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बिजली खरीद में फूंक दिया 20 हजार करोड़, अब कोयले की कमी, झारखंड के सात जिलों में ब्लैकआउट के हालात

डीवीसी से 300 मेगावाट कम बिजली, डीवीसी सहित तीन पावर प्लांट को हर दिन चाहिये 43 हजार टन कोयला

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Ravi Bharti

Ranchi : राज्य में पावर हब बनाने का सपना हकीकत से कोसों दूर नजर आ रहा है. राज्य गठन के बाद से अब तक निजी और सेंट्रल सेक्टर से बिजली खरीद में 20 हजार करोड़ रुपये फूंके जा चुके हैं. इतने में 3500 मेगावाट का पावर प्लांट लग जाता. हर दिन 375 से 400 करोड़ की बिजली खरीदी जाती है. केंद्रीय विद्युत प्राधिकारण की गाइडलाइन के अनुसार एक मेगावाट में लगभग छह करोड़ रुपये का खर्च आता है. फिलहाल डीवीसी के पावर प्लांट में कोयले की कमी हो गई है.

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डीवीसी के प्लांट को बिजली उत्पादन के लिये हर दिन 24 हजार टन कोयले की जरूरत है. फिलहाल डीवीसी को 10 हजार टन कोयला कम मिल रहा है. डीवीसी अपने कमांड एरिया के सात जिले हजारीबाग, बोकारो, धनबाद, रामगढ़, गिरिडीह, गढ़वा और कोडरमा में औसतन हर दिन 800 मेगावाट बिजली की आपूर्ति करता है. कोयले की कमी के कारण सिर्फ 500 मेगावाट ही बिजली आपूर्ति की जा रही है. 300 मेगावाट की कमी है. वहीं कोयले की कमी के कारण टीवीएनएल के एक ही यूनिट से बिजली का उत्पादन हो रहा है.

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डीवीसी कमांड एरिया को छोड़कर भी 300 मेगावाट की कमी

डीवीसी कमांड एरिया को छोड़कर भी राज्य के अन्य जिलों में लगभग 300 मेगावाट बिजली की कमी है. प्रदेश में शुक्रवार को 844 मेगावाट बिजली ही उपलब्ध रही. जबकि सामान्य दिनों में 1100 से 1150 मेगावाट बिजली की जरूरत होती है. राज्य के निजी व सरकारी पावर प्लांटों से सिर्फ 235 मेगावाट बिजली मिली. जबकि सेंट्रल एलोकेशन से 609 मेगावाट बिजली मिली.

राजधानी सहित सभी जिलों में लोड शेडिंग

डीवीसी कमांड एरिया के सातों जिलों में आठ से नौ घंटे तक की लोड शेडिंग (बिजली की कटौती) की जा रही है. वहीं राजधानी सहित अन्य जिलों में तीन से चार घंटे तक की बिजली की कटौती की जा रही है. एक घंटा में एक मेगावाट बिजली उत्पादन के लिये एक टन कोयले की जरूरत होती है. अगर 24 घंटे 1000 मेगावाट का प्लांट चले तो 24 हजार टन कोयले की जरूरत होगी.

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कर्ज में डूबा वितरण निगम, उधार में ली 6450 करोड़ की बिजली

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बिजली वितरण निगम पूरी तरह से कर्ज में डूब गया है. अब तक बिजली वितरण निगम का कर्ज बढ़कर 6450 करोड़ हो गया है. इसमें टीवीएनएल का बकाया 3100 करोड़ है. और डीवीसी का बकाया 3700 करोड़ था, जिसमें डीवीसी को सिर्फ 350 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है. वहीं वितरण निगम हर माह लगभग 400 करोड़ की बिजली खरीदता है, जबकि राजस्व वसूली सिर्फ 230 से 235 करोड़ की है. इस हिसाब से भी वितरण निगम को हर माह 165 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है.

इन पावर प्लांटों से नहीं मिली बिजली

प्लांट का नाम       जगह                     क्षमता             राज्य का हिस्सा                       कब शुरू होना था

अभिजीत             लातेहार            1740मेगावाट          430                                     2012(शुरू नहीं)
एस्सार                लातेहार             2000मेगावाट          300                                     2013(शुरू नहीं)
आधुनिक            सरायकेला          540 मेगावाट          134                                      (एक यूनिट चालू)
जिंदल                पतरातू              1080 मेगावाट          270                                     2014(शुरू नहीं)
रिलायंस             तिलैया               4000 मेगावाट         1000                                    मामला लंबित

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किस पावर प्लांट में प्रतिदिन कितने कोयले की खपत

  • टीवीएनल- 7000 टन
  • डीवीसी- 24000 टन
  • आधुनिक- 10 हजार टन
  • इंलैंड- 2000 टन

शुक्रवार को क्या रही पावर की स्थिति

  • टीवीएनएल-163 मेगावाट
  • सीपीपी-18 मेगावाट
  • इंलैंड पावर- 54 मेगावाट
  • आधुनिक-125 मेगावाट
  • एसइआर- 46 मेगावाट

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