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मीटर खरीद मामले में जेबीवीएनएल जिद पर अड़ा, मनमाने ढंग से टेंडर के बाद सीएमडी की चिट्ठी की भी परवाह नहीं, केंद्र ने कहा, कार्रवाई हो

जेबीवीएनएल (झारखंड विद्युत वितरण निगम लिमिटेड) ऊर्जा के क्षेत्र में जो मर्जी वो करता है. उसे किसी की परवाह नहीं. स्मार्ट मीटर खरीद मामले में ऐसे खुलकर सामने आ रहा है कि विभाग को ना तो केंद्र की चिट्ठी की परवाह है और ना ही अपने विभाग के सीएमडी के निर्देश की.

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Ranchi: जेबीवीएनएल (झारखंड विद्युत वितरण निगम लिमिटेड) ऊर्जा के क्षेत्र में जो मर्जी वो करता है. उसे किसी की परवाह नहीं. स्मार्ट मीटर खरीद मामले में ऐसे खुलकर सामने आ रहा है कि विभाग को ना तो केंद्र की चिट्ठी की परवाह है और ना ही अपने विभाग के सीएमडी के निर्देश की. स्मार्ट मीटर खरीद मामले में विभाग ने गड़बड़ी के सारे रिकॉर्ड तोड़े. सीवीसी की गाइडलाइन को साइड कर टेंडर किया. टेंडर में भाग लेने के लिए किसी भी कंपनी का टर्नओवर 400 करोड़ कर दिया. इससे कई कंपनी खुद-ब-खुद किनारे हो गये. मीडिया में बात आयी. कई फोरम पर इसकी शिकायत की गयी. लेकिन विभाग स्मार्ट मीटर खरीद मामले में अपनी जिद पर अड़ा है. पर्चेज ऑर्डर निकालने के बाद विभाग मीटर के लिए कंपनी को भुगतान करने की तैयारी में है.

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केंद्र ने कहा कार्रवाई करें, हुआ कुछ नहीं

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10 जुलाई 2018 को केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय की तरफ से संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी की एक चिट्ठी ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव के नाम आती है. चिट्ठी में स्मार्ट मीटर खरीद मामले में सीवीसी के नियम के विरुद्ध जाकर मीटर खरीदने के मामले पर सचिव उचित कार्रवाई करने का निर्देश प्रदान सचिव को देते हैं. सचिव अपनी चिट्ठी में कहते हैं कि किसी मनीष भटनागर ने शिकायत की है कि बिजली एक्ट 2003 का उल्लंघन कर विभाग मीटर खरीद के लिए टेंडर निकाला है. प्रधान सचिव ने चिट्ठी को जेबीवीएनएल को बढ़ा दिया और मामले में उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया. लेकिन विभाग की तरफ से किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हुई.

“जैसे ही मेरे पास मामले से जुड़ी शिकायत आयी, मैंने संबंधित विभाग को कार्रवाई के लिए कागजात बढ़ा दिये. देखना होगा कि जेबीवीएनएल ने मामले पर किस तरह की कार्रवाई की है, या करने की तैयारी में है.-  नितिन मदन कुलकर्णी (सीएमडी, ऊर्जा विभाग)

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विभाग का अपना अलग तर्क है

जेबीवीएनएल के अधिकारियों के  इस मामले पर अपना अलग तर्क है. उनका कहना है कि मीटर खरीदने के लिए उनके पर्चेज कमेटी ने जो तरीका अपनाया है, वो बिलकुल सही है. टेंडर के लिए किसी भी कंपनी के 400 करोड़ के टर्नओवर पर विभाग का कहना है कि ऐसा इसलिए किया गया है कि कम कंपनिया और बड़ी कंपनियां टेंडर प्रक्रिया में भाग लें. वहीं बिहार और दूसरे राज्यों में इसी मीटर की कम कीमत पर विभाग का कहना है कि झारखंड में जो मीटर खरीदा जा रहा है, वो मीटर दूसरे राज्यों से अलग है. अपनी खूबी की वजह से मीटर की कीमत ज्यादा है. बताते चलें कि पड़ोसी राज्य में इसी टेंडर की कीमत करीब 680 है और झारखंड में इसी मीटर की कीमत करीब 900 रुपए हैं.

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विभाग ने टेंडर प्रक्रिया में की है मनमानी

टेंडर प्रक्रिया में मनचाही कंपनियां ही भाग ले सकें, इसके निदेशालय ने टेंडर के लिए उन्हीं कंपनियों को बुलाया जिनका टर्न ओवर 400 करोड़ है. यहां ये जानना जरूरी है कि स्मार्ट मीटर के लिए टोटल टेंडर वैल्यू करीब 60 करोड़ का है. सीवीसी की नियमावली 17/12/2002 और 07/05/2004 के मुताबिक किसी भी टेंडर के लिए टर्नओवर टेंडर वैल्यू से 40 फीसदी तक ज्यादा होना चाहिए. लेकिन यहां कंपनी का टर्नओवर 400 करोड़ कर दिया गया. जो टेंडर वैल्यू के करीब 700 फीसदी ज्यादा हो गया.

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बिहार के लिए मीटर की कीमत 682 और झारखंड के लिए 905 रुपए

जिन कंपनियों ने झारखंड में टेंडर लिया है, वही कंपनी बिहार और यूपी में भी मीटर सप्लाई करने का काम कर रही हैं. लेकिन ये जानकर हैरत होगी कि जिस मीटर को बिहार में 682, यूपी में 644 रुपए में कंपनी दे रही है, उसी मीटर की कीमत झारखंड में 905 रुपए है. JBVNL निदेशालय की तरफ से टेंडर प्रक्रिया में एल वन आयी, कंपनी HPL ने एक मीटर के लिए 947 रुपए कोट किया था. JBVNL ने जो पर्चेज ऑर्डर कंपनी को दिया है, उसमें जीएसटी जोड़कर विभाग की तरफ से कंपनी को 905 रुपए दिए जाएंगे. यानि बिहार से 223 और यूपी से 261 रुपए ज्यादा.

करीब 18.5 करोड़ का घोटाला करने की है साजिश

JBVNL ने जो पर्चेज ऑर्डर कंपनी को दिया है, उसमें जीएसटी जोड़कर विभाग की तरफ से कंपनी को 905 रुपए दिए जाएंगे. यानि बिहार से 223 और यूपी से 261 रुपए ज्यादा. गौर करने वाली बात है कि जब बिहार और यूपी में 682 और 644 रुपए में वही कंपनी मीटर उपलब्ध करा दे रही है, तो झारखंड में 261 रुपए ज्यादा लेने का क्या मकसद है. आखिर हर मीटर पर लिए जाने वाले 261 रुपए किस-किस की जेब में जाएंगे. बिजली उपकरण में डील करने वाली दूसरी कंपनी वालों का कहना है कि झारखंड में सात लाख स्मार्ट मीटर आपूर्ति करने के लिए करीब 18,50000 रुपए का घोटाला किया जा रहा है. ये पैसा कंपनी से लेकर JBVNL निदेशालय के बड़े अधिकारियों की जेब तक जाएगा. आरोप ये भी लग रहे हैं कि सरकार सब जानते हुए भी शांत है. आखिर क्यों सरकार टेंडर को रद्द नहीं कर रही है.

टेंडर में भाग लेने वाली सभी कंपनियों को ऑर्डर दिये गये

इधर JBVNL निदेशालय स्मार्ट मीटर के लिए टेंडर में भाग लेने वाली सभी कंपनियों को खुश करने की तैयारी में है. हो भी क्यों ना, सभी बड़ी टर्नओवर वाली कंपनियां हैं. जो कंपनी एलवन आयी है वो HPL है. विभाग ने अभी इस कंपनी को 1,40000 मीटर सप्लायी करने का ऑर्डर दिया है. झारखंड में सात लाख स्मार्ट मीटर की जरूरत है. ऐसे में निदेशालय टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने वाली GENUS, L&T, L&G और SECURE को भी ऑर्डर देने की तैयारी में है. सभी कंपनियों को एलवन यानि HPL वाली रेट यानि 905 रुपए प्रति मीटर सप्लायी का ऑर्डर देने की तैयारी है. ऐसे में जाहिर तौर पर करीब 18.5 करोड़ यूपी और बिहार से ज्यादा विभाग कंपनियों को भुगतान करेगा. इसी रकम की बंदरबांट घोटाले के तौर किये जाने की तैयारी है.

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