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वनाधिकार कानून के अनुपालन में राजनीतिक दलों की भूमिका पर कार्यशाला

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Ranchi : आदिवासियों और कमजोर तबके के लोगों के सशक्तीकरण के लिए वनाधिकार कानून का अक्षरशः पालन नितांत जरूरी है. 12 सालों के बाद भी राज्य में इस कानून के अनुपालन की स्थिति बेहतर नहीं है. झारखंड के लगभग सभी राजनीतिक दलों ने माना कि इस कानून के सतत अनुश्रवण के लिए जरूरी है कि वनाधिकार अथॉरिटी बने और इसके लिए एक स्वतंत्र लोकपाल हो. यह अथॉरिटी वनाधिकार कानून के अनुपालन का सतत मूल्यांकन करे तथा राज्य सरकार पर दबाव बनाये रखे. राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने कहा कि राज्य के 14750 गांव की कुल 18.5 लाख हेक्टेयर वन भूमि पर आदिवासियों और गैर आदिवासियों का अधिकार वन कानून के तहत बनता है. प्रतिनिधियों ने आश्वस्त किया कि उनकी पार्टी आदिवासियों और कमजोर लोगों को इस कानून के माध्यम से दिये जानेवाले हक की वकालत करेंगे. राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मंगलवार को रांची प्रेस क्लब में झारखंड वनाधिकार मंच द्वारा आयोजित कार्यशाला में बोल रहे थे. कार्यक्रम में वनाधिकार मंच के विभिन्न जिलों के सहयोगी, संयोजक मंडली के सदस्य सुनीता, बनारसी सिंह, मंच के कार्यकर्ता कामिनी, स्निग्ध अग्रवाल, संजीव आदि उपस्तिथ थे.

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किसने क्या कहा

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  • भाजपा नेत्री और मांडर की विधायक गंगोत्री कुजूर ने कहा कि झारखंड में जल, जमीन और जंगल के बगैर झारखंड में अभिशासन की कल्पना नहीं की जा सकती है. उन्होंने कहा कि कार्यशाला की अनुशंसाओं के आलोक में वह सरकार से बात करेंगी तथा इसके बेहतर अनुपालन के लिए कार्य करेंगी.
  • झारखंड मुक्ति मोर्चा के सुप्रियो भट्टाचार्य एवं पूर्व विधायक योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि इस कानून के लागू होने के बाद भी आदिवासियों को वन विभाग परेशान कर रहा है. उन्होंने कहा कि जेएमएम के लिए जंगल का सवाल हमेशा से सर्वोपरि रहा है.
  • राष्ट्रीय जनता दल के गौतम सागर राणा ने कहा कि जमीन और जंगल के सवाल पर सजग रहने की जरूरत है. कॉरपोरेट और सरकार के गठजोड़ पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि वनाधिकार कानून के साथ अन्य कानून को समग्रता से लेकर अभियान छेड़ने की जरूरत है.
  • कांग्रेस के जेपी गुप्ता एवं सुंदरी तिर्की ने कहा कि वनाधिकार कानून कांग्रेस का बेबी है और इसके बेहतर अनुपालन के लिए हम हमेशा सजग हैं. उन्होंने सिविल सोसाइटी को इस मामले में हर सहयोग देने का आश्वासन दिया.
  • सीपीएम के जेडी बक्शी ने कहा कि माकपा इस कानून को लाने में सबसे अगली पंक्ति में रही है. माले के औरो ने कहा कि उनकी पार्टी इस कानून को लेकर ग्रासरूट पर काडर विकसित कर रही है. आनेवाले दिनों में बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे.
  • आजसू के जयंतो घोष ने ग्राम सभा को जागरूक करने और वन लोकपाल को इस कानून के लिए जरूरी बताया.
  • आम आदमी पार्टी के राजन ने सरकार की इच्छा शक्ति को इस कानून के अनुपालन में सबसे बड़ा बाधक माना. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस कानून को लेकर सोशल ऑडिट और वनाधिकार अथॉरिटी बनाये जाने की वकालत करती है.
  • कार्यक्रम के प्रारंभ में संजय बसु मल्लिक, जॉर्ज मोनीपल्ली एवं सुधीर पाल ने वनाधिकार से संबंधित विविध पहलुओं पर प्रकाश डाला. संजय बसु मल्लिक ने वनाधिकार कानून के महत्व पर प्रकाश डाला. जॉर्ज मोनीपल्ली ने वनाधिकार कानून के अनुपालन के बाधक तत्वों की चर्चा की. सुधीर पाल ने राजनीतिक दलों की भूमिका एवं उनसे सिविल सोसाइटी की अपेक्षा पर प्रकाश डाला.

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