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हत्या का आरोप दर्ज होने के बाद भी नहीं हुई थानेदार समेत चार पुलिस वालों की गिरफ्तारी, आरोपियों को मिल रहा प्रशासन का संरक्षण

Ranchi: कोडरमा जिले के डोमचांच में ढिबरा कारोबारी अर्जुन साव की मौत के मामले में डोमचांच थाना प्रभारी सहित चार पुलिसकर्मी के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया है. फिर भी आरोपियों की गिरफ्तारी क्यों नहीं हो रही? वारदात के बाद से इस मामले की चर्चा है. कारोबारी अर्जुन साव की मौत के करीब 48 घंटे बाद भी किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है. पुलिस जांच और साक्ष्य संकलन के नाम पर लेटलतीफी कर रही है. घटना के बाद हत्या का केस दर्ज होने पर जांच के बाद कार्रवाई की बात कही जा रही है. जबकि, हत्या के मामले में शायद ही ऐसी कोई बानगी हो, जब गिरफ्तारी के लिए साक्ष्य का इंतजार किया गया हो. विधि विशेषज्ञ कहते हैं कि गिरफ्तारी का यही मकसद होता है कि आरोपी सुबूतों को नष्ट न कर सके. प्रत्यक्षदर्शियों, गवाहों पर दबाव न बना सके और जांच को प्रभावित न कर सके. बावजूद इसके यह सब करने में सक्षम आरोपियों की गिरफ्तारी को शायद नजरअंदाज किया जा रहा है.

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पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने पर, छोड़ने का है प्रावधान

किसी भी अपराध में गिरफ्तारी करके जेल भेजे जाने के बावजूद अभियुक्त के खिलाफ तहकीकात में पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर उसे छोड़ा जा सकता है. कानूनविदों की यह आशंका थी कि ऐसे हालात कई बार बन सकते हैं. लिहाजा, बेगुनाह साबित हुए अभियुक्तों की जेल से रिहाई का प्रावधान सीआरपीसी की धारा 169 के तहत किया गया है. सीआरपीसी की धारा-169 पुलिस को यह अधिकार देती है कि वह साक्ष्य के अभाव में अभियुक्त को आरोप से बरी करवा सके. राज्य में ऐसे दर्जनों मामले पुलिस रिकॉर्ड में मिल भी जाएंगे, जब पुलिस ने धारा 169 का इस्तेमाल कर तफ्तीश में बेगुनाह प्रमाणित हुए आरोपियों को राहत दिलाई हो.

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क्या है मामला

मृतक ढिबरा व्यवसायी अर्जुन साव के पुत्र वीरेंद्र कुमार साव के आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज की गयी है. प्राथमिकी में बताया गया है कि 13 अप्रैल की सुबह 3:30 बजे उनके पिता रिश्तेदार के यहां जाने के लिए बाइक से निकले थे. इस दौरान नीरू पहाड़ी के पास बिना नंबर के वाहन पर आए थाना प्रभारी व अन्य पुलिस पदाधिकारियों ने उनके पिता के साथ मारपीट शुरू कर दी. वहां खड़े अन्य लोगों ने जब इसका विरोध किया, तो उनकी भी पिटाई की गयी. बाद में एक अन्य वाहन से चार पुलिसकर्मी आये और वे भी मारपीट करने लगे़ मारपीट के बीच ही चार-पांच ढिबरा वाहन वहां आया, तो थाना प्रभारी शशिकांत व सतीश पांडेय ने चार लाख रुपये लेकर उन्हें छोड़ दिया.

बाद में एक अन्य ढिबरा लोड वाहन आया, जिसे पुलिस पकड़ कर थाना ले गयी. मारपीट के दौरान इन लोगों ने मेरे पिता पर रॉड व बंदूक के कुंदा से वार किया. फिर ढोढाकोला की ओर दो किमी अंदर जंगल में ले जाकर मेरे पिता को जान से मार कर फेंक दिया. उनकी आंखें फोड़ दी. साक्ष्य मिटाने के लिए शव को जलाने की कोशिश की गयी. इससे पहले सतीश पांडेय ने मेरे पिता के पॉकेट से दस हजार रुपये भी निकाल लिया. नीरू पहाड़ी के पास खड़े लोगों ने पूरे वाक्या को देखा है. पुलिस ने धारा 302, 201 व 34 के तहत केस दर्ज किया है.

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