
kumar gaurav
Ranchi: राज्य में स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं की स्थिति बेहद खराब है. केंद्र ने भी स्वास्थ्य मामले में राज्य के 24 में से 19 जिलों को अत्यंत पिछड़े जिलों की श्रेणी में रखा है. ग्रामीण इलाकों के साथ शहरी इलाकों में भी आए दिन कुपोषण के मरीज पाए जाते हैं. सरकार ने स्वास्थ्य सुधार की दिशा में पहल को लेकर कई दावे भी किए हैं, पर नतीजा शायद ही निकल पाए क्योंकि राज्य के कुल 1538 स्वास्थ्य केंद्रों में से 1015 स्वास्थ्य केंद्र अभी भी निर्माणाधीन है. मालूम हो कि स्वास्थ्य केंद्रों की निर्माण प्रक्रिया 2009 से ही चल रही है. स्वास्थ्य केंद्र नहीं होने की स्थिति में मजबूरीवश राज्य के दूर दराज से भी गरीब मरीजों को राजधानी का ही रुख करना पड़ता है, पर उनकी बिमारी शायद ही दूर हो पाती है. जहां स्वास्थ्य केंद्र बने भी हैं वहां डॉक्टरों की उपस्थिति न के बराबर है. अधिकतर स्वास्थ्य केंद्र या उप स्वास्थ्य केंद्र नर्स के भरोसे ही है.
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झोलाछाप डॉक्टरों का चलता है बड़ा कारोबार
ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों का आभाव है. अधिकतर सरकारी डॉक्टर ग्रामीण इलाकों में काम करना नहीं चाहते, इसको ध्यान में रखते हुए सरकार ने पीजी करने वाले छात्रों को ग्रामीण इलाकों में रहकर काम करने को बाध्य करेगी. पीजी करने वाले सभी स्टूडेंट्स को गांवों में जाकर तीन साल के लिए काम करना अनिवार्य है. पर अभी ये फैसला धरातल पर नहीं है, जिस वजह से बिना डिग्री के झोलाछाप डॉक्टरों, और कंपाउंडरों का बड़ा करोबार चलता है. ग्रामिणों का इलाज उन्हीं के भरोसे चलता है.
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अधिकतर स्वास्थ्य केंद्र हो चुके हैं जर्जर
राज्य में बनाए गए अधिकतर स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति दयनीय है, रख-रखाव या देख-रेख के आभाव में जर्जर होने के कगार पर है. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टर नहीं होने के कारण इलाज नहीं हो पाता है. एक या दो नर्स के भरोसे ही स्वास्थ्य केंद्र और उपकेंद्र चल रहे हैं. अनुमंडल अस्पताल में डॉक्टर आते तो हैं पर वे ज्यादातर मामलों में मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर कर देते हैं.
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1119 स्वास्थ्य उपकेंद्र में 394 ही पूर्ण रूप से कार्यरत
राज्य में कुल 13 अनुमंडल अस्पताल हैं जिसमें से 10 ही पूर्ण हैं. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र 136 हैं जिसमें 74 ही पूर्ण रूप से कार्यरत हैं. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 270 हैं जिसमें 152 ही पूर्ण रूप से कार्यरत हैं. वहीं 1119 स्वास्थ्य उपकेंद्र हैं जिसमें 394 ही पूर्ण रुप से कार्यरत हैं.




