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पाकुड़ में मनरेगा घोटाला : शिबू सोरने के नाम पर 1,08,864 रुपये की अवैध निकासी

लिट्टीपाड़ा प्रखंड स्थित कमलघाटी पंचायत की 19 मनरेगा योजनाओं में की गयी 8,33,794 रुपये की अवैध निकासी, 347 कार्यदिवस की मजदूरी भी हड़प ली गयी

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Ranchi/Pakur : राज्य के पाकुड़ जिला, जो अवैध क्रशर, खनन, बालू चोरी और राजस्व चोरी के साथ-साथ मवेशी तस्कारी का अड्डा बना हुआ है, वहां गरीबों को रोजगार उपलब्ध करानेवाली मनरेगा योजना में भ्रष्टाचार चरम पर है. मनरेगा योजना के होने के बाद भी जिला से एक ओर पलायन जारी है, तो दूसरी ओर मनरेगा योजना में गबन प्रमाणित हो जाने के बाद भी प्रति योजना 100 रुपये जुर्मना लगाकर संबंधित कर्मचारियों को भविष्य में ऐसी गलती न करने की दिायत देकर छोड़ दिया जा रहा है. इसका परिणाम यह सामने आ रहा है कि मनरेगा योजना में गबन बदस्तूर जारी है. लिट्टीपाड़ा प्रखंड स्थित कमलघाटी पंचायत की 19 मनरेगा योजनाओं में 8,33,794 रुपये की अवैध निकासी कर ली गयी है.

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बिंझा गांव के शिबू सोरेन के नाम  पर स्वीकृत योजना में हुई लूट

कमलघाटी पंचायत के बिंझा गांव निवासी शिबू सोरेन के नाम एक नहीं, दो डोभा निर्माण योजना स्वीकृत की गयी थी. इन योजनाओं में सरकारी कर्मी की मिलीभगत से बिना कार्य किये अभिलेख तैयार कर दो योजना की 1,08,864 रुपये की निकासी कर ली गयी. शिबू सोरेन के नाम से कागजों में डोभा योजना स्वीकृत की गयी, जिसका योजना कोड 34140 030 081 / IF / 70809 01081 388 एवं दूसरा डोभा योजना का कोड 3414003008 / IF / 7080901069150 स्वीकृत कर मनरेगा की राशि लूटी गयी.

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आदिम जनजातियों के नाम पर बनी योजना में भी लूट चरम पर

मदन पहाड़िया की जमीन पर डोभा निर्माण की योजना स्वीकृत हुई थी, जिसका योजना कोड 3414003008/ WC/7080901049271 था. एक डोभा की राशि हड़प लेने के बाद दूसरा डोभा स्वीकृत किया गया, जिसका योजना कोड 3214004008/ IF/ 70809087706 था. दोनों डोभा का कार्य किये बगैर गलत अभिलेख तैयार कर 89,376 रुपये की राशि की निकासी कर ली गयी, जबकि लाभुक मदन पहाड़िया का कहना है कि उनके नाम से कोई भी डोभा नहीं बना है. पंचायत के ही बेटका किस्कू, लड़गा मरांडी, रफाईल मरांडी, जमीन सोरेन, छोटेलाल किस्कू, शिवलाल मरांडी के नाम पर डोभा निर्माण योजना स्वीकृत की गयी थी, जबकि योजना के भौतिक सत्यापन के दौरान योजना नही मिली. ग्रामसभा की बैठक में भी ग्रामीणों ने उपरोक्त लोगों के नाम से डोभा निर्माण से साफ इनकार किया और इसका लिखित साक्ष्य भी दिया. वहीं, बगैर कार्य किये गलत अभिलेख तैयार कर छह योजनाओं में 1,43,472 रुपये की निकासी कर ली गयी.

मस्टर रॉल में गलत हाजिरी दिखाकर पंचायत में 347 दिन की मजदूरी का भी किया गया गबन

पंचायत में एक ओर डोभा निर्माण के नाम पर गलत अभिलेख तैयार कर राशि की निकासी तो की ही गयी, वहीं जहां कुछ लोगों का डोभा निर्माण किया भी गया है, वहां अधिक दिन कार्य दिखाकर मजदूरी हड़पी गयी. मनरेगा मजदूर जोहन मरांडी ने मलोती किस्कू की जमीन पर 18 दिन कार्य किया था, जबकि एमआईएस में 12 दिन अधिक कार्य दिखाया गया है. मस्टर रॉल में गलत हाजिरी दिखाकर 2016 रुपये की अवैध निकासी कर ली गयी. इस तरह पंचायत में डोभा निर्माण में मजदूरों के नाम पर मजदूरी का गबन करने के कई मामले समाने आये हैं, जिनमें 347 दिन बिना मजदूरों के कार्य किये 58,296 रुपये की निकासी कर ली गयी.

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मृत लोगों के नाम पर भी मजदूरी की हुई लूट

पंचायत के हाथीगढ़ गांव के बरसन मरांडी की मौत तीन वर्ष पहले हो चुकी थी. वहीं, उनकी पत्नी दूसरी शादी कर गांव छोड़कर चली गयी है. इसके वबजूद मनरेगा योजना में लूट के मकसद से दोनों के नाम पर 24 दिन की मजदूरी मस्टर रॉल में दिखायी गयी और 4,024 रुपये की राशि का गबन कर लिया गया.

पंचायत के डोहरी संथाली निवासी नहीं होने के बाद भी योजना स्वीकृत कर 56,280 रुपये का कर लिया गया गबन

पाकुड़ में मनरेगा योजनाओं में घोटाला करने के लिए कई प्रपंच किये गये. इसमें वैसे लोगों के नाम से भी योजना स्वीकृत की गयी, जिसका घर और जमीन गांव में है ही नहीं. कमलघाटी पंचायत के डोहरी संथाली गांव में कमला पहाड़िया नहीं रहता है. ग्रामीण भी इस नाम के किसी व्यक्ति को नहीं जनते हैं. इसके वबजूद मनरेगा की राशि का गबन करने के मकसद से योजना स्वीकृत की गयी, जिसका योजना कोड 70 80 90 1049 9274 है. इस योजना में कमल पहाड़िया के नाम से वर्क कोड दिखाकर एमआईएस 2 बी के अनुसार 56,280 रुपये की राशि की निकासी की गयी.

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कार्रवाई के नाम पर हो रही खनापूर्ति

पंचायत की योजना में हुई गड़बड़ी के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर 6000 के आस-पास जुर्माना की राशि वसूली गया है और कर्मचारियों को आदेश दिया गया कि अवैध निकासी की गयी राशि को पुन: रिकवरी कर जमा करें. उन्हें भविष्य में ऐसी गलती नहीं करने की हिदायत देकर छोड़ दिया गया. जबकि, राशि की रिकवरी 12.5 प्रतिशत ब्याज के साथ की जानी चहिए, जो नहीं की जा रही है. मनरेगा योजना में गड़बड़ी और घोटाले प्रमाणित होने के बाद संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-1988 के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए था.

कल पढ़िये पाकुड़ में मनरेगा घोटाला की अगली कड़ी

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