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दिव्यांग बच्चों के लिए बनाये गये नियमों का पालन नहीं करते राज्य के सीबीएसई मान्यता प्राप्त स्कूल

Ranchi: राज्य में सीबीएसई मान्यता प्राप्त स्कूल सीबीएसई नियमों का धड़ल्ले उल्लंघन करते हैं. यहां तक कि दिव्यांग बच्चों के लिए जो प्रावधान सीबीएसई की ओर से निर्देशित हैं, उनका पालन भी राज्य के स्कूल नहीं करते हैं. वर्तमान में राज्य में मात्र पांच ऐसे सीबीएसई मान्यता प्राप्त स्कूल हैं, जहां दिव्यांग बच्चों के लिए अलग से स्पेशल टीचर या एजुकेटर नियुक्त हैं. ये स्कूल है पिस्का मोड़ स्थित गुरु कृपा स्कूल,  सरला बिरला स्कूल, स्वामी विवेकानंद स्कूल, विद्या विकास पब्लिक स्कूल और बोकारो स्थित डीएवी स्कूल. जबकि राज्य में तीन सौ से भी अधिक सीबीएसई मान्यता प्राप्त स्कूल हैं. विगत दिनों राज्य निशक्तता आयुक्त कार्यालय में हुई बैठक में ये बातें सामने आयीं. इस संबंध में 13 जून 2017 को सीबीएसई की ओर से देश के सभी स्कूलों को दिशा-निर्देश भी दिया गया कि अनिवार्य रूप से स्कूलों में दिव्यांग बच्चों के लिए स्पेशल एजुकेटर की नियुक्ति की जाये.

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बच्चे नहीं होने के कारण स्कूल नहीं रखते शिक्षक

न सिर्फ सीबीएसई बल्कि शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 में भी यह निर्देशित है कि स्कूलों को दिव्यांग बच्चों के लिए अलग से एजुकेटर नियुक्त जायें. इन विशेष बच्चों को सामान्य स्कूलों में सामान्य बच्चों के साथ ही शिक्षा देने का प्रावधान है. लेकिन इसके लिए विशेष शिक्षक उनकी जरूरतों का ध्यान रखेंगे. इन मापदंडों को देखा जाये तो राज्य के अधिकतर स्कूल इन निर्देशों का पालन नहीं करते. कुछ स्कूलों में बात करने से जानकारी हुई कि विशेष बच्चे नामाकंन लेते ही नहीं, ऐसे में स्पेशल एजुकेटर नियुक्त नहीं किये जाते हैं. जबकि कुछ स्कूल संचालकों का कहना है कि ऐसे बच्चे नामाकंन तो लेते है लेकिन कुछ समय के बाद स्कूल छोड़ देते हैं. ऐसे में सामान्य शिक्षक ही ऐसे बच्चों को पढ़ाते हैं.

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क्या होनी चाहिए योग्यता

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा नियमावली के अनुसार कक्षा एक से पांच और कक्षा छह से आठ तक नियुक्त होने वाले स्पेशल एजुकेटरों के लिए अलग-अलग योग्यता तय की गयी है. जिसमें पचास प्रतिशत अंकों के साथ उच्च शिक्षा और बीएड या डीएलएड विशेष शिक्षा योग्यता तय की गयी है. वर्तमान में राज्य में सामान्य शिक्षक ही इन शिक्षकों की भूमिका निभा रहे हैं. स्पेशल एजुकेटरों की कमी होने के कारण सीबीएसई मान्यता प्राप्त और न ही सरकारी स्कूल में दिव्यांग बच्चे नामाकंन ले पाते हैं. इस संबंध में दिव्यांग बच्चे अभिभावक संघ और प्रशिक्षित विशेष शिक्षक संघ के पावेल ने कहा कि इन स्कूलों में पांच प्रतिशत विशेष बच्चों का नामाकंन किया जाना है, लेकिन ये भी नहीं हो पाता.

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद् ने भी दिया है निर्देश

इस मामले में 12 जुलाई 2019 को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद् की ओर से राज्य निशक्तता आयुक्त और प्राथमिक शिक्षा निदेशक के नाम भी पत्र जारी किया गया. राज्य में संचालित स्कूलों में स्पेशल एजुकेटर नियुक्त किये जायें. जिसके बाद राज्य निशक्तता आयुक्त ने प्राथमिक शिक्षा निदेशक को सरकारी स्कूलों में पोस्ट सृजित स्पेशल शिक्षक नियुक्त करने की बात की. इस संबध में राज्य निशक्तता आयुक्त सतीश चंद्रा ने कहा कि सीबीएसई की ओर से भी स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि स्पेशल एजुकेटर नियुक्त किये जायें. जिस पर कार्रवाई की जा रही है. स्कूलों को एजुकेटर नियुक्त करने का निर्देश दिया गया है. साथ ही प्राथमिक शिक्षा निदेशक को भी पत्र लिखा गया है. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समावेशी शिक्षा पर ध्यान दिया जाये. ऐसे में स्कूलों में स्पेशल एजुकेटर की नियुक्ति पर काम किया जा रहा है.

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