
Ranchi: राज्य से 2025 तक टीबी उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार जोर दे रहा है. इस क्रम में बुधवार को राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम अंतर्गत सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी (सीएचओ) और वरीय उपचार पर्यवेक्षक (एसटीएस) के ट्रेनरों के लिए आयोजित ट्रेनिंग प्रोग्राम में चर्चा हुई. एसटीडीसी सभागार, नामकुम (रांची) में आयोजित तीन दिवसीय इस ट्रेनिंग प्रोग्राम में राज्य के 12 जिलों (बोकारो, चतरा, देवघर, जामताड़ा, खूंटी, धनबाद, दुमका, गढ़वा, गिरिडीह, गोड्डा, गुमला, हजारीबाग) के एचओ और एसटीएस शामिल हुए थे. ट्रेनिंग का उद्देश्य राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम के तहत सभी जिलों के आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में टीबी मरीजों की जांच और उपचार के लिए दी जाने वाली सुविधा के बारे में बताना है जिससे कि सुदूरवर्ती क्षेत्रों के मरीजों को अपने नजदीकी क्षेत्रों में ही संबंधित सुविधा उपलब्ध करायी जा सके. साथ ही अगले दो सालों के भीतर राज्य से टीबी के उन्मूलन में मदद मिले. प्रशिक्षण कार्यक्रम में राज्य यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ रंजीत प्रसाद, एसटीडीसी निदेशक डॉ ए मित्रा, डब्लूएचओ कंसल्टेंट डॉ प्रीतम घोष एवं डॉ अनुपमा टी एडवर्ड सहित अन्य भी उपस्थित थे. इस प्रोग्राम में WHP, JHPIEGO & UNION द्वारा तकनीकी सहयोग प्रदान किया गया है.
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