
Akshay Kumar Jha
Ranchi: सात मई 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्यंमंत्रियों को आजीवन सरकारी आवास दिए जाने पर फैसला सुनाया. कोर्ट ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगले खाली करने होंगे.
सुप्रीम कोर्ट ने यूपी में पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी आवास दिए जाने वाले कानून को रद्द कर दिया और कहा कि यह संविधान के खिलाफ है. यह कानून समानता के मौलिक अधिकार के खिलाफ है और मनमाना है.
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झारखंड में इस मामले को लेकर दिवंगत आरटीआइ कार्यकर्ता दिवान इंद्रनील सिन्हा ने जनहित याचिका (पीआइएल) दायर की. पीआइएल पर सुनवाई के दौरान तत्कालीन रघुवर सरकार की तरफ से सात नवंबर 2018 को जवाब दिया गया. सरकार ने अपने जवाब में कहा कि सुप्रीम कोर्ट का पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवास और अन्य सुविधाएं ना दिए जाने का आदेश पूरी तरह से लागू है.
लिहाजा सरकार पूर्व मुख्यमंत्रियों के आवास को खाली कराने का काम कर रही है. लेकिन डेढ़ साल बीतने के बाद भी सरकार ने राज्य में किसी भी पूर्व मुख्यमंत्री का आवास खाली नहीं कराया. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्रियों में बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा और मधु कोड़ा सरकारी बंगले का लाभ ले रहे हैं. वहीं पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को सरकार की तरफ से झारखंड आंदोलनकारी की हैसियत से सरकारी बंगला आवंटित किया गया है.
पूर्व सीएम रघुवर दास भी कर रहे हैं सरकारी आवास की मांग
2019 के विधानसभा चुनाव में हार का मुंह देखने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मुख्यमंत्री आवास छोड़ दिया. वो मंत्री और विधायक की हैसियत से मिले धुर्वा सेक्टर तीन में आवास संख्या एफ-33 में शिफ्ट कर गए. लेकिन विधानसभा सचिवालय की तरफ से उन्हें दो बार उस आवास को खाली करने का नोटिस दिया जा चुका है.
वहीं रघुवर दास ने सरकार को पूर्व मुख्यमंत्री की हैसियत से मिलने वाले सरकारी आवास के लिए आवेदन दिया है. भवन विभाग ने आवेदन को सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए फाइल मौजूदा मुख्यमंत्री के टेबल पर पहुंचा दी है. लेकिन इस बाबत हेमंत सरकार की तरफ से किसी तरह का कोई फैसला नहीं लिया गया है.
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राजपत्रित आवास बोर्ड की बैठक में भी इस मामले को नहीं रखा गया. ऐसे में मौजूदा सरकार के रघुवर दास को आवास देने के संबंध में उनका स्टैंड समझा जा सकता है. वहीं पूर्व मुख्यमंत्रियों को दिए गए सरकारी बंगले को वापस लेने के लिए किसी तरह की कोई कार्रवाई ना करना भी हेमंत सरकार पर सवाल खड़ा करता है.
सरयू राय ने भी सुप्रीम कोर्ट का फैसला हेमंत को याद कराया
याचिका 657/2004 में सर्वोच्च न्यायालय का आदेश :- पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवास एवं अन्य सुविधायें सरकार नहीं दे. तत्कालीन सरकार ने जनहित याचिका 4509/2016 में 7.9.2018 को हाईकोर्ट को जवाब दिया है कि यह निर्णय झारखंड में लागू है. CM @HemantSorenJMM इसपर ध्यान दें और ध्यान दिलायें. pic.twitter.com/wNPvUQYR9M
— Saryu Roy (@roysaryu) February 8, 2020
सरयू राय ने इस मामले को लेकर एक ट्विट किया है. उन्होंने अपने ट्विट में लिखा है कि “याचिका 657/2004 में सर्वोच्च न्यायालय का आदेश है कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवास एवं अन्य सुविधायें सरकार नहीं दें. तत्कालीन सरकार ने जनहित याचिका 4509/2016 में 7.9.2018 को हाईकोर्ट को जवाब दिया है कि यह निर्णय झारखंड में लागू है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इसपर ध्यान दें और ध्यान दिलायें”. कहा जा रहा है कि सरयू राय ने पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास को लेकर ऐसा ट्विट किया है.
हेमंत, बाबूलाल और मधु कोड़ा पर भी गिरी थी गाज
जब दिवंगत दिवान इंद्रनील सिन्हा ने हाईकोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्रियों के आवास को लेकर जनहित याचिका दायर की थी तो हेमंत सोरेन पूर्व मुख्यमंत्री की हैसियत से सरकारी आवास में थे. कोर्ट में मामला जाते ही उन्होंने सरकारी आवास को नेता प्रतिप्रक्ष के नाम पर आवंटित करने का अनुरोध किया.
भवन विभाग ने उनके अनुरोध पर उनके सरकारी आवास को नेता प्रतिपक्ष के नाम पर आवंटित किया. वहीं बाबूलाल मरांडी ने गरमाए माहौल को देखते हुए मोरहाबादी स्थित अपना सराकरी आवास कुछ दिनों के लिए छोड़ दिया था. ठंढे बस्ते में बात जाते ही वो दोबारा से सरकारी आवास में शिफ्ट कर गए.
वहीं मधु कोड़ा ने अपने सरकारी आवास को अपनी विधायक पत्नी के नाम पर आवंटित करने का अनुरोध किया. विभाग ने पूर्व विधायक गीता कोड़ा के नाम पर आवास आवंटित कर दिया. लेकिन 2019 में गीता कोड़ा सांसद बन गयी.
लिहाजा एक बार फिर से मधु कोड़ा का सरकारी आवास अवैध रूप से रहने वालों की श्रेणी में आ गया. वहीं अर्जुन मुंडा जिस तरह से पूर्व मुख्यमंत्री रहते हुए सरकारी आवास का लाभ ले रहे थे, लगातार ले रहे हैं.
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