
- बच्चियों को घर ले जाने के नाम पर परिजनों को जेल में डालने की दी गयी धमकी
- मुख्यमंत्री के ट्वीट के बाद मामले ने तूल पकड़ा
Saurav/Chhaya
Ranchi: राज्य में बाल अधिकार के संरक्षण के लिए राज्य के सभी जिलों में बाल कल्याण समिति का गठन किया गया है.
गुमला जिले में काउंसेलिंग के नाम पर जबरन छह बच्चियों को सीडब्ल्यूसी में रखने का मामला सामने आया है. ये छह बच्चियां साल भर पहले ट्रैफिकिंग की शिकार हुई थीं.
पिछले साल जुलाई में इन छह बच्चियों को दिल्ली से रेस्कयू कर झारखंड लाया गया था. लगभग सात माह इन बच्चियों ने वहां काम किया.
मंगलवार को छह बच्चियां अपनी कुछ समस्याओं को लेकर अपने परिजनों के साथ गुमला डीसी से मिलने गयीं. जहां डीसी की ओर से बच्चियों और परिजनों को हर संभव मदद करने की बात कही गयी.
इसी दौरान सीडब्ल्यूसी के सदस्य भी मौजूद थे. डीसी से वार्ता के बाद सीडब्ल्यूसी की ओर से बच्चियों और उनके परिजनों पर दबाव बनाया गया कि बच्चियों की काउंसेलिंग की जायेगी.
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इसके लिए बच्चियों को चार दिनों तक किसी शेल्टर होम में रखा जायेगा. इस पर परिजनों और बच्चियों ने आपत्ति जतायी. परिजनों ने यहां तक कहा कि चार दिन तक बच्चियों समेत परिजन सीडब्ल्यूसी काउसेलिंग के लिए आयेंगे. लेकिन इसके बाद भी सीडब्ल्यूसी के पांचों सदस्य बच्चियों को जबरन शेल्टर होम में रखने की बात पर अड़े रहे.
इस दौरान सीडब्ल्यूसी सदस्यों, परिजनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच काफी बकझक भी हुई. सभी बच्चियां नाबालिग हैं.
सात माह पहले सिर्फ एक बच्ची की काउंसेलिंग हुई थी
छह बच्चियों को लगभग सात माह पहले रेस्कयू किया गया. उस वक्त सीडब्ल्यूसी गुमला की ओर से मात्र एक बच्ची की काउंसेलिंग की गयी. बच्चियों, परिजनों और समाजिक कार्यकर्ता ने सीडब्लयूसी सदस्यों से पूछा कि काउंसेलिंग तब क्यों नहीं की गयी. इस पर सीडब्ल्यूसी सदस्य मुआवजा राशि नहीं देने समेत अन्य धमकी देने लगे.
एक पीड़ित परिजन ने बताया कि सीडब्ल्यूसी सदस्यों की ओर से जेल भेजने तक की धमकी दी गयी. बता दें कि मुआवजा समेत अन्य मांग के लिए पीड़ित परिवार एसपी, डीसी से लेकर अलग-अलग स्तर पर प्रयासरत है.
इसके बाद पिछले मंगलवार को जनता दरबार में शिकायत की गयी. जिसके बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ट्वीट कर मामले पर संज्ञान लेने का आदेश दिया.
न्यूज विंग के पास सीडब्लयूसी सदस्यों की ओर से दी गयी धमकी का पुख्ता प्रमाण है.
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लिखित आवेदन के बाद छोड़ी गयी बच्चियां
परिजनों से जानकारी मिली कि सीडब्ल्यूसी के सदस्यों ने लिखित आवेदन लिया. जिसमें अभिभावक और बच्चियों का नाम दर्ज किया गया. साथ ही इसमें अभिभावकों से लिखवाया गया कि वे बच्चियों को अपनी जिम्मेवारी पर ले जा रहे हैं.
एक परिजन ने बताया कि सीडब्ल्यूसी सदस्यों की ओर से बच्चियों को जबरन शेल्टर होम में रखे जाने का दबाव बनाया गया. इस दौरान काफी बकझक भी हुई.
इस दौरान सामाजिक कार्यकर्ता भी मौजूद थे. सामाजिक कार्यकर्ता अर्पणा बाड़ा ने बताया कि इसके पहले बच्चियों से लगभग एक घंटे तक आवेदन लिखाने की कोशिश की गयी कि वे अपनी जिम्मेवारी से जा रही हैं.
इसका विरोध किया गया. जिसके बाद परिजनों से आवेदन लिखवाया गया. अर्पना बाड़ा ने बताया कि सीडब्ल्यूसी सदस्यों की ओर से जनता दरबार में शिकायत करने पर भी दबाव बनाया गया. काफी प्रयास के बाद परिजन और सामाजिक कार्यकर्ता बच्चियों को वापस घर ले गये.
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