
♦भाजपा ने फर्जीवाड़े पर लगायी थी रोक
Ranchi : अल्पसंख्यक स्टूडेंट्स के स्कॉलरशिप घोटाले मामले पर भाजपा ने सीएम से सवाल पूछा है. प्रदेश भाजपा के अनुसार राज्य में पिछली सरकार ने छात्रवृत्ति के फर्जीवाड़े पर रोक लगायी थी. पर इसके बाद से हेमंत सरकार ने इस पर कोई कदम नहीं उठाया है. पार्टी कार्यालय में प्रदेश भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने बुधवार को कहा कि सीएम केवल राजनीतिक फायदे के लिए बयानबाजी कर गलत जानकारी दे रहे हैं. उपचुनाव से एक दिन पहले उन्होंने स्कॉलरशिप घोटाले पर जांच रिपोर्ट आने के पहले ही पूर्व की सरकार को दोषी ठहरा दिया. यह गलतबयानी है. स्कॉलरशिप मसले पर अपने कार्यकाल के 10 महीने में हेमंत सोरेन खाली हाथ बैठी रही. उसे इस पर लिये गये एक्शन के बारे में सबको बताना चाहिए.
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भ्रष्टाचार के लिए था जीरो टॉलरेंस
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि प्री मैट्रिक, पोस्ट मैट्रिक और मेरिट कम मींस अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं के लिए छात्रवृत्ति केंद्र सरकार देती है. नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल से डीबीटी के जरिये सीधे विद्यार्थियों के खाते में पैसा भेजा जाता है. इसमें संस्थानों द्वारा एवं संस्थान के अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं द्वारा पोर्टल पर सीधे अपनी सूचना एवं आवेदन की प्रविष्टि की जाती है. पूर्व में केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक मंत्रालय से प्राप्त पत्र एवं लाभुक की सूची के आलोक में राज्य सरकार की एजेंसी झारखंड राज्य अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम के द्वारा सभी जिला स्तरीय पदाधिकारियों से लाभुक संस्थानों एवं लाभुक छात्र-छात्राओं की जांच करायी गयी थी. इसके बाद 46,000 लाभुक संस्थानों की संख्या घट कर 3100 हो गयी थी. इसी प्रकार छात्र-छात्राओं के लगभग दो लाख आवेदन में से मात्र 95,000 को ही छात्रवृत्ति दी गयी थी. यह सब भाजपा के रघुवर सरकार द्वारा की गयी कार्रवाई के कारण ही हुआ. पिछली सरकार में भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस था.
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जिला कल्याण पदाधिकारियों से मंगाया था ब्योरा
केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के सचिव ने (पत्रांक संख्या 8-3/ 2019-SS, दिनांक 5 जुलाई 2019) राज्य सरकार को स्कॉलरशिप स्कीम के लाभुकों, संस्थाओं और विद्यालयों की जानकारी का सत्यापन करने को कहा था. स्कीम की नोडल एजेंसी झारखंड राज्य अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम है. उसने 5 से 10 जुलाई, 2019 के बीच 3 बार सभी जिला कल्याण पदाधिकारियों को पत्र लिखा था. जिलों में विद्यालयों, महाविद्यालयों, संस्थानों और अध्ययनरत छात्रों की जानकारी लेने का निर्देश दिया था. साथ ही उक्त संस्थानों में कुल कक्षाओं की संख्या, अध्ययनरत छात्रों की संख्या, अल्पसंख्यक छात्रों की संख्या, संस्थान को आवंटित यूजर आइडी, पासवर्ड एवं यूजर आइडी और पासवर्ड का उपयोग करनेवाले कर्मी का नाम और मोबाइल नंबर तथा दूसरी सूचनाएं मांगी थीं. गड़बड़ी की सूचना मिलने पर राज्य सरकार ने पहल की. झारखंड राज्य अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम ने कड़े कदम उठाये. इसके कारण 46000 संस्थानों में सिर्फ 3100 संस्थानों को मंजूरी दी गयी थी.
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