुल अनुदान और खर्च के आधार पर झारखंड को 3.139 प्रतिशत राशि मिल रही है.

इस राशि से सर्व शिक्षा अभियान, मनरेगा, सांसद कोष, स्वच्छता अभियान से आधारभूत संरचना स्थापित करनी है. 14वें वित्त आयोग से झारखंड को 2019-20 तक कुल 6046.73 करोड़ रुपये मिलने हैं. अब तक 4214.33 करोड़ रुपये राज्य को मिल चुके हैं.

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लेकिन आठ महीने से सरकार यह तय नहीं कर पा रही है कि 14वें वित्त आयोग से मिली राशि का अंकेक्षण (ऑडिट) कौन सी चार्टर्ड एकाउंटेंट फर्म करेगी. राज्य के पंचायती राज निदेशक ने बताया कि आठ महीने पहले चार्टर्ड एकाउंटेंट फर्म के चयन की प्रक्रिया शुरू की गयी थी.

लेकिन बार-बार चयन समिति के सदस्य के बदले जाने से यह प्रोसेस अब तक पूरा नहीं हो पाया है. उन्होंने कहा कि जल्द ही इस पर सरकार के स्तर पर निर्णय ले लिया जायेगा.

78 कंपनियों ने दिया था आवेदन

पंचायतों का अंकेक्षण करने के लिए 78 कंपनियों ने आवेदन दिया था. इसमें से पांच को तय अर्हता का पालन नहीं करने की वजह से रद्द कर दिया गया.

73 कंपनियों में से कौन-सी कंपनी पंचायतों का अंकेक्षण करेगी. यह प्रस्ताव फाइलों में ही बंद है. जानकारी के अनुसार 2015-16 से लगातार ऑडिट होना है. 14वें वित्त आयोग का कार्यकाल डेढ़ साल में समाप्त हो जायेगा.

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झारखंड को 14वें वित्त आयोग के अलावा अतिरिक्त ग्रांट मिला 6196 करोड़

राज्य को 13वें और 14वें वित्त आयोग के अलावा 6196 करोड़ का अतिरिक्त ग्रांट भी मिला है. जानकारी के अनुसार, 14वें वित्त आयोग से झारखंड को 2014-15 में 652.83 करोड़, 2016-17 में 1022.53 करोड़, 2017-18 में 1178.63 करोड़, 2018-19 में 1360.62 करोड़ रुपये मिले हैं. 2019-20 में 1832.12 करोड़ और मिलेंगे.

वित्त आयोग के अनुदान में 90 प्रतिशत सहायता मूल अनुदान के रूप में दी जाती है, जबकि 10 फीसदी राशि परफॉरमेंस के आधार पर राज्यों को दी जाती है.

केंद्र सरकार ने परफॉरमेंस के लिए एक मानक तय कर रखा है, जिसके आधार पर दी गयी राशि को सही तरीके से खर्च करना और सोसल ऑडिट भी कराना अनिवार्य है.

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