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‘सरकार की कारगुजारियां उजागार करने वाले को देशद्रोही का तमगा देना बंद करें रघुवर सरकार’

Ranchi: राज्य के 20 सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ देशद्रोह के केस को लेकर विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं. शुक्रवार को सभी प्रमुख विपक्षी दलों एवं विभिन्न जनसंगठनों की ओर से संवाददाता सम्मेलन कर 20 सामाजिक कार्यकर्ताओं के ऊपर देशद्रोह के मुकदमे की तीखी आलोचना कर सरकार से मुकदमा वापस लेने की मांग की गई.

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पुलिस ने दर्ज किया है देशद्रोह का केस

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ज्ञात हो कि हाल ही में खूंटी में हुए गैंगरेप तथा भाजपा नेता कड़िया मुंडा के आवास से चार सुरक्षाकर्मियों के अपहरण के मामले में, खूंटी पुलिस ने एक नयी प्राथमिकी दर्ज कर 20 लोगों के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया है. इन पर खूंटी पुलिस के द्वारा 26 जुलाई को दर्ज प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि सोशल मीडिया के माध्यम से राष्ट्रविरोधी क्रियाकलाप एवं संविधान विरोधी व्याख्या कर साम्प्रदायिक एवं जातीय माहौल बिगाड़ने की कोशिश की है.

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सरकार विरोध के स्वर सुनना नहीं चाहती-मरांडी

संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा आज जिस तरह से राज्य सरकार के द्वारा 20 सामाजिक कार्यकर्ताओं पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया है. वह गलत है और यहां पर वे लोग भी मौजूद है. अगर ये देशद्रोही हैं तो इनकी मदद तो हम सभी कर रहे हैं, इनके लिए लड़ रहे हैं, तो ऐसे में हम भी देशद्रोही हो जायेंगे, तो सरकार बताएं कि क्या हमलोगों पर भी देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करेगी? यह सवाल बहुत गंभीर है, क्योंकि सरकार को जो भी बातें अच्छी नहीं लग रही, या जिनकी बातें अच्छी नहीं लग रही, उन्हें देशद्रोही का तमगा देने का काम कर रही है.

कुछ दिन पूर्व सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश पर जिस तरीके से राज्य में हमले हुए हैं. उसकी निंदा पूरे देश में हुई है और हमला करने वाले की अभी तक गिरफ्तारी नहीं की गई. इससे संदेश साफ होता है कि सरकार विरोध के स्वर को सुनना नहीं चाहती है.

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वही कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने कहा कि राज्य सरकार ने अगर सामाजिक कार्यकर्ताओं के ऊपर से मुकदमे नहीं हटाए तो इसके लिए व्यापक जन आंदोलन झेलने होंगे. लोकतंत्र में किसी की आवाज को दबाना, लोकतंत्र की हत्या के समान है. रघुवर सरकार को ये बातें अच्छी तरह समझ लेना चाहिए.

इस संवाददाता संम्मेलन में जिन लोगों पर मुकदमा किया गया है उनमें से अलोका कुजूर, बिनोद कुमार, स्टेन स्वामी, थियोडोर किड़ो, राकेश रोशन किड़ो ने भी अपनी बात रखी. प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद जन संगठनों की ओर से बैठक कर मुकदमे के सवाल पर आगे की रणनीति तय की गई. साथ ही राज्य के गृह सचिव को पत्र लिखकर पुलिस के द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी को निरस्त करने की मांग की गई है.

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संवाददाता सम्मेलन में माले के विनोद सिंह, मार्क्सवादी समन्वय समिति के अरूप चटर्जी, झारखंड मुक्ति मोर्चा से अंतु तिर्की, कांग्रेस से रामेश्वर उरांव, सुबोधकांत सहाय, सीपीआई के अजय सिंह, सीपीएम, राजद, अन्य दलों के प्रमुख नेता भी मौजूद थे. साथ ही विभिन्न जनसंगठनों के लोग भी मौजूद रहें, जिसमें दयामनी बारला, बशीर खान, अनिल अंशुमन, नदीम खान, आकाश रंजन, दीपा मिंज, वासवी किंडो, पीसी मुर्मू शामिल थे.

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