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कल्याण विभाग में उठ रहे सवाल, बिना अधिकार कैसे काम कर रहे सलाहकार?

Ranchi: झारखंड सरकार का अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग, कल्याण विभाग इन दिनों सवालों के घेरे में है. अनुबंध पर कार्यरत (कान्ट्रेक्ट) सलाहकार ब्रजेश कुमार दास की सेवा 22 जनवरी 2020 को समाप्त हो चुकी है.

इसके बावजूद वह स्वत: कार्यमुक्त होने के बजाए नियमित तौर पर मुख्यालय में सेवा दे रहे हैं. विभागीय उदासीनता की वजह से उन पर अब तक फैसला नहीं लिया जाना सवालों के दायरे में है.

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अनाधिकृत तौर पर संचिका का अवलोकन

ब्रजेश दास की सेवा बनाये रखने लिए के मामले में अब तक सरकार के स्तर से कोई स्वीकृति प्रदान नहीं की गयी है. इस संबंध में संचिका लंबित पड़ी हुई है. बावजूद इसके ब्रजेश दास नियमित तौर पर विभाग में आकर संचिकाओं का अवलोकन कर रहे हैं. सरकारी सेवा नियमावली के अनुसार अनाधिकृत व्यक्ति किसी संचिका के अवलोकन, निरीक्षण के लिए सक्षम नहीं हो सकता.

यह दंडनीय अपराध है. इसके विपरीत श्री दास के मामले में विभागीय लापरवाही पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. जानकारी के अनुसार मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति ने मुख्यमंत्री के पास सेवा विस्तार के अनुमोदन हेतु संचिका भेजी है पर इस पर अब तक स्वीकृति नहीं मिली है.

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2017 में हुई थी सलाहकारों की नियुक्ति

कार्मिक विभाग की ओर से तीन वर्ष पूर्व सलाहकार के पदों पर पांच लोगों की नियुक्ति की गयी थी. राज्य सरकार (वित्त विभाग) के प्रावधानों के अनुसार उन्हें नियत मानदेय (नियुक्ति के समय तकरीबन एक लाख तीस हजार रुपये प्रतिमाह) का प्रावधान किया गया. पूर्णतः अनुबंध पर आधारित इस पद के लिए तीन साल की अवधि निर्धारित की गयी.

ब्रजेश दास ने 2017 में कल्याण विभाग (वर्तमान में अजजा, अजा, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग) में योगदान दिया. नियमानुसार उन्हें 22 जनवरी तक सेवा देनी थी और इसके बाद कार्यभार से मुक्त हो जाना था.

संज्ञान में मामला आने पर निर्णयः चंपई

विभागीय मंत्री चंपई सोरेन के अनुसार अभी उनके समक्ष यह मामला नहीं आया है. 14 फरवरी को भी विभागीय समीक्षा होगी. विभाग में मैनपावर की स्थिति का आकलन किया जायेगा. कोई अगर नियम विरुद्ध तरीके से काम कर रहा होगा तो उस पर समुचित वैधानिक निर्णय लिया जायेगा.

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