Chatra

मगध-आम्रपाली कोल परियोजनाः कॉरपोरेट घराना अब छीन रहा स्थानीय लोगों का रोजगार

Chatra: चतरा के टंडवा स्थित मगध व आम्रपाली कोल परियोजना अब स्थानीय लोगों, खास कर ट्रांसपोर्ट कारोबार के लोगों के लिये मुसीबत बनती जा रही है.

आरोप है कि कॉरपोरेट घरानों की वजह से ट्रांसपोर्ट उद्योग से जुड़े लोग सड़क पर आ जाने को मजबूर हैं. कॉरपोरेट घरानों का विरोध करने पर उन्हें धमकाया भी जा रहा है.

इसके विरोध में जिला ट्रक ओनर एसोसिएशन के पदाधिकारी व सदस्यों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस मामले में हस्तक्षेप करें. स्थानीय ट्रांसपोर्टरों की मदद करें.

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ताकि उनके सामने जीवन यापन की समस्या उत्पन्न ना हो जाये और बैंक लोन नहीं दे पाने की स्थिति में बर्बादी के कगार पर ना पहुंच जाये. इसकी जानकारी एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रह्लाद कुमार ने दी है.

अपने बयान में प्रह्लाद कुमार ने कहा है कि चतरा जिला उग्रवाद प्रभावित जिला रहा है. सरकार के प्रयास से इस पर अंकुश लगा है. इस जिले में रोजगार का अभाव था.

भारत सरकार के प्रयास से 2014 में सीसीएल की आम्रपाली एवं 2015 में मगध परियोजना शुरु की गई. स्थानीय बेरोजगार लोगों ने रोजगार के लिये कर्ज लेकर ट्रक व हाइवा खरीदा.

दुर्भाग्य की बात है कि आज न तो हमारी गाड़ी चल पा रही है और न ही उचित भाड़ा मिल पा रहा है. आज कॉरपोरेट घराना बाहर से अपनी-अपनी गाड़ी लाकर ट्रांसपोर्टिंग का काम कर रहा हैं.

मुख्यमंत्री महोदय ने भी केरेडारी व बालूमाथ में सार्वजनिक रूप से कहा था कि पहले लोकल गाड़ियां चलेंगी, उसके बाद बाहर की गाड़ियां चलेंगी.

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लेकिन आज उल्टा हो गया है. क्या मुख्यमंत्री रघुवर दास की सार्वजनिक मंच से की गई घोषणा एक छलावा थी? आज हमारी डबल इंजन की सरकार है. चतरा में हमारे सांसद-विधायक हैं. फिर भी हमारी ये स्थिति है.

आज जो आधुनिक कंपनी कल तक 1400 रुपया प्रति टन भाड़ा दे रही, वह अब 1100 के भाड़े में गाड़ी लगाना चाहती है. और जब स्थानीय ट्रक-हाइवा मालिक इसका विरोध करते हैं, तो कंपनी के ट्रांसपोर्टर, प्रशासन की धमकी दे रहे हैं.

आज चतरा जिला में लगभग 2500 व्यवसायिक वाहन है. गत लोकसभा चुनाव में वाहन मालिकों ने तन, मन व धन से भाजपा को स्पोर्ट किया. फिर भी यह सब देखना पड़ रहा है.

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