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राज्य के 56% सरकारी व 80% सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में नहीं है शिक्षक-छात्र का सही रेश्यो

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Ranchi: झारखंड में प्राइमरी और मीडिल स्कूलों की संख्या 30 हजार से अधिक है. इन स्कूलों में लगभग तीन लाख से अधिक स्टूडेंट्स पढ़ाई कर रहे हैं. लेकिन इन स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों पर विद्यार्थियों का बोझ देश के किसी भी दूसरे राज्य के मुकाबले सबसे ज्यादा है.

केंद्रीय मानव संसाधन विकास विभाग मंत्री रमेश पोखरियाल ने राज्य सभा में दिये आंकड़ों में बताया कि झारखंड में 55.5 फीसदी सरकारी स्कूल और 80.2 फीसदी सरकार सहायता प्राप्त स्कूल ऐसे हैं, जो आरटीई के नियम के अनुसार शिक्षक छात्र अनुपात को पूरा नहीं करते हैं.

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शिक्षक-छात्र अनुपात की कमी में झारखंड देश में दूसरे स्थान पर

स्कूलों के शैक्षणिक मामलों पर काम करने वाली एमएचआरडी की सहयोगी संस्थान यू-डाइज के आंकड़े बताते हैं कि शिक्षक-छात्र अनुपात में कमी के मामले में झारखंड 36 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में दूसरे स्थान पर है. झारखंड में एक शिक्षक पर 60 स्टूडेंट्स का बोझ है. जो की ज्यादा है. इसी के अनुसार झारखंड को शिक्षक-छात्र अनुपात मामले में दूसरे स्थान पर रखा गया है.

झारखंड से एक पायदान ऊपर हिंदी पट्टी का राज्य बिहार ही है. बिहार में 72.1 प्रतिशत सरकारी और 81.08 प्रतिशत सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में एक शिक्षक पर छात्रों का बोझ ज्यादा है. शीर्ष पांच राज्यों की बात करें तो पहले स्थान पर बिहार, दूसरे स्थान पर झारखंड, तीसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश, चौथे स्थान पर मध्य प्रदेश और पांचवें स्थान पर उत्तरांचल है.

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क्या कहती है आरटीई

शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 में प्राइमरी और मीडिल स्कूलों के लिए छात्र-शिक्षक अनुपात के बारे बताया गया है. इसके अनुसार प्राइमरी स्तर पर 30 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक होने चाहिए.

मीडिल स्तर पर 35 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक होना चाहिए. वहीं यू-डाइज के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर प्राइमरी स्कूलों में औसतन एक शिक्षक पर 23 छात्र और मीडिल स्कूलों में एक शिक्षक पर 24 छात्र हैं, जो औसतन सही है.

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2016 में नियुक्त हुए थे मात्र 15,698 शिक्षक

शिक्षक-छात्र रेश्यो को बैलेंस करने के लिए शिक्षकों की नियमित नियुक्ति होना जरूरी है. लेकिन झारखंड में ऐसा नहीं है. प्राइमरी और मीडिल स्तर पर चार साल पहले साल 2016 में ही नियुक्ति हुई थी. तब 15,698 शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी.

इसमें क्लास एक से पांच के स्कूलों में 12,486 और क्लास छह से आठ के स्कूलों में 3,212 शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी. जबकि शिक्षक बनने की पात्रता के लिए हुई जेटट में 2016 की टेट परीक्षा में क्लास एक से पांच में 16,530 अभ्यर्थी और क्लास छह से आठ में 36,307 अभ्यर्थी पास हुए हैं.

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