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दुमका : विधायक से शिकायत के बाद भी नहीं बना क्षतिग्रस्त पुल, जान हथेली पर रख पार करते हैं लोग

Dumka : मसलिया प्रखंड की पंचायत रांगा अतर्गत गोवासोल गांव में पुल के अत्यंत पुराने और क्षतिग्रस्त होने के कारण ग्रामीणों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. यह पुल इस गांव के साथ तोसोरिया, मोहलबना, तुड़का, प्यालगड़ाह, मनोहरचक आदि दर्जनों गांवों को प्रखंड मुख्यालय व दुमका से जोड़ने का काम करता है.

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इस पुल से कई छोटी गाड़िया जाती हैं. इस गांव में राजकीय मध्य विधालय सह उत्क्रमिक उच्च विद्यालय है जिसमें कलिपाथर, लतावर, शिकारपुर के बच्चे पढ़ने के लिए आते है. सभी इसी क्षतिग्रस्त पुल से आना जाना करते है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. पुल बनाने के लिए ग्रामीणों ने विधायक सह झारखंड सरकार की मंत्री लुईस मंराडी से फरियाद की गयी लेकिन उनका कार्यकाल खत्म होने को है पर आज तक पुल नहीं बना.

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क्या कहते हैं ग्रामीण?

पीताम्बर मांझी का कहना है कि पुल काफी जर्जर है. ग्रामीणों ने विधायक लुईस मरांडी को शिकायत की थी कि पुल जर्जर है, पुल बनना चाहिय. इसपर विधायक जी ने कहा कि होगा लेकिन उसके बाद भी कुछ नही हुआ.

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विकास के नाम पर सिर्फ वोट लिया जाता है और वोट लेकर निकल जाते है. बस जनप्रतिनिधि इतना ही काम करते हैं और ग्रामीणों के लिय कुछ नही करते हैं.

पवन कुमार वैध का कहना है कि पुल की स्थिति दयनीय है. जनता का कहना है कि विकास के नाम पर जो वादे किये गये थे अब तक पूरे नहीं हुए. अत: पुल जल्द बनवाया जाय. कितने सरकारें आयीं और गयीं लेकिन पुल की यही दशा बनी रहा. इससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है.

कृष्ण चन्द्र मांझी का भी कहना है कि पुल जर्जर हो गया है. बीच में पुल दब गया. पुल सड़क से नीचे हो गया है. वर्षा के दिनों में पुल डूब जाता है. पुल के दोनों साइड पीसीसी जो दिया गया था वह भी उखड़ चुका है. दोनों साइड की रेलिंग टूट चुकी है और कुछ क्षतिग्रस्त हो चुकी है. रेलिंग नही होने के कारण कोई भी वाहन पुल से नीचे गिर सकता है. मसलिया प्रखंड या दुमका जाने का यह एक मात्र रास्ता है.अगर यह पुल टूट जायेगा तो हमलोगों की समस्या और अधिक हो जायेगी. ग्रामीणों का एकमात्र नारा व निर्णय है- पुल नहीं तो वोट नही, विकास नहीं तो वोट नही.

इस मौके में फुलचंद महतो, विभीषण वैध, पूरण चन्द्र मांझी, गणेश कैरा, मनोज रॉय, मुनिलाल खैरा, सोकोल पाल, दिलीप मंडल, बुधन पाल, श्रृष्टि पाल, लक्षमण खैरा, प्रफुल मांझी आदि के साथ काफी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे.

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