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डीजीपी की पत्नी ने ली जमीन तो खुल गया टीओपी और ट्रैफिक पोस्ट, हो रहा पुलिस के नाम व साइन बोर्ड का इस्तेमाल

Ranchi: कांके-पिठोरिया रोड के बगल में चामा मौजा में जमीन कारोबारियों ने कमाल का खेल किया है. सरकारी गैरमजरुवा जमीन प्रभावशाली लोगों को दिलवा कर वहां पर कई सुविधाएं हासिल कर लीं. पुलिस के प्रमुख डीजीपी डीके पांडेय की पत्नी पूनम पांडेय के नाम से 51 डिसमिल जीएम लैंड को सारे नियम कानून को ताक पर रख कर म्यूटेशन करा दिया गया. म्यूटेशन होने के बाद वहां पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कर दिये गये. सरकारी राशि से टीओपी बना दी गयी और हाइवे पर ट्रैफिक पोस्ट भी. मजेदार बात यह है कि यह सारा काम बहुत ही कम समय में और मुस्तैदी के साथ किया और कराया गया.

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निजी सोसाइटी के लिए पुलिस प्रतीक का इस्तेमाल

सोसाइटी बनाने के लिए पुलिस के नाम और पहचान की साइन बोर्ड का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. आप चले जायें कांके पिठोरिया हाइवे पर. रिंग रोड का ओवरब्रिज को पार करते ही जीएस कंस्ट्रक्शन के कई बोर्ड नजर आते हैं. पुलिस प्रतीक वाला लाल और ब्लू रंग का बोर्ड लगाया गया है. ठीक उसी तरह जिस तरह थाना या पुलिस के किसी दूसरे कार्यालयों में बोर्ड लगे होते हैं. सामान्यतः देखने से ऐसा लगेगा कि यह पुलिस विभाग औऱ सरकार की ही कंपनी है. स्थानीय लोग बताते हैं कि जमीन कारोबारियों के द्वारा पुलिस के नाम का इस्तेमाल स्थानीय लोगों की जुबान को बंद रखने के लिए किया गया है.

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बोर्ड पर पुलिस हाउसिंग कॉलोनी डेवलपर्स लिखा है

बोर्ड पर पुलिस हाउसिंग कॉलोनी डेवलपर्स लिखा हुआ है. साथ ही नीचे में जीएस कंस्ट्रक्शन लिखा हुआ है. यह बोर्ड वहां पर ही है, जहां पर डीजीपी की पत्नी की जमीन है. इस जमीन पर अब बंगला बन गया है. वहां जाने के लिए गेट लगा हुआ है. डीजीपी डीके पांडेय अपने कार्यकाल में बंगला बनते वक्त कई बार वहां पर गये. लेकिन डीजीपी के स्तर से भी जीएस कंस्ट्रक्शन के द्वारा पुलिस की पहचान और साइन बोर्ड के इस्तेमाल पर आपत्ति नहीं दर्ज की गयी. या यूं कहें कि डीजीपी के पद पर रहते हुए डीके पांडेय पुलिस की पहचान का बेजा इस्तेमाल होते हुए देखते रहे और इग्नोर करते रहे, तो इसकी वजह भी कोई छोटी नहीं होगी.

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जिस प्लॉट के पास पुलिस हाउसिंग कॉलोनी डेवलपर्स, जीएस कंस्ट्रक्शन का बोर्ड लगा है, वहीं पर डीजीपी डीके पांडेय की पत्नी पूनम पांडेय ने 51 डिसमिल जमीन ली है. वह प्लॉट गैरमजरुवा नेचर का है. वह कांके अंचल के हल्का-03, चामा मौजा के खाता संख्या-87 और प्लॉट संख्या-1232 है. इस गैर मजरुवा जमीन का म्यूटेशन करा कर रैयत प्लॉट में तब्दील कर दिया गया है.

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