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BJP कार्यसमिति की बैठक में प्रदेश अध्यक्ष और आशा लकड़ा से ज्यादा तरजीह मिस्फिका को

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Akshay Kumar Jha

Ranchi : यह कहानी उस पार्टी की है जो देश ही नहीं दुनिया की सबसे बड़ी और अनुशासित पार्टी होने का दावा करती है. यह उस राज्य की कहानी है जहां के मुखिया केंद्र के मुखिया की हर योजना और स्टाइल को कॉपी करने में कतई पीछे नहीं रहते हैं. ऐसा राजनीतिक पंडितों का मानना है. ऐसा करना विकास के लिए शायद एक अच्छा संकेत हो सकता है ? लेकिन पार्टी वसूलों को दरकिनार कर खुद को सिंगल मैन आर्मी समझना पार्टी के लिए अच्छी खबर नहीं है. बीजेपी झारखंड कार्यसमिति की बैठक राजधानी रांची के डिबडीह स्थित कार्निवल बैंक्वेट हॉल में आयोजित की गयी थी. प्रदेश के पदाधिकारी और कार्यसमिति के पदाधिकारी बैठक में हिस्सा लेने आए थे. लेकिन वहां दो घंटे के अंदर जो हुआ, वो बीजेपी के लोगों के बीच एक गॉसिप का इश्यू हो गया है. वहां मौजूद कुछ पदाधिकारियों का कहना है कि ऐसा करने से कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटता है.

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पार्टी अध्यक्ष को किया किनारा

जाहिर तौर पर किसी भी पार्टी में पार्टी का मुखिया पार्टी अध्यक्ष होता है. लेकिन ऐसा झारखंड बीजेपी में होता दिखायी नहीं दे रहा है. 15 सितंबर को कार्यसमिति की बैठक में पदाधिकारियों की बैठने का जो सिस्टम था, वो सवालों के घेरे में है. केंद्र की कार्यसमिति की बैठक की तस्वीरों में भी देखा जाता है कि पार्टी अध्यक्ष सेंटर में बैठे होते हैं और पार्टी की अध्यक्षता कर रहे होते हैं. लेकिन झारखंड में कार्यसमिति की बैठक में सूबे के मुखिया रघुवर दास के लिए जो बैठने का अरेंजमेंट था, वो कार्यसमिति की बैठक के हिसाब से गलत था. सीएम को बिलकुल बीच में सोफे पर बैठाया गया. वहीं पार्टी अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ किनारे बैठे हुए थे. सुरक्षा का हवाला देते हुए रघुवर दास से दूसरे पदाधिकारी करीब दो फीट की दूरी पर बैठे हुए थे. जबकि प्रधानमंत्री भी ऐसा नहीं करते. पार्टी की बैठक में वो एक आम पार्टी के पदाधिकारी की ही तरह शामिल होते हैं. लेकिन रघुवर दास पूरे बैठक में अनौपचारिक रूप से अध्यक्ष की भूमिका में दिखे.

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और जब आशा लकड़ा को सीएम ने चुप कराया

प्रदेश प्रवक्ता मिस्फिका
प्रदेश प्रवक्ता मिस्फिका
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रांची की मेयर आशा लकड़ा के राजनीतिक जीवन की बात करें तो वो एवीबीपी से जुड़ने के बाद बीजेपी की सक्रिय कार्यकर्ता रहीं. सालों तक पार्टी में अपना पूरा सहयोग दिया. इस बात में कोई शक नहीं कि एक मुखिया के मुकाबले वो काफी बड़ी शख्सियत हैं. वो दूसरी बार रांची मेयर की भूमिका में हैं. 15 सिंतबर को रही कार्यसमिति की बैठक में पदाधिकारियों की तरफ से तैयार किया हुआ प्रस्ताव लाने की जब बारी आयी तो मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा ने प्रस्ताव रखा. प्रस्ताव शिक्षा से जुड़ा हुआ था. अब बारी थी उस प्रस्ताव में संशोधन के लिए प्रस्ताव लाने की. कार्यसमिति की सदस्य होने के नाते आशा लकड़ा ने संशोधन प्रस्ताव के लिए बोलना शुरू किया. लेकिन चंद सेकेंड के बाद सीएम की तरफ से उन्हें चुप हो जाने को कहा गया. उन्होंने कहा कि अब छोटी-मोटी बात पर इतना लंबा बोलने की जरूरत नहीं.

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और मिस्फिका को मिला पूरा मौका

तेज-तर्रार और पढ़ी लिखी छवि वाली मिस्फिका झारखंड की पहली ऐसी मुखिया हैं जिन्होंने महज तीन साल में ही संथाल से रांची तक का सफर तय कर लिया है. रांची की मेयर आशा लकड़ा को चुप कराने के तुरंत बाद बैठक में नयी-नयी प्रदेश प्रवक्ता बनीं मिस्फिका को तीन तलाक और मुस्लिम मामलों पर बोलने के लिए सीएम ने मौका दिया. अपनी पूरी बात उन्होंने खत्म की. इसी बीच वहां बैठे पदाधिकारियों के बीच बात होने लगी. दबी जुबान में ही सही लेकिन पादाधिकारियों ने इस बात का विरोध किया. कहा जाने लगा कि नए पदाधिकारी को इतना मौका दिया जा रहा है और पुराने कार्यसमिति की सदस्य को चुप हो जाने को कहा जाता है.

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