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..तो त्रिवेणी सैनिक कंपनी चला रही है “विलेज मोबेलाइजेशन फोर्स” नामक गुंडा गिरोह

  • एजीएम गोपाल सिंह के बनाये गिरोह ने की उनकी हत्या
  • अपराधियों-नक्सलियों को मिला कर खड़ा किया गया गुंडा गिरोह
  • सरकार और प्रशासन को कंपनी करती रही गुमराह, एजीएम की हत्या के बाद हुआ खुलासा

Hazaribagh: एनटीपीसी के पंकरी बरवाडीह कोल माइंस के लिए खनन कर रही त्रिवेणी सैनिक कंपनी के एजीएम गोपाल सिंह हत्याकांड के खुलासे के बाद एक और बेहद सनसनीखेज खुलासा हुआ है.

त्रिवेणी सैनिक कंपनी द्वारा अपराधियों-नक्सलियों व अन्य असमाजिक तत्वों को मिलाकर “विलेज मोबेलाइजेशन फोर्स” नामक एक गिरोह चलाया जाता है. जिसमें शामिल लोगों को आठ हजार से एक लाख तक मासिक वेतन दिया जाता है.

मुख्य बात यह है कि गोपाल सिंह द्वारा बनाये फोर्स में शामिल लोगों ने ही उनकी हत्या की है.

इस मामले के खुलासे से एक गम्भीर और बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि त्रिवेणी सैनिक कंपनी ने अपराधियों-नक्सलियों व अन्य आपराधिक तत्वों को मिला कर “विलेज मोबेलाइजेशन फोर्स” क्यों बनाया और क्यों उन्हें इतने बड़े मासिक वेतन का भुगतान कर रही है ?

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इसके पूर्व भी चिरुडीह गोलीकांड के बाद सरकार की तरफ से पूर्व सीएस राजबाला वर्मा, गृह सचिव एनएन पांडेय के नेतृत्व में बनी उच्चस्तरीय जांच टीम ने सरकार को जो रिपोर्ट दी थी, उसमें त्रिवेणी सैनिक द्वारा आम लोगों को दरकिनार कर असमाजिक तत्वों का सहयोग लेने की बात कही गयी थी.

जिप अध्यक्ष सुशीला देवी के पति पूर्व गैंगस्टर लखन साव गोलीकांड मामले में त्रिवेणी सैनिक द्वारा अपराधियों को सहयोग करने की बात सामने आ चुकी है.

गुमराह कर प्रशासन को विलेन बनाता है विलेज मोबेलाइजेशन फोर्स

एनटीपीसी का माइनिंग कार्य त्रिवेणी सैनिक को मिलने के बाद क्षेत्र में आंदोलन, अराजकता, अपराधी-नक्सली तांडव की मुख्य वजह कंपनी की इसी फोर्स को बताया जा रहा है. रोजगार और मुआवजा के लिए आंदोलन में इसी फोर्स के गुर्गे भीड़ में घुस कर अराजकता फैलाते हैं और पुलिस-पब्लिक झड़प का मामला बता कर लोगों को पुलिस पुलिस की मदद से तंग करते हैं जिससे आम लोगों की नजर में प्रशासन विलेन की भूमिका में आ जाता है और यही कारण है कि पुलिस-पब्लिक के बीच एक-दूसरे पर कई मुकदमें दर्ज हुए हैं.

सरकार द्वारा रैयत-किसानों के रोजगार और मुआवजा की स्थिति जानने के लिए जब कोई उच्चस्तरीय कमिटी जांच करने आती है तो इसी कमिटी के लोगों को रैयत बताते हुए इनकी संख्या दिखा कर यह बता दिया जाता है कि इतने लोगों को रोजगार दिया गया है.

बाकायदा फोर्स गठन और संचालन के लिए बड़कागांव में तैनात एक पूर्व डीएसपी को सुरक्षा सलाहकार के पद पर नियुक्ति की गयी है.

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प्रशासन और किसान के बीच तनाव का माहौल बना अपना काम कर रही त्रिवेणी कंपनी

बताया जाता है कि आंदोलन कर रहे लोगों को कंपनी द्वारा गठित फोर्स के लोगों द्वारा धमकी दी जाती है, नहीं मानने पर पुलिस-प्रशासन की मदद लेकर फर्जी मुकदमा कर जेल भेजने का काम करती है. इसके लिए पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों को कंपनी द्वारा मोटी रकम तय की गयी है.

वहीं दूसरी तरफ अपराधियों-नक्सलियों को संरक्षण देकर अन्य अपराधी-नक्सलियों को अपराध करने का रास्ता बना देती है. शायद यही कारण है कि आये दिन इस इलाके में अपराधी-नक्सली घटनाएं बढ़ी हैं.

इन सबके बीच मुख्य सवाल अब भी है कि करीब तीन साल तक पुलिस को कंपनी द्वारा गुंडा गिरोह चलाये जाने की सूचना नहीं थी या जानबूझ कर इस तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा था ?

हालांकि हज़ारीबाग़ एसपी मयूर कन्हैया लाल पटेल ने विलेज मोबेलाइजेशन फोर्स की पूरी जांच करने की बात कही है.

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