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क्या राज्यसभा चुनाव में गड़बड़ी मामले में पूर्व सीएम रघुवर दास को बचाया गया ! योगेंद्र साव को मैनेज करने का वीडियो हुआ था वायरल

Surjit Singh

Ranchi:  वर्ष 2016 में हुए राज्य सभा चुनाव में गड़बड़ी करने के मामले में सरकार ने दो दिन पहले सीआइडी के एडीजी अनुराग गुप्ता को निलंबित कर दिया है. इस मामले में जगन्नाथपुर थाना में जो प्राथमिकी दर्ज की गयी थी, उसमें अनुराग गुप्ता के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के राजनीतिक सलाहकार (बाद में प्रेस सलाहकार) अजय कुमार को आरोपी बनाया गया था.

बड़े ही आऱाम से पूरे मामले में रघुवर दास को बचा लिया गया था. जबकि घटनाक्रम में रघुवर दास भी शामिल थे और प्रथम दृष्टया वह भी वही काम कर रहे थे, जो काम अनुराग गुप्ता औऱ अजय कुमार कर रहे थे.

देखें वीडियो

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रघुवर को बचाने की शुरुआत बाबूलाल ने ही कर दी थी

रघुवर दास को बचाने का काम शुरू से ही किया गया. इसकी शुरुआत बाबूलाल मरांडी ने ही कर दी थी. उन्होंने जो शिकायत पत्र चुनाव आयोग से किया था, उसमें अनुराग गुप्ता और अजय कुमार के नाम का जिक्र तो था, लेकिन रघुवर दास के नाम का जिक्र नहीं था. जबकि तथ्य यह था कि जिस दौरान अजय कुमार भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में वोट करने के लिए योगेंद्र साव को मैनेज कर रहे थे. योगेंद्र साव को प्रलोभन दे रहे थे. उसी दौरान रघुवर दास ने योगेंद्र साव से एचइसी स्थित आवास में मुलाकात की थी. मुलाकात के दौरान अजय कुमार भी रघुवर दास के साथ ही योगेंद्र साव के घऱ पर गये थे. योगेंद्र साव तब के कांग्रेसी विधायक निर्मला देवी के पति हैं.

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वीडियो हुआ था वायरल

चुनाव के तुरंत बाद एक वीडियो वायरल हुआ था. उस वीडियो में रघुवर दास, अजय कुमार औऱ योगेंद्र साव तीनों दिखते हैं. योगेंद्र साव वीडियो में कह रहे हैं कि भाजपा की सरकार उन्हें परेशान कर रही है. उन पर और उनकी पत्नी पर केस किया गया. उन्हें तरह-तरह से प्रताड़ित किया जा रहा है. इस पर रघुवर दास कहते हैं कि सब ठीक हो जायेगा. सब ठीक कर देंगे. एक मुख्यमंत्री के रूप में रघुवर दास सब ठीक करने का वायदा किस वजह से कर रहे थे, इसे समझना बहुत मुश्किल काम नहीं है.

राज्यसभा चुनाव में भले कांग्रेस विधायक निर्मला देवी को मैनेज करने की कोशिश की गयी थी. भले ही निर्मला देवी के पति योगेंद्र साव ने बातचीत को रिकॉर्ड किया था. वीडियो रिकॉर्ड किया था. लेकिन मामले की शिकायत झारखंड विकास मोर्चा के प्रमुख बाबूलाल मरांडी समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग से की थी. उस वक्त भी रघुवर दास पर ध्यान नहीं दिया गया. मीडिया ने भी सवाल नहीं उठाया. करीब चार साल बाद वही बाबूलाल मरांडी 17 फरवरी को अपनी पार्टी का भाजपा में विलय रहे हैं.

जांच के दौरान भी रघुवर को बाहर रखा

शिकायत पर चुनाव आयोग ने मामले की जांच की. जांच के दौरान भी रघुवर दास को जांच के दायरे से बाहर रखा गया. बाद में चुनाव आयोग के निर्देश पर प्राथमिकी दर्ज की गयी, अनुराग गुप्ता और अजय कुमार के खिलाफ विभागीय कार्यवाही भी शुरू की गयी. प्राथमिकी की जांच के दौरान भी तत्कालीन मुख्यमंत्री को जांच के दायरे से बाहर ही रखा गया.

देखा जाये तो योगेंद्र साव, अनुराग गुप्ता, अजय कुमार, मंटू सोनी के बीच मोबाइल पर हुई बातचीत के साथ वायरल वीडियो एक ही कड़ी का हिस्सा है. लेकिन वायरल वीडियो के बारे में किसी भी स्तर से न तो सवाल उठाया गया और न ही जांच करनेवाले अधिकारियों ने उसकी जांच की. उस वक्त रघुवर दास मुख्यमंत्री थे और भाजपा में ताकतवर नेता माने जाते थे. समझा जा सकता है कि क्यों किसी ने रघुवर दास को जांच के दायरे में नहीं लाया. जबकि सभी घटनाएं राज्यसभा चुनाव के दौरान हुईं औऱ वोट मैनेज करने की कोशिश की गयी.

बहरहाल, अब रघुवर दास मुख्यमंत्री नहीं हैं. चुनाव में भी उनकी हार हुई. राज्य में नयी सरकार है. जिसने अनुराग गुप्ता को निलंबित करने यह संदेश देने की कोशिश की है कि इस मामले में वह कड़ी कार्रवाई करने का मंसूबा रखती है. ऐसे में राजनीतिक हलकों में इस बात की भी चर्चा है कि देर-सबेर मामले में पूर्व सीएम रघुवर दास को भी आरोपी बनाया जा सकता है.

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