
Akshay Kumar Jha
Ranchi: आखिरकार यह बात पुख्ता हो ही गयी कि पूर्व डीजीपी डीके पांडेय का चामा स्थित निर्माणाधीन आलीशान आवास सरकारी जमीन पर बना है.
डीसी रांची ने सीओ कांके और डीसीएलआर रांची को कमेटी बना कर जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा था. कमेटी ने जांच रिपोर्ट सौंप दी है. न्यूज विंग को रांची में अपर समाहर्ता सत्येंद्र कुमार ने बताया कि जांच में इस बात की पुष्टि होती है कि चामा में निर्माणाधीन डीजीपी का आवास सरकारी जीएम लैंड पर बन रहा है.
इसमें कोई शक नहीं है कि जमीन की जमाबंदी और रजिस्ट्री गलत तरीके से करायी गयी. जांच के दौरान गलत तरीके से म्यूटेशन कराने के लिए 29 लोगों को चिन्हित किया गया है. कार्रवाई के तहत इन सभी 29 लोगों को प्रशासन की तरफ से नोटिस दे दिया गया है. बीएलआर (Bihar Land Reforms Act-1950) एक्ट के फोर-एच के तहत प्रशासन मामले में कार्रवाई कर रहा है.
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कांके सीओ ने शुरू की कार्रवाई
कांके सीओ अनिल कुमार ने मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है. उन्होंने चुनाव के पहले ही आरोपियों को नोटिस सर्व कर दिया था. दूसरा नोटिस भी जा चुका है. अंचल कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि पोस्ट के माध्यम से तीसरा नोटिस सोमवार को दिया जा सकता है.
तीन बार नोटिस होने के बाद भी अगर सीओ के कोर्ट में आरोपी नहीं आते हैं, तो सीओ अपनी तरफ से रिपोर्ट बना कर डीसीएलआर को भेज देंगे. इसके बाद डीसीएलआर के कोर्ट में कार्यवाही चलेगी.
डीसीएलआर के बाद मामला डीसी के पास जायेगा. फिर मामला आयुक्त के पास भेजा जायेगा. आयुक्त सरकार को रिपोर्ट करेंगे. सरकार की तरफ से कार्रवाई के लिए आदेश निकाला जायेगा.
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न्यूज विंग ने सबसे पहले चलायी था खबर
29 मई 2019 को न्यूज विंग ने ही सबसे पहले पूर्व डीजीपी के चामा स्थित बन रहे आवास की खबर चलायी थी. शीर्षक था – डीजीपी डीके पांडेय ने पत्नी के नाम पर खरीदी 51 डिसमिल जीएम लैंड. जिला रांची, अंचल का नाम कांके. हल्का-03 और मौजा चामा. खाता संख्या 87 और प्लॉट संख्या 1232. कुल जमीन 50.90 डिममिल. इस भूखंड की खरीद पूनम पांडेय यानी झारखंड के डीजीपी डीके पांडे की पत्नी के नाम पर की गयी थी. सरकारी कागजात में यह जमीन गैरमजरुवा नेचर की है. जो अब साबित हो गया है.
गैरमजरुवा जमीन का म्यूटेशन करा कर रैयती प्लॉट में तब्दील कर दिया गया. जमीन की रजिस्ट्री और म्यूटेशन तब हुई है, जब झारखंड के डीजीपी के पद पर डीके पांडेय पदस्थापित थे. म्यूटेशन 2018-19 के वित्त वर्ष में हुआ है. गैरमजरुवा से रैयती बनाने में प्रशासनिक मदद ली गयी.
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