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#Sci&Tech हाइपरलूप बुलेट ट्रेन से 1000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सफर कर सकेंगे आप

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New Delhi : हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने भारत की वित्तीय राजधानी मुंबई और पुणे के बीच एक हाइपरलूप के निर्माण के लिए मंजूरी दी है. इसकी दूरी 200 किलोमीटर होगी. यह दुनिया की पहली हाइपरलूप परियोजना है.

हाइपरलूप बुलेट ट्रेनों के लिए एक अति-उच्च गति वाला ग्राउंड ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम है. मुंबई-पुणे हाइपरलूप से दोनों शहरों के बीच 3.5 घंटे की यात्रा समय घटकर 35 मिनट हो जायेगी.

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अमेरिकन कंपनी कर रही है निर्माण

अमेरिकन ट्रांसपोर्ट टेक फर्म इस लाइन का निर्माण करेगी. इसे वर्जिन हाइपरलूप वन का नाम दिया गया है. गौरतलब है कि पहले से ही, मुंबई और पुणे के बीच सालाना लगभग 75 मिलियन यात्री यात्रा करते हैं. 2026 तक, यह आंकड़ा बढ़कर 130 मिलियन हो जायेगा. परिवहन प्रणाली का लक्ष्य मुंबई बंदरगाह और पुणे के बीच हल्की मालवाहक इकाइयों के साथ-साथ सालाना 150 मिलियन यात्री-यात्राएं करना है.

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हाइपरलूप में एक मैग्नेटिकली प्रोपेल्ड कैप्सूल शामिल है, जो प्रति घंटे 1,000 किलोमीटर से कम दबाव वाली ट्यूब के माध्यम से यात्रियों या कार्गो को ले जाता है. ब्रिटिश निवेशक और वर्जिन समूह के संस्थापक रिचर्ड ब्रैनसन द्वारा समर्थित वर्जिन हाइपरलूप वन, मई 2016 में प्रौद्योगिकी का परीक्षण करने वाली पहली कंपनी थी.

यह घोषणा वर्जिन हाइपरलूप वन और डीपी वर्ल्ड एफजेडई के एक कंसोर्टियम के गठन का मार्ग प्रशस्त करती है, जो भारत में एक वैश्विक व्यापार लीडर और प्रमुख बंदरगाह और लॉजिस्टिक ऑपरेटर है.

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दुनिया के कई हिस्सों में हो रहा है निर्माण

हालांकि यह दौड़ में एकमात्र हाइपरलूप परियोजना नहीं है. अमेरिका स्थित अनुसंधान कंपनी हाइपरलूप ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजी ने आंध्र प्रदेश के दक्षिणपूर्वी तटीय राज्य विजयवाड़ा और अमरावती को जोड़ने की योजना की घोषणा की है. यह भारत में ज्ञापन चरण से परे एकमात्र एकमात्र है.

यूएई और अमेरिका में भी इस योजना पर काम हो रहा है. साथ ही चीन, यूरोप के कुछ हिस्सों और कुछ अन्य देशों में भी इस योजना पर काम हो रहा है.

अमेरिका के परिवहन विभाग का विश्लेषण है कि हाइपरलूप मार्ग छोटे मार्गों पर हवाई यात्रा की तुलना में छह गुना अधिक लोकप्रिय होगी. और दुनिया की सबसे तेज उच्च गति वाली रेल प्रणाली की तुलना में तीन गुना अधिक लोग इसे पसंद करेंगे.

हालांकि विशेषज्ञों ने सवाल किया है कि यह दावा कितना टिकाऊ होगा. यह सड़क वाहनों की तुलना में  पर्यावरण के अनुकूल होगा या नहीं, वायु और ध्वनि प्रदूषण को कम करेगा या नहीं, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, भीड़भाड़ और यहां तक ​​कि सड़क दुर्घटनाओं के संबंध में भी सवाल उठाये जा रहे हैं.

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