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RERA में भी न्याय के लिए इंतजार

Vivek Sharma

Ranchi: झारखंड रियल इस्टेट रेगुलेटरी आथोरिटी (रेरा) का गठन इसलिए किया गया कि बिल्डर लोगों को ठगे तो वे न्याय के लिए गुहार लगा सके. इसके लिए ऑफलाइन के अलावा ऑनलाइन कंप्लेन की भी सुविधा खरीदारों को दी गई, जिसके तहत बिल्डर के द्वारा ठगे जाने पर लोगों ने रेरा में गुहार लगाई. लेकिन रेरा में भी उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है. वहीं सुनवाई के लिए लोगों को इंतजार करना पड़ रहा है. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले तीन सालों के दर्जनों मामलों को सुनवाई के लिए तारीख पर तारीख दी जा रही है.

एक दिन में एक केस की सुनवाई

रेरा में भी कोर्ट के लिए दिन तय है, जहां एक दिन में एक या दो मामलों की सुनवाई के लिए तारीख दी जाती है. ऐसे में समझा जा सकता है कि सुनवाई की रफ्तार कितनी धीमी है. अगर इसी रफ्तार से रेरा में सुनवाई जारी रही तो शिकायत करने वालों की संख्या बढ़ती जाएगी. वहीं जिन्हें दोबारा सुनवाई की डेट मिलेगी तबतक काफी समय निकल जाएगा.

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अथॉरिटी के पास 216 मामले

रेरा में राज्यभर से अबतक 598 प्रोजेक्ट ऑफलाइन रजिस्टर्ड हैं. जबकि ऑनलाइन 155 प्रोजेक्ट रजिस्टर्ड हैं. अब एडजुकेटिंग ऑफिसर के पास 165 मामले सुनवाई के लिए हैं जिन्हें अलग-अलग सुनवाई की तारीख दी गई है. इसमें कुछ ऐसे भी मामले है जिन्होंने 2019 में ही कंप्लेन दर्ज कराई थी. वहीं अथॉरिटी के पास 165 मामले हैं जिन्हें भी न्याय का इंतजार है.

क्या है RERA (रियल एस्टेट रेगुलेटरी एक्ट)

रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 भारत की संसद का एक अधिनियम है जो घर खरीदारों के हितों की रक्षा करने और अचल संपत्ति में निवेश को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है. यह बिल राज्यसभा में 10 मार्च 2016 को और लोकसभा में 15 मार्च 2016 को पारित कर दिया गया था. 92 में से 69 अधिसूचित वर्गों के साथ 1 मई 2016 से यह अधिनियम अस्तित्व में आया. बिल्डरों, प्रमोटरों और रियल एस्टेट एजेंटों के खिलाफ शिकायतों में वृद्धि के अनुसार बनाया गया है जिसमें खरीदार के लिए घर कब्जे में देरी, समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद भी प्रोमोटरों का गैर जिम्मेदाराना व्यवहार समेत अन्य समस्याएं हैं.

रेरा का एकमात्र उद्देश्य खरीदारों के हितों की रक्षा के साथ ही प्रोमोटरों और रियल एस्टेट एजेंटों के लिए एक पथ रखना है ताकि उन्हें बेहतर सेवाओं के साथ आगे आने का मौका मिले.

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रेरा की चेयरमैन सीमा सिन्हा ने कहा कि किसी भी केस में दोनों पक्षों को सुनना जरूरी है. कई बार ऐसा होता है कि एक पक्ष के लोग आते नहीं हैं. इसलिए मामले की सुनवाई समय से नहीं हो पाती. फिर भी हमारा प्रयास है कि सुनवाई जल्द हो और खरीदारों को उनका हक मिल जाए. रेरा में लोगों का भरोसा बढ़ा है इसलिए केस भी काफी आ रहे हैं.

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