
Ranchi: पिछले 14 दिनों से उत्तरकाशी के सिलक्यारा में मजदूर फंसे हुए है. बार बार की उम्मीद के बाद भी न ही मजदूर निकल पा रहे है और न ही उनके परिजनों को खुशखबरी मिल रही है. हालांकि केंद्र सरकार से लेकर उत्तराखंड सरकार और राज्य सरकारें प्रयासरत है. जिससे जल्द से जल्द मजदूरों को सुरंग के बारह निकाला जा सकें.बुधवार को ड्रिलिंग के दौरान सुरंग में सरिया पाया गया था. वहीं, मजदूरों को निकाली जाने वाली पाइप भी मुड़ गयी थी. दोनों ही समस्या शुक्रवार को ठीक की गयी. जिसके बाद फिर से खुदाई शुरू की गयी.

लगातार हो रही खुदाई के कारण ऑगर मशीन भी क्षतिग्रस्त हो गयी थी. मशीन के रास्ते में लोहे की रॉड आने के कारण समस्या हुई थी. जिसे शुक्रवार को ठीक किया गया. शनिवार को स्थिति ठीक रही तो कुछ उम्मीद जतायी जा सकती है. श्रम विभाग के कंट्रोल रूम की मानें तो एक के बाद एक नयी अड़चन टीम को मिल रही है. ऐसे में सबसे मुश्किल परिजनों को ढांढस बांधना है. कुछ मजदूरों के परिजन तो सिलक्यारा गये हुए है. वहीं, कुछ लगातार फोन पर संपर्क कर रहे है. जिससे स्थिति की जानकारी दी जा रही है.
बैचेनी के बावजूद उम्मीद है सब कुछ ठीक होने की
कंट्रोल रूम से जानकारी मिली कि वे परिजनों की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे है. वहीं, उन्हें लगातार स्थिति की जानकारी दे रहे है. नेशनल टीवी चैनल और अन्य माध्यम से भी परिजन स्थिति की जानकारी ले रहे है. मजदूरों को निकालने जाने के लिये अब बस दो पाइप डालने की जरूरत है. ऐसे में परिजनों को उम्मीद है कि जल्द अच्छी खबर सुनने को मिलेगी. हालांकि परिजनों में बैचेनी तो बहुत है. लोग बात करते हुए भावुक भी हो जा रहे है. फिलहाल पिछले कुछ दिनों से मजदूरों को पाइप के जरिये खाना पानी और ऑक्सीजन दी जा रही है.

1.2 मीटर पीछे हटना पड़ा
सुरंग में चल रही खुदाई से एक्सपर्ट्स ने 48 मीटर पाइप बिछाने में सफलता हासिल की थी. इसी दौरान ऑगर मशीन के सामने लोहे की रॉड आने से मशीन क्षतिग्रस्त हुई. वहीं छड़ काटने के लिये गैस कर्टर का इस्तेमाल किया गया. इस वजह से शुक्रवार को सुरंग में 1.2 मीटर पीछे हटना पड़ा. वहीं पाइप भी आगे से मुड़ने के कारण खराब हो गयी थी. जिससे 1.2 मीटर तक पाइप को भी काटना पड़ा. अब जीपीआर तकनीक से जानकारी मिली है कि 5.4 मीटर तक रास्ता पूरी तरह साफ है.
एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम कर रही अभ्यास
वहीं, मजदूरों को बाहर निकालने के लिये लगातार एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम अभ्यास कर रही है. मजदूरों को आठ सौ एमएम के पाइप के जरिये निकाला जायेगा. जहां स्ट्रेचर की मदद से मजदूरों को रेस्क्यू किया जायेगा. स्ट्रेचर के जरिये मजदूरों को एक एक कर खींचकर बाहर निकाला जायेगा. इसके लिये अभ्यास भी किया जा रहा है. घटना स्थल के पास ही मजदूरों की जांच के लिये 8 बेड का अस्पताल भी बनाया गया है. जहां से उनकी जांच की जायेगी. बता दें 41 मजूदरों को बाहर निकालने में 80 मिनट का समय लगेगा.
राज्य के 15 मजदूर
सुरंग में राज्य के चार जिलों के मजदूर फंसे है. इसमें रांची के तीन, पूर्वी सिंहभूम के 7, खूंटी के 3 और गिरिडीह के दो मजूदर है. फिलहाल इन मजदूरों को खाना पानी उपलब्ध कराया जा रहा है. विश्वजीत कुमार और सुबोध कुमार गिरिडीह से, रांची से अनिल बेदिया, श्राजेंद्र बेदिया और सुखराम, खूंटी से विजय होरो, चमरा उरांव, गणपति खिदुआ. पूर्वी सिंहभूम से टिकु सरदार, गुनोधर, रणजीत, रविंद्र नायक, समीर, महादेव और मुदतू मुर्मू है.
70 मीटर क्षेत्र में फैला मलबा
उत्तरकाशी के सिलक्यारा में चार धाम रोड परियोजना पर ये हादसा हुआ. जो 12 नवंबर को मलबा ढह जाने के कारण सुरंग गिर गया. घटना के बाद सुरंग के 70 मीटर क्षेत्र में मलबा फैल गया, जिससे मजदूरों का रास्ता बंद हो गया. जहां रोड परियोजना सुरंग में मलबा गिर जाने के कारण 41 मजदूर सुरंग में ही फंस गये है. पिछले कुछ दिनों से मजदूरों को पाइप के जरिये खाना और पानी दिया गया. विभाग की मानें तो सुरंग से निकलने पर मजदूरों को एयरलिफ्ट किया जायेगा.




