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देशद्रोह के आरोपी बनाये गये विनोद कुमार का मुख्यमंत्री के नाम खुला पत्र

पत्थलगड़ी मामले में देशद्रोह के आरोपी बनाये गये विनोद कुमार ने मुख्यमंत्री के नाम खुला पत्र लिखा है. बता दें कि विनोद कुमार पर खूंटी से जुड़े मामले को लेकर 26 जुलाई को खूंटी पूलिस के द्वारा देशद्रोह का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज किया गया था. विनोद कुमार ने मुख्यमंत्री रघुवर दास के नाम खुला पत्र जारी किया है.   

आदरणीय रघुवर दास जी,

आज आप भाजपा में हैं और झारखंड में एनडीए सरकार के मुख्यमंत्री. लेकिन आप भी उसी 74 के जेपी आंदोलन से सक्रिय राजनीति में आये हैं, जिससे हम भी जुड़े थे. यह पत्र मैं आपको उसी रिश्ते से लिख रहा हूं. क्योंकि जेपी के नेतृत्व में कुछ दिन रह कर हम सब ने राष्ट्रवाद और देशद्रोह के कुछ अर्थ तो जरूर समझे हैं. क्या आपकी जानकारी में खूंटी थाना में बीस लोगों के खिलाफ देशद्रोह का एफआईआर दर्ज हुआ है? यदि नहीं तो आपको जानकारी होनी चाहिए, क्योंकि यह एक गंभीर आरोप है जिसकी सजा उम्र कैद से लेकर मृत्युदंड तक हो सकती है. हम आपको याद दिलाना चाहते हैं कि हम सब इस लोकतांत्रिक देश के नागरिक हैं और भारतीय संविधान का आदर करते हैं.

लेकिन हम यह भी मानते हैं कि सामान्य नागरिक संविधान के कानूनी प्रावधानों से जिस तरह से बंधा है, उसी तरह खुद को जनता का सेवक कहने वाले जन प्रतिनिधि और पुलिस और प्रशासन भी. और हमें लगता है कि इस मामले में खूंटी पुलिस-प्रशासन ने खुद को संविधान से उपर समझ कर काम किया है. बीस लोगों पर एक तरह के अभियोग और धाराएं लगा दी गयीं. मानो वे सभी किसी एक संगठन या गिरोह के सदस्य हों. जबकि हकीकत यह है कि उनमें अलग अलग पेशे के लोग हैं. कुछ सरकारी सेवक हैं, कुछ बैंककर्मी, कुछ पत्रकार-लेखक, कुछ समाजकर्मी.

मुख्य रूप से आरोप यह है कि इनमें से अधिकतर लोगों ने सोशल मीडिया पर लिख कर संविधान की गलत व्याख्या की, भ्रामक बातें फैलाई और खूंटी में लोगों को देशद्रोह के लिए उकसाया, जिस क्रम में 26 जून को खूंटी में आंदोलनरत आदिवासियों ने सांसद कड़िया मुंडा के सुरक्षा गार्डों का अपहरण किया, इस संबंध में हम विनम्रतापूर्वक कहना चाहते हैं कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने आईटी की धारा 66 ए / 66 एफ को दो साल पूर्व ही असंवैधानिक घोषित करते हुए निरस्त कर दिया है. बावजूद इसके खूंटी थाना प्रभारी ने उस धारा का प्रयोग किया जो हमारे हिसाब से असंवैधानिक कदम है, साथ ही माननीय उच्चतम न्यायालय की अवमानना भी.फेसबुक/सोशल मीडिया का इस्तेमाल नकारात्मक कार्यों के लिए नहीं होना चाहिए और गैर जिम्मेदाराना लेखन के लिए उचित कार्रवाई भी होनी चाहिए.

लेकिन महोदय, उसके लिए किसी को देशद्रोही करार देना कानून का दुरुपयोग और संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करने का प्रयास है. लोकतंत्र और शांतिमयता के प्रति हमारी असंदिग्ध निष्ठा है और हम ऐसा कोई काम न करते हैं, न करेंगे जो संविधान के विरुद्ध हो और देश व समाज के लिए अहितकारी हो. आशा है, आप विवेकपूर्वक इस विषय में हस्तक्षेप करेंगे और इस एफआईआर को निरस्त करने का निर्देश देकर अपनी संवेदनशीलता का परिचय देंगे.

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