
Ranchi : झारखंड में 24 घंटे बिजली देने का एक्शन प्लान कागजों में ही सिमट गया है. पूरा प्लान 14 हजार करोड़ रुपये का है. इस प्लान को केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय भी स्वीकृति दे चुका था. प्लान के मुताबिक दिसंबर 2018 तक पूरे प्रदेश में 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की बात कही गई थी. इसका डीपीआर बनाने में एक करोड़ रुपये से भी अधिक खर्च किये गये. इसके बाद इसे केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के पास स्वीकृति के लिये भेजा गया. केंद्रीय ऊर्जा मंत्री ने इस प्लान को स्वीकृति भी दी.
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ट्रांसमिशन लाइन में 9000 करोड़ खर्च करने की बात
एक्शन प्लान के मुताबिक ट्रांसमिशन लाइन में 9000 करोड़ और वितरण व्यवस्था में 5000 करोड़ खर्च किया जाना है.प्लान को देखते हुये कई औद्योगिक घराने एमओयू भी कर चुके हैं. ऐसे में उद्योगों को बिजली देना भी चुनौती बन गई है. जबकि एक्शन प्लान में बढ़ती आबादी और औद्योगिक विस्तार पर फोकस किया गया है.
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डीवीसी कमांड एरिया में छाया है अंधेरा
एक्शन प्लान के मुताबिक, डीवीसी कमांड एरिया में अपनी वितरण नेटवर्क तैयार करने की भी बात है. कमांड एरिया में चतरा, गिरिडीह, कोडरमा, धनबाद, बोकारो, रामगढ़ और हजारीबाग आता है. फिलहाल इन जिलों में डीवीसी बिजली की आपूर्ति कर रहा है.
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2019 में 5500 मेगावाट बिजली की जरूरत
प्लान के मुताबिक, 2019 तक 5,500 मेगावाट बिजली की जरूरत होगी. जबकि वर्तमान में पांचों लाइसेंसी मिलकर 3255 मेगावाट ही बिजली की आपूर्ति कर रहे हैं. जो मांग के 18.5 फीसदी कम ही है.
ऐसे तय किया गया है प्लान में बिजली की मांग
वर्ष कितनी मांग(मेगावाट) कितनी उपलब्ध रहेगी बिजली(मेगावाट)
2016 3706 3800
2017 4376 4400
2018 4987 5050
2019 5696 5700
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इन एमओयू और एलोकेशन से ऐसे मिलनी है बिजली
कंपनी – संस्था कितना मेगावाट
दारीपल्ली 500
गजमारा 500
गजमारा टू 500
तालचेर 300
बाढ़ 202
बाढ़ टू 80
बोंगाई गांव 100
नवीनगर 60
नॉर्थकर्णपुरा 396
कांटी 12
तिलैया 1000
टांटिया 165
हाइड्रो प्लांट से ऐसी मिलनी है बिजली
कंपनी मेगावाट
तिपाईपुख 300
बीएसएचपीसी 09
दिबांग 1000
एचइपी 12.79
एचइपी 85.97
तिस्सा 46
ऐसे बनाना था चार साल में ट्रांसमिशन लाइन
वर्ष सर्किट किलोमीटर
2016 2297
2017 1018
2018 2004
2019 13558
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कौन कंपनी कितनी करती है बिजली आपूर्ति
कंपनी का नाम मेगावाट
डीवीसी 946
जूस्को 43
टाटास्टील 435
सेल बोकारो 21
बिजली वितरण निगम 1900 से 2000
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जानिये बिजली कंपनियों का सच
राज्य के एकमात्र पावर प्लांट से सिर्फ 170 मेगावाट ही उत्पादन
हर दिन 400 करोड़ की खरीदी जा रही बिजली
आधा दर्जन ट्रांसमिशन लाइन का नहीं हो पाया निर्माण
18 लाख परिवारों को अब तक नहीं मिली है बिजली
तीन अल्ट्रा मेगा पावर प्लांट अधर में
पतरातू से बिजली उत्पादन शुरू होने में कम से कम तीन साल का समय लगेगा
तिलैया प्लांट की रिबिडिंग नहीं हुई है.
देवघर प्लांट का जमीन अधिग्रहण नहीं हुआ है.




