
Akshay Kumar Jha
Ranchi: इस साल झारखंड के सावन पर सूखा पड़ सकता है. झारखंड में श्रावणी मेला को लेकर सावन का इंतजार भक्त ही नहीं बल्कि बहुत लोग करते हैं. लेकिन इस बार उनके इंतजार का फल मीठा नहीं होनेवाला. मेले का आयोजन हो या नहीं, इससे संबंधित फाइल सचिवालय के गलियारों में घूम रही है.
अभी तक को जो आकलन है, उससे साफ है कि देवघर श्रावणी मेला पर ग्रहण लगना लगभग तय है. हर बार की तरह इस बार देवघर में भक्त बाबा भोलेनाथ के दर्शन और पूजन नहीं कर पायेंगे. हर साल बिहार और झारखंड सरकार मिल कर श्रावणी मेला का आयोजन करती हैं. भागलपुर जिले के सुल्तानगंज से भक्त जल उठाते हैं और करीब 100 किमी का सफर तय करके देवघर पहुंचते हैं.
चार से पांच दिनों के इस सफर में रोजाना लाखों लोग हिस्सा लेते हैं. इतनी बड़ी भीड़ को संभालने के लिए दोनों राज्य के प्रशासन को चप्पे-चप्पे पर मुस्तैद रहना पड़ता है. लेकिन इस बार कोरोना संकट के दौरान ऐसा करना बिहार और झारखंड के लिए मुश्किल है.
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सोशल डिस्टेंसिंग के साथ 19,000 की भीड़ ही संभाली जा सकतीः देवघर प्रशासन
ऐसा नहीं है कि लॉकडाउन के बाद सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना खत्म हो जायेगा. पूरी दुनिया को इसका पालन करना ही होगा. इसी बाबत पर्यटन विभाग ने देवघर प्रशासन से राय मांगी कि देवघर प्रशासन श्रावणी मेला के लिए कितना तैयार है. देवघर प्रशासन की तरफ से एक ड्रिल किया गया. ड्रिल में पाया गया कि एक दिन में शहर में 19,000 से ज्यादा लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए नहीं आने दिय़ा जा सकता. इस रिपोर्ट को देवघर डीसी ने संथाल के कमिश्नर को बढ़ा दिया. कमिश्नर ऑफिस से ये रिपोर्ट रांची सचिवालय पहुंच चुकी है.
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पर्यटन विभाग ने स्वास्थ्य विभाग से मांगी राय
संथाल कमिश्नर की तरफ से देवघर प्रशासन की रिपोर्ट पर्यटन विभाग रांची को बढ़ा दी गयी. अब विभाग ने मामले पर राय जानने के लिए फाइल स्वास्थ्य विभाग को बढ़ा दिया है. लेकिन स्वास्थय विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मेला आयोजित कराना संभव नहीं लग रहा. मेले के वक्त लाखों की संख्या में लोग आते हैं. मेले में भक्तों के अलावा व्यापार करनेवालों की संख्या भी हजारों में होती है. ऐसे में कैसे सिर्फ 19,000 लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए शहर में आने दिया जा सकता है. दूसरी तरफ आखिर किस मैकेनिज्म के तहत भक्तों की सक्रूटनी की जा सकती है. इस मामले पर डिजास्टर मैनेजमेंट और स्राइन बोर्ड की भी बैठक होनी बाकी है. आखिरी फैसला सरकार की तरफ से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को करना है.
देश के तमाम धार्मिक स्थालों पर लगा है ताला
लॉकडाउन 4.0 तक देश के सभी बड़े मंदिरों पर ताला लगा हुआ है. शिरडी साईं मंदिर, सिद्धिविनायक मंदिर, तिरुपति बालाजी के साथ मस्जिदों और गिरिजाघरों पर भी ताला लगा हुआ है. लॉकडाउन 5.0 में धार्मिक स्थलों को पाबंदियों के साथ खोला जा सकता है. लेकिन धर्म के नाम पर मेले का आयोजन कराना मुश्किल है. ऐसे में देवघर श्रावणी मेले पर ग्रहण लगता दिख रहा है. इसका असर झारखंड और बिहार के हजारों लोगों की भक्ति के साथ-साथ जेब पर पड़ने वाला है.
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