
Ranjan Jha
Dhanbad: धनबाद का हक गोड्डा सांसद निशिकांत दूबे एक-एक कर छीनते जा रहे हैं, पर धनबाद के सांसद लाचार हैं. सिंह साहब की ढलती उम्र की तरह ही शारीरिक कमजोरी भी इसका कारण हो सकता है. लोग उन्हें आसानी से अपनी बात नहीं सुना सकते.
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अब करें क्या ‘चाहे जो मजबूरी है मोदी जरूरी है…’ इस नारे ने इनको एक बार फिर संसद पहुंचा दिया. अब तो लोगों के हिस्से रोना-धोना ही है. गोड्डा सांसद हैं कि अपने क्षेत्र को चमकाने के लिए धनबाद के हक पर लगातार हाथ साफ कर रहे हैं.
सब छीन कर ले गये
पीएन सिंह जब तक समझ पाते तब तक धनबाद से एयरपोर्ट छिन गया. जबकि यहां बलियापुर में एयरपोर्ट बनाने की योजना को लेकर बड़े अधिकारी आते-जाते रहे. हल्ला था कि धनबाद में एम्स खुलेगा और वह भी देवघर चला गया. दुरंतो एक्सप्रेस भी छीन कर निशिकांत ने मेन लाइन से भाया जसीडीह करवा लिया. दिल्ली के लिए धनबाद के लोग नयी ट्रेन की मांग कर रहे थे और हुआ उल्टा.
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हद तो तब हुई, जब डीसी लाइन बंद हुई. पीएन सिंह और गिरिडीह सांसद रवींद्र पांडेय ने इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाया. रेल मंत्री के सामने रोया गाया. इसके बाद रेलवे, कोयला मंत्रालय और कोल इंडिया के अधिकारियों ने लगातार दौरा किया अंततः बीते सप्ताह बड़े अधिकारियों ने अंतिम घोषणा कर दी कि डीसी रेल लाइन पर ट्रेन नहीं चल सकती. कहने का मतलब कि क्षेत्र के जन प्रतिनिधि जनता की इस बड़ी मांग को पूरा करने में अंततः विफल ही साबित हुए.
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शिक्षक पुरस्कार में भी लगा झटका
लगातार दूसरे साल झारखंड से राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार देवघर ने झटक लिया. यह महज संयोग नहीं है. यह निशिकांत के दबदबे का नतीजा है. धनबाद के एक प्राथमिक विद्यालय से चयनित शिक्षक को झारखंड से राष्ट्रीय शिक्षक के लिए चयनित तीन शिक्षकों में से सर्वाधिक अंक मिला था. राष्ट्रीय स्तर पर भी झारखंड के अन्य प्रतिभागी से इनका प्रदर्शन अच्छा था और कोई वजह नहीं थी कि इनको अवार्ड नहीं मिले. लेकिन निशिकांत की वजह से चमत्कार हुआ और अवार्ड लगातार दूसरे साल देवघर चला गया.
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गोपालपुर प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक अरविंद राज राजवारे को अवार्ड देने के लिए चयनित किया गया है. यह अलग बात है कि इस अवार्ड के लिए देशभर से चुनकर दिल्ली गये शिक्षक चयन की प्रक्रिया से क्षुब्ध हैं. पुरस्कार पानेवालों की सूची में वैसे शिक्षकों के भी नाम शामिल किए गये हैं, जिसने अपना पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन भी नहीं दिया. पुरस्कार के लिए पहले से कम शिक्षकों का चयन भी आक्रोश का कारण है.
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जहां तक झारखंड की बात है निशिकांत सारी सुविधाओं के साथ व्यक्तिगत लाभ भी अपने क्षेत्र के लोगों को दिलाने के लिए जिस तरह तत्पर हैं यह सोचने को मजबूर करता है कि क्या क्षेत्र के लिए इस तरह सोचनेवाला और सबकुछ छीन कर अपने क्षेत्र में बटोर लेनेवाला कोई दूसरा सांसद-विधायक है?




